योग कापीराइट, रायल्टी और पेटेंट फ्री

पीएम मोदी यूएन में बोले: योग हमारी पुरानी संस्कृति, इसकी वजह से दुनिया भारत के साथ आई



न्यूयाॅर्क। अमेरिका के तीन दिन के दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएन मुख्यालय में योग दिवस (international yoga day)के कार्यक्रम में कहा कि योग का मतलब है- जोड़ना। लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि योग आपकी आयु, लिंग और फिटनेस स्तर के अनुकूल है। योग पोर्टेबल है और वास्तव में सार्वभौमिक है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले साल, 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष के रूप में मनाने के भारत के प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए पूरी दुनिया एक साथ आई थी। बाजरा एक सुपरफूड है। वे समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं और पर्यावरण के लिए भी अच्छे , पूरी दुनिया को देखना अद्भुत है योग के लिए फिर से साथ आएं। मुझे याद है मैनें यहां 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव रखा था।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए पूरी दुनिया भारत के साथ आई। योग भारत से आया। ये भारत की पुरानी संस्कृति और काॅपीराइट से फ्री है। आप योग को कहीं भी कर सकते हैं। ये फ्रलेक्सिबल है। ये सभी संस्कृतियों के लिए है। योग जिंदगी जीने का तरीका है। योग खुद के साथ और दुनिया के साथ शांतिपूर्ण तरीके से रहने का तरीका सिखाता है। कार्यक्रम यूएन के नार्थ लाॅन के गार्डन में हुआ, इसमें न्यूयाॅर्क के मेयर एरिक एडम , शेफ विकास खन्ना, संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष साबा कोरोसी समेत 180 देशों के लोग शामिल हुए। इस अवसर पर यूएन के नाॅर्थ लाॅन में योग करने पहुंचे पीएम मोदी ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। पीएम ने कार्यक्रम की शुरुआत लाॅन में लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की है। इससे पहले पीएम मोदी ने सुबह लोगों को योग दिवस की शुभकामनाएं दी थी। उन्होंने कहा था कि आज योग दिवस पर मैं कई दायित्वों के चलते आप लोगों के बीच नहीं हूं। भले मैं आपके साथ योग नहीं कर रहा हूं, लेकिन मैं योग करने के दायित्व से भाग नहीं रहा हूं। उन्होंने कहा कि योग दुनिया को जोड़ रहा है। साल 1985 की बात है। दुनिया में भारत को नई पहचान देने के लिए राजीव गांधी ने अमेरिका में फेस्टिवल आफ इंडिया के नाम से एक कार्यक्रम की शुरुआत की। इसका मकसद ये था कि भारत के अलग-अलग कल्चर और त्योहारों के बारे में दुनिया को पता चले। जून 1985 में इसी योजना के तहत फ्रांस की राजधानी पेरिस में राजीव गांधी ने एक भव्य प्रोग्राम कराया। इसमें पतंग उड़ाने के कार्यक्रम से लेकर भारतीय पिफल्में दिखाने और खाने तक को शामिल किया गया था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इसमें पेरिस के दो लाख लोग शामिल हुए थे।

राजीव गांधी ने कहा था कि पेरिस में सब कुछ है, पर आज हम यहां पूरे भारत को लेकर आए हैं। विदेश मामलों के विशेषज्ञों ने राजीव के इस प्रयास को तब भारत की कल्चरल डिप्लोमेसी बताया था। करीब 29 साल बाद एक बार फिर भारत के प्रधनमंत्राी नरेंद्र मोदी ने दुनिया में भारत को नई पहचान देने के लिए योग को कल्चरल डिप्लोमेसी के तौर पर इस्तेमाल किया। 2022 में दुनिया के 192 देशों ने योग दिवस को सेलिब्रेट कर इस डिप्लोमेसी की सफलता पर मुहर लगा दी। 27 सितम्बर 2014 को पीएम मोदी ने पहली बार यूनाइटेड नेशन्स में हर साल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाए जाने का प्रस्ताव रखा था। फोब्र्स के मुताबिक मोदी के इसी भाषण से जाहिर हो गया था कि भारत अब खुलकर योग को डिप्लोमेसी के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। 11 दिसम्बर 2014 को यूनाइटेड नेशन में भारतीय राजदूत अशोक मुखर्जी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव पेश किया था। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत के इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। पाकिस्तान नहीं चाहता था कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव पास हो। हालांकि इस प्रस्ताव को पहले से ही यूनाइटेड नेशन के करीब 177 देशों का समर्थन मिला हुआ था। मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी के 56 देशों में से 48 ने भारत का साथ दिया। इतना ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के प्रस्ताव पर चीन ने भी पाकिस्तान की बजाय भारत का साथ दिया। इस तरह बिना वोट कराए भारत का यह प्रस्ताव यूनाइटेड नेशन में सर्वसम्मति से पास हो गया। भारत ने योग डिप्लोमेसी से पाकिस्तान को तब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अकेला कर दिया था। वहीं, 2018 में भारत और चीन की सेना के बीच डोकलाम विवाद हुआ। इसके बावजूद साल भर बाद 21 जून 2019 को भारत और चीन के सैनिकों ने गुवाहाटी में एक साथ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया था। तब योग डिप्लोमेसी के जरिये दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव कम करने की कोशिश की गई थी।

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