युवा तुर्क पुष्कर धामी उत्तराखंड के सीएम बनेः दिग्गज दावेदारों को पीछे छोड़ा  

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  • युवा तुर्क पुष्कर धामी उत्तराखंड के सीएम बनेः दिग्गज दावेदारों को पीछे छोड़ा  
  • महाराष्ट्र वाले फड़नवीस की तरह मंत्री बने बिना सीधे मुख्यमंत्री बने  
  • निर्विवाद चेहरे पर जतलाया विधानसभा चुनाव-2022 फतह का भरोसा 
  • समृद्ध-स्वस्थ-सुंदर राज्य व आखिरी छोर पर खड़े शख्स का विकास ही सरकार के नए मुखिया का लक्ष्य


चेतन गुरुंग 
देहरादून।
संघर्षों में तपे और पिछले मौकों पर मंत्री बनने से चूक गए युवा तुर्क पुष्कर सिंह धामी शनिवार को सीधे मुख्यमंत्री बन गए। उन्होंने कई दावेदार सूरमाओं को अप्रत्याशित रूप से पीछे छोड़ कर सियासी समीक्षकों को भी हैरान कर दिया। पर्यवेक्षक नरेंद्र तोमर ने पार्टी विधायक दल की बैठक में उनके नाम का ऐलान किया तो कई आला नेता और विधायक भौंचक्के रह गए। धामी ने ‘शाह टाइम्स’ से कहा, ‘मेरा लक्ष्य उत्तराखंड को समृद्ध-स्वस्थ-स्वच्छ-सुंदर बनाना और देवभूमि के अध्यात्म से दुनिया को परिचित कराना है’। वह कल दोपहर बाद शपथ लेंगे।   
पुष्कर ने मुख्यमंत्री की जंग में सतपाल महाराज, बिशन सिंह चुफाल, धन सिंह रावत और पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत को पीछे छोड़ने में सफलता पाई। वह पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की स्वाभाविक पसंद बन के उभरे। पार्टी को ऐसे चेहरे की दरकार थी जो युवा और दमदार होने के साथ ही लोकप्रिय हो। पार्टी के सभी धड़ों में स्वीकार्यता रखता हो। पुष्कर में ये सारी खूबियाँ दिखीं। तीरथ की विदाई की पटकथा 2-3 दिन पहले ही लिख दिए जाने के साथ ही पुष्कर के नाम पर मुहर ऊपर वाले लगा चुके थे। आज सिर्फ औपचारिक ऐलान हुआ। 


ये इससे भी जाहिर होता है कि नेता विधायक दल के चुनाव से घंटों पहले ही विकिपीडिया में तीरथ की जगह पुष्कर का नाम नए मुख्यमंत्री के तौर पर इंटरनेट की दुनिया में आ चुका था। पुष्कर को संघ के साथ ही भाजपा के अलग-अलग धड़ों के बीच भी सम्मान-विश्वास हासिल है। महाराष्ट्र के राज्यपाल और उत्तराखंड के पूर्व सीएम तथा पूर्व भाजपा अध्यक्ष भगत सिंह कोश्यारी उनके सियासी गॉडफादर का दर्जा रखते हैं। खटीमा से दो बार के इस 45 वर्षीय विधायक की छवि और प्रतिष्ठा परिपक्व, नपा-तुला और सधा बोलने की है। अविभाजित यूपी में एबीवीपी के साथ काम करते हुए उन्होंने सियासी गुण सीखने शुरू कर दिए थे। 


पुष्कर ने मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद मोदी-शाह-पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा का आभार प्रकट करने के साथ ही कहा कि वह पार्टी के सिपाही हैं। तीनों के साथ ही अन्य वरिष्ठों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए कभी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने ‘शाह टाइम्स’ से कहा, ‘मेरी प्राथमिकता देवभूमि को समृद्ध-स्वस्थ-स्वच्छ-सुंदर राज्य के तौर पर विकसित करना और इसकी यही छवि फैलाना है। राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ाना है’। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था हिल गई है। उसको फिर से पटरी पर ला के मजबूती प्रदान करना है। 


पुष्कर के सीएम बनाए जाने का ऐलान होते ही अन्य दावेदारों के चेहरों पर मायूसी दिखाई दी, जबकि पार्टी मुख्यालय का नजारा जश्न में बदल गया। यहाँ से वह सीधे राजभवन गए और राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से मुलाक़ात की। इसके बाद वह बीजापुर गेस्ट हाउस पहुंचे। वहाँ त्रिवेन्द्र-पर्यवेक्षक तोमर, प्रभारी दुष्यंत गौतम, भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी के साथ ही तमाम मंत्रियों और विधायकों ने उनसे मुलाक़ात कर बधाई दी। समर्थकों ने पटाखे छोड़ के खुशी मनाई। भाजपा और मोदी-शाह ने धामी पर दांव खेल के ये साफ कर दिया कि वे मिशन-2022 को युवा-स्फूर्तिवान-बेदाग-सुलझे हुए तथा ईमानदार छवि वाले सीएम के चेहरे के बूते फतह करना चाहते हैं। 


प्रदेश के 11वें मुख्यमंत्री पुष्कर के खाते में भी महाराष्ट्र के देवेंद्र फड़नवीस सरीखी उपलब्धि जुड़ गई। वह भी मंत्री कभी नहीं बने। विधायक से सीधे सीएम बने। ये उपलब्धि उनसे पहले सिर्फ देवेंद्र के खाते में जुड़ी थी। उत्तराखंड में वह पहले मुख्यमंत्री हैं जो बिना मंत्री बने इस कुर्सी तक सीधे पहुंचे। नए मुख्यमंत्री कल दोपहर या फिर शाम को शपथ ग्रहण करेंगे। इसके लिए दोनों वक्त का लगन ज्योतिष के मुताबिक निकाला गया है। कल उनकी पत्नी गीता और दोनों बच्चों के साथ ही परिवार के अन्य लोग भी शपथ ग्रहण समारोह में शरीक होंगे। 


उम्मीद है कि मंत्रिपरिषद के सदस्य भी रविवार को सीएम के साथ ही शपथ ग्रहण करेंगे। ये साफ नहीं है कि किसी मंत्री को हटाया जाएगा या फिर किसी नए चेहरे को मंत्री बनाया जाएगा। मंत्रियों के महकमे भी पूर्व के मुक़ाबले कुछ अलग हो सकते हैं। तीरथ सरकार में कम या महत्वहीन महकमों वालों को इस बार अच्छे मंत्रालय दिए जा सकते हैं। नौकरशाही में भी इस बार जोरदार फेरबदल के आसार हैं। धामी के पास वक्त कम है लेकिन उनको काम करने और नतीजा देने के लिए ऊपर वालों ने फ्री हैंड दिया है। 

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