योगी आदित्यनाथ को शिवसेना का समर्थन

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महाराष्ट्र में भले ही शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आमने  सामने हैं लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में शिवसेना भी अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा का ही साथ देती दिखाई  पड़ रही है। हर चुनाव  की तरह इस बार भी शिवसेना उत्तर प्रदेश में दमखम दिखाने को तैयार है लेकिन शिवसेना ने ऐलान कर दिया है कि वह किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी, बल्कि अकेले ही यूपी चुनाव लड़ेगी।

 

शिवसेना नेता संजय राउत  ने तो सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ भी की है और कहा है कि वह इतने ताकतवर नेता हैं कि वह कहीं से भी चुनाव लड़ेंगे, जीतेंगे ही। संजय राउत ने कहा कि योगी आदित्यनाथ बड़े नेता हैं और हम उनका आदर करते हैं। शिवसेना ने  एकबार भी कांग्रेस  या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ( एनसीपी ) का नाम नहीं लिया। कांग्रेस का तो प्रदेश की बड़ी पार्टियों में  शुमार किया जाता है। महाराष्ट्र में तो कांग्रेस और एनसीपी के सहयोग से  ही  शिवसेना  सरकार चला रही है। उत्तर प्रदेश  की राजनीति में  इस समय राजनीतिक गतिविधियों में बहुत तेजी आई है। भाजपा की प्रमुख प्रतिद्वन्द्वी के रूप में  समाजवादी पार्टी (सपा ) उभरती दिख रही है। भाजपा के कुछ नेता भी सपा का दामन  थाम रहे हैं तो सपा, बसपा और कांग्रेस  के कितने ही नेता भाजपा  का पटका धारण कर चुके हैं । इसके साथ ही अरविंद  केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप ) ने भी यूपी के चुनाव  में  जोरदार इंट्री मारी है। अभी कुछ दिन पहले ही तीन चार छोटे छोटे दलों ने  विलय करके आप की ताकत बढाई है।

 

 

संजय राउत ने भारतीय किसान यूनियन के  नेता  राकेश  टिकैत के साथ तालमेल की जो बात कही है, उससे भाजपा के विरोध में  खड़े  दलों का किसान पक्ष कमजोर हो सकता है। किसान शिवसेना के साथ जुडेंगे तो  भाजपा  के विरोधी कमजोर होंगे।  हालांकि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  तीनों  कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर किसानों का गुस्सा पहले ही शांत कर दिया है।   हर बार की तरह इस बार भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में शिवसेना दमखम दिखाने को तैयार है। शिवसेना ने ऐलान कर दिया है कि वह किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी, बल्कि अकेले ही यूपी चुनाव लड़ेगी। इसके साथ ही शिवसेना नेता संजय राउत ने सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ की है और कहा है कि वह इतने ताकतवर नेता हैं कि वह कहीं से भी चुनाव लड़ेंगे, जीतेंगे ही। संजय राउत ने कहा कि योगी आदित्यनाथ बड़े नेता हैं और हम उनका आदर करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं पश्चिम यूपी में राकेश टिकैत से मिलूंगा। उनसे जब यह पूछा गया कि क्या सीएम योगी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे, इस सवाल के जवाब में संजय राउत ने कहा कि चुनाव हम भी लड़ेंगे। हम मथुरा से भी लड़ेंगे, हर जगह से लड़ेंगे। किसी के खिलाफ नहीं लड़ेंगे। हम उनके खिलाफ नहीं लड़ेंगे, पर हम चुनाव लड़ेंगे। हम देखना चाहते हैं कि जनता कितना हमारे साथ है और हमें कितना समर्थन है।   

 


उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के अति निकट आते ही मंत्री-विधायकों के इस्तीफे को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी अब फूंक-फूंककर कदम रख रही है। यूपी चुनाव  की कमान अब खुद अमित शाह ने संभाल ली है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कोर कमेटी ने गत 12 जनवरी को नई दिल्ली में एक और मैराथन बैठक की, जिसमें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सहयोगियों के साथ सीटों के बंटवारे पर चर्चा हुई थी। मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बीजेपी मुख्यालय में यह बैठक हुई। यूपी चुनाव को लेकर मंथन का दौर 14 घंटे तक चलता रहा और अगले दिन 1.35 बजे समाप्त हुआ। इससे पहले 11जनवरी को भी कोर कमेटी की पहली बैठक हुई थी, जो 10 घंटे तक चली। बैठक में मौजूद नेताओं ने 172 सीटों के लिए उम्मीदवारों को भी अंतिम रूप दिया, जहां यूपी चुनाव के पहले तीन चरणों में मतदान होगा। इन नामों पर 13 जनवरी को भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की बैठक में चर्चा की जानी थी, उससे  पहले ही भाजपा में भी इस्तीफों का दौरसशुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद सहयोगियों को सीट बंटवारे की भी घोषणा की जाएगी। इस मामले से अवगत पार्टी पदाधिकारियों ने कहा था कि 12 जनवरी की बैठक में जिन निर्वाचन क्षेत्रों पर चर्चा की गई, उनमें अयोध्या है, जहां से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम प्रस्तावित किया गया है। इससे पहले योगी  को मथुरा से चुनाव  लडवाने की चर्चा थी।

 


    फिलहाल इतना तो निश्चित है कि इस बार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। एक ओर इसके कई नेता इस्तीफा दे चुके हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे लोगों को टिकट देने का भी दवाब है, जिनके परिवार से पहले ही कोई सांसद है या मंत्री है। स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चैहान के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी अब फूंक-फूंककर कदम रख रही है। उदाहरण के लिए भाजपा सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने अपने बेटे के लिए टिकट की मांग रखकर बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है। रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि मेरा बेटा लखनऊ कैंट विधानसभा सीट में 2009 से लगातार काम कर रहा है। वह टिकट की दावेदारी कर रहा है और पार्टी को तय करना है कि उसे टिकट देना है या नहीं। बता दें कि 2017 में भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी ने परचम लहराया था। हालांकि, रीता बहुगुणा जोशी के सांसद बनने पर रिक्त हुई सीट पर 2019 में उपचुनाव हुआ। इसमें भी भाजपा ने जीत दर्ज की और सुरेश चंद्र तिवारी चैथी बार विधायक बने।अपने परिवार के सदस्य के लिए टिकट मांगने वालों की फेहरिस्त में कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह भी हैं। सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह ने अपनी पत्नी के लिए बीजेपी से टिकट की मांग की है। राजवीर सिंह खुद भाजपा से लोकसभा सांसद हैं और उनके बेटे विधायक हैं और योगी सरकार में राज्यमंत्री भी हैं।  ऐसे में भाजपा के सामने चुनौती है कि वह इन दो बड़े नेताओं की मांग से कैसे निपटती है।ध्यान देने वाली बात होगी कि स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के पीछे भी टिकट का ही मसला बताया गया था। सूत्रों की मानें तो स्वामी प्रसाद मौर्य अपने बेटे के लिए भी टिकट चाहते थे। स्वामी भाजपा के टिकट पर बेटे को ऊंचाहार सीट से लड़वा चुके हैं, मगर उसमें उनके बेटे को हार मिली थी. स्वामी फिर से इसी सीट से बेटे के लिए टिकट की मांग कर रहे थे, मगर भाजपा टिकट देने के मूड में नहीं थी।
  उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए सात चरणों में मतदान 10 फरवरी से शुरू होगा। उत्तर प्रदेश में अन्य चरणों में मतदान 14, 20, 23, 27 फरवरी, 3 और 7 मार्च को होगा. वहीं यूपी चुनाव के नतीजे 10 मार्च को आएंगे। 

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