डोनाल्ड ट्रंप इमरान खान कौन है तीसरे विश्वयुद्ध की राह का रोड़ा

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आज की चर्चा दुनिया के रहस्य की कितनी गिरहें खुल गई और कितनी बाकी है ? 

 

आज हम चारों तरफ अफरातफरी का आलम देख रहे हैं दुनिया के कई देश युद्ध के मुहाने पर हैं तो कई देश युद्ध में उतर चुके हैं। जो चल रहा है वह तो सभी जानते हैं पड़ताल जो  पशे पर्दा से सरे पर्दा हो रहा है चर्चा उसकी करते हैं। 
अब सवाल यह उठता है कि क्या यह सब अचानक शुरू हो गया है या इस हालात के इंतजाम दशकों पहले शुरू कर दिए गए थे और अब इस महाविनाश के प्लान में जो रुकावट पैदा करने की संभावना रखते हैं उनको कैसे ठिकाने लगाया जा रहा है और वह कौन है। 

इससे पहले के इस षड्यंत्र के रास्ते के पत्थरों पर चर्चा करें हम यह समझने की कोशिश करते हैं इसके पीछे है कौन? यानी को कौनसी ताकतें हैं और उनके कारोबार क्या है आखिर वह क्यों दुनिया में विनाश देखना चाहते हैं। 
मैंने अपने एक प्रोग्राम में बहुत समय पहले एक परिवार की चर्चा की थी आज उस परिवार का नाम खोले बगैर इशारे में कहता हूं कि उस परिवार को कहीं बेटियां कई राजघरानों की महारानी बनी दुनिया के ज्यादातर लोग उन्हें ईसाई धर्म के फलोंवर समझती रही मगर सच तो यह है कि मैं एक ऐसे यहूदी परिवार से थी जिनका फोरफादर एक बार फिर तमाम यहूदियों को यरुशलम में वापस लाना चाहता था क्योंकि उनकी किताब में यह  लिखा था कि जब तक सभी लोग एक बार फिर यरुशलम नहीं पहुंचेंगे तब तक दुनिया पर उनका राज नहीं होगा। 
और वो अपनी एक लंबी सोची समझी रणनीति के तहत यरुशलम को आबाद करने में कामयाब हुए और फिर इसी खानदान की एक बेटी का राज पूरी दुनिया में कायम हो गया। 

और फिर फर्स्ट वर्ल्ड वॉर हुआ सेकंड वर्ल्ड वार हुआ बात यहीं खत्म नहीं हुई मेरी पड़ताल में पहले और दूसरे विश्व युद्ध में इसी खानदान के लोग यश खानदान के रिश्तेदार लोग अमेरिका में भी अपनी गहरी जड़े जमाने में कामयाब रहे कुल मिलाकर आज 20 परिवार ऐसे हैं जिनका पूर्ण कंट्रोल तेल जगत हथियार जगत मेडिसन जगत और बैंकिंग व्यवस्था गोल्ड और डायमंड और सौंदर्य जगत पर मजबूत है। 

यानी युद्ध के साजो सामान के अलावा इंसान की रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर आखरी कदम तक यह 20 परिवार पूरे मानव जगत की दुनिया को अपने बाजार के रूप में देखते हैं जब दुनिया में अर्थव्यवस्था बढ़ती है तो भी इनका फायदा होता है और जब दुनिया में लाशें बिछा ए जाती हैं तो इनका और बड़ा फायदा होता है। क्योंकि भारी कीमत में हथियार बेचे जाते हैं जिसका मुनाफा इन परिवारों में बट जाता है क्योंकि इन्हीं की प्राइवेट कंपनियां दुनिया भर में हथियार सप्लाई करती है, यानी युद्ध होते हैं तो तेल सोना हथियार दवाई सब की मांग बढ़ जाती है। 

यानी इनकी कंपनियों की आमदनी बढ़ाने के लिए जरूरी है कि मांग बड़े और इन साजो सामान की मांग बढ़ाने के लिए जरूरी हैं की युद्ध हो और युद्ध करवाने के लिए जरूरी है के दो देश आपस में दुश्मन हो या तो धर्म आपस में दुश्मन हो या दो महाद्वीप आपस में दुश्मन हो। और फिर इसी को ध्यान में रखकर दुनिया में एक देश को दूसरे देश से लड़ाने के षड्यंत्र किए जाते हैं इन सभी यंत्रों को कामयाब करने के लिए अपनी लॉबी के प्राइम मिनिस्टर प्रधानमंत्री बिटाए जाते हैं और आम जनता कभी नहीं समझ पाती कि इनके देशों में जो चल रहा है वहीं की खुद की देन है या इसके लिए कोई लंबा षड्यंत्र किया गया है। 

और यह काम सिर्फ राजनीतिक नेतृत्व बदलने से नहीं होता बल्कि यह लोग दुनिया भर की फौज के अंदर अपनी लॉगिन करते हैं और अपने लोगों को सेट करने की कोशिश करते हैं क्योंकि हथियारों की मांग या बोली इन्हीं के जरिए लगवाई जाती है इस काम में क्योंकि कई देशों में फौजी अफसरों को भी तभी अहमियत और लाभ मिल सकता है जब किसी देश को दूसरे देश से खतरा हो युद्ध की संभावना हो, फौजी अफसरों को उनकी मांग धन और सम्मान का फायदा हो सकता है। जिस प्राकृतिक प्रवृत्ति का फायदा यह लोग उठाते हैं। 

इन्हीं परिवारों का खेल था कि पहले और दूसरे विश्व युद्ध के बाद दुनिया को कुछ इस तरह से टुकड़ों में बांटा कि हर एक पड़ोसी अपने दूसरे पड़ोसी का दुश्मन हो गया और इनका कारोबार चल निकला और इनकार नियंत्रण मजबूत हो गया इस खेल का पहला हिस्सा में अपने लेख याल्टा अधिवेशन की हकीकत में लिख चुका हूं। अब हम आते हैं उस मुद्दे पर जिसे यह समझना जरूरी है यह कौन लोग अभिन्न की राह का रोड़ा हैं और यह उनका क्या करेंगे। 

डोनाल्ड ट्रंप के दौर में मैंने ट्रंप के बारे में कहीं मजाहिया जुमले कहे थे जो असल में सच है डोनाल्ड ट्रंप की नीति थी कि वह अमेरिका में अमेरिकन आम जनता के लिए काम करें और दुनिया में युद्ध की स्थिति में अपना रोल कम करें क्योंकि यायुद्ध के कारण आम अमेरिकी जनता का भारी नुकसान होता है और उन परिवारों को भारी फायदा।

 


इस वक्त अमेरिकी सत्ता पूरे यूरेशिया और युद्ध का शिकार बनाने की भरपूर कोशिश कर रही है और आम जनता में बेरोजगारी और रोष बढ़ रहा है महंगाई चरम पर पहुंच चुकी है जिस चलते डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता 70% अमेरिका में हो गई है और वह खास परिवार भयभीत है कि यह सत्ता में आया तो इनके कारोबार बंद करवा देगा दुनिया पर से इनका अदृश्य राज जाता रहेगा क्योंकि अमेरिका का कोई भी राष्ट्रपति ट्रंप से पहले इन्हीं परिवारों की कंपनी के सीईओ की तरह काम करता रहा है यानी चाहा युद्ध की जरूरत पड़ी युद्ध करवाएं जहां दोस्ती की जरूरत पड़ी दोस्ती हुई दुश्मनी की जरूरत पड़ी तो दुश्मनी और यह कंपनियां दुनिया से माल लपेटते रही। 

इस बात को ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब युद्ध होते हैं तो अमेरिकी सरकार इन प्राइवेट कंपनियों से हथियार खरीदती है उनका इस्तेमाल युद्ध में करती है और दूसरे देशों को लड़ा कर उन्हें अपने हथियार देकर इन कंपनियों का फायदा करवाया जाता है यानी अमेरिका की आम जनता पर टैक्स लगाकर जो पैसा वसूल किया जाता है उस पैसे से अमरीका खुद अपने लिए अपनी फौज के लिए हथियार खरीदता है और इन कंपनियों का मुनाफा बढ़ाने के लिए उन हथियारों का कहीं ना कहीं युद्ध करके उसका इस्तेमाल करता है। 

और दुनिया के बाकी जिन देशो कोई हथियार बेचते हैं वह देश अपनी जनता से टैक्स का पैसा वसूल करते हैं और महंगी हथियार खरीद कर अपने पड़ोसियों के साथ युद्ध करते हैं उषा तिहार को इस्तेमाल करके खर्च करते हैं और फिर नए हथियार खरीदने के लिए इन कंपनियों को ऑर्डर दे देते हैं और आम जनता यह कभी नहीं समझ पाती असल में वह लड़ नहीं रहे हैं उन्हें लड़ाया जा रहा है उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई का धन उनसे लूटा जा रहा है और इस लड़ाई में अधिकतर धार्मिक जाती है और शाखा आधारित युद्ध के कारण बनाए जाते हैं इन्हें आम जनता अपने धार्मिक रहनुमाओं से पैदाइशी खूंटी के साथ पीते हैं और यह आकलन करने से चूक जाते हैं कि कहीं उनका इस्तेमाल करने के लिए तो उन्हें तैयार नहीं किया जा रहा है। 

स्पष्ट है कि कोई भी धर्म हो वह आपको कत्लेआम की इजाजत नहीं देता लड़ाई दंगा के अलावा वह आपको प्यार मोहब्बत बांटने की शिक्षा देता है मगर होता इसके विपरीत है सभी धर्मों में शांति की बात होने के बावजूद सभी धर्म एक दूसरे के प्रति नफरत करते हैं और एक दूसरे को पृथ्वी से मिटा देना चाहते हैं यह विचार आम जनता तक पहुंचाने वाले महान कहलाते हैं जब के युद्ध और मिटाने की चाहत के पीछे एक षड्यंत्र मात्र होता है जिसका ईश्वरीय विचार से कोई लेना देना नहीं होता। 

डोनाल्ड ट्रंप को रास्ते से हटाने के लिए उसके घर से एक परमाणु फाइल बरामद की गई है जिसके जरिए अब डोनाल्ड ट्रंप को 70% लोकप्रियता होने के बावजूद राष्ट्रपति पद से दूर कर दिया जाएगा जबकि मेरा मानना है बाकी सामान के साथ यह फाइल जानबूझकर ट्रंप के पास छोड़ी गई होगी। क्योंकि हकीकत यह है कि रूस चीन और अमेरिका जैसे देशों को एक दूसरे के सभी हथियारों और सभी ठिकानों के बारे में पूर्ण जानकारी है इस फाइल की कोई अहमियत नहीं मगर जनता में अपने षड्यंत्र को कामयाब साबित करने के लिए यह खेल खेल दिया जाएगा। 

जोत्रम के साथ अमेरिका में हो रहा है वही खेल इमरान खान के साथ पाकिस्तान में हो रहा है क्योंकि इस दुनिया में फसाद फैलाने वाली चढ़े यह बात समझ चुकी थी इमरान खान रूस की तरफ मुड़ चुका है और भारत पहले से रोज के घनिष्ठ मित्रों में से है चीन भी रूस का मित्र है और अगर कहीं रूस ने पाकिस्तान को और भारत को समझा कर शांति करवा दी तो फिर एशिया में जिस तबाही का प्लान बनाया गया है वह नहीं हो पाएगी चुके भारत और चीन दोनों ही अपनी अर्थव्यवस्था को विश्वव्यापी बनाने पर ध्यान दे रहे हैं ऐसे में एकमात्र पश्चिमी टोल पाकिस्तान भी इनके साथ मिल गया तो फिर पश्चिमी जगत का आसरा ही 3 द्वीपों से उठ जाएगा एशिया आधा यूरोप और अफ्रीका। 

इसीलिए जितना जरूरी डोनाल्ड ट्रंप को किनारे लगाना है उतना ही जरूरी इमरान खान को किनारे लगाना है मगर इसमें एक थोड़ा सा मिस फायर हुआ है इन्हीं षड्यंत्र कारी संगठनों ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल दुनिया में दंगा फसाद युद्ध के लिए किया है मगर इसमें कुछ ऐसे राइटर लेखक जिन्हें हजारों साल से कोई प्लेटफार्म उपलब्ध नहीं था इमरान खान डोनाल्ड ट्रंप की तरह जिन्हें आसानी से किनारे कर दिया जाता था। और मैनस्ट्रीम मीडिया के राज कवि,भांड, चारण,अखबार आज tv चैनल को कंट्रोल कर के धोका दिया जाता था। 

आज वह सोशल मीडिया का उपयोग करके वह  एहले नजर, दानिश्वर दार्शनिक और वक्त के पहरेदार अपनी बातों को थोड़ा बहुत ही सही आम जनता तक पहुंचा पा रहे हैं जिसके कारण एक बहुत बड़ा वर्ग दुनिया के दुश्मनों के षड्यंत्र समझने लगा है।

यानी सोशल मीडिया ने बेक फायर किया है और इसके परिणाम स्वरूप यह सभी षड्यंत्र उल्टे उन्हीं को निगल ने वाले हैं और तीसरे विश्वयुद्ध में यह षड्यंत्रकारी बुरी तरह परास्त होने जा रहे हैं इस पर अगला डिटेल आर्टिकल लिखूंगा राज़ अभी बहुत बाकी है।

~वाहिद नसीम
लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं विदेश मामलों के विशेष जानकार हैं और अपनी विश्वसनीयता के लिए जाने जाते हैं

I think all aspiring and professional writers out there will agree when I say that ‘We are never fully satisfied with our work. We always feel that we can do better and that our best piece is yet to be written’.
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