क्या अटल-राजनाथ भी मौलाना हो गयेः हरीश

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  • क्या अटल-राजनाथ भी मौलाना हो गयेः हरीश
  • हरदा ने अटल, राजनाथ आदि की टोपी लगी फोटो की जारी
  • जुमे की नमाज की छुट्टी को बताया भाजपा का सफेद झूट


शाह टाइम्स संवाददाता
देहरादून।
उत्तराखंड में चुनावी साल के आगाज के साथ ही राजनैतिक दलों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रतिआरोप लगाने का सिलसिला शुरू कर दिया है। उत्तराखण्ड में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य के स्थान पर धर्म की सियासत परवान चढ़ने लगी है। जनता महंगाई, बेरोजगारी से त्रस्त है, और प्रदेश की राजनीति के खेवनहार धर्म के नाम पर तलवारे म्यान से बाहर निकाल कर मैदान-ए-जंग में उतर चुके है। 

उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव 2022 में अभी 6 माह से भी ज्यादा का वक्त है, लेकिन राजनीतिक पार्टियों ने अभी से गड़े मुर्दे उखाड़ने शुरू कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर उत्तराखंड के पूर्व सीएम व कांग्रेस चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष हरीश रावत की एक फोटो पोस्ट वायरल हो रही है। इस फोटो में हरीश रावत धर्म विशेष की टोपी लगाए हुए हैं, हरीश रावत ने अपने अंदाज में पूर्व पीएम दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पीएम नरेंद्र मोदी की कुछ फोटो शेयर कर भाजपा को अपने ही अंदाज में जवाब दिया और कहा कि जो भाजपा ने मेरे लिये कहा, क्या वे अपने नेताओं के लिए कह पाएंगे।

हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि ‘ भाजपाई दोस्त उनके कुछ फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं, दरगाह में गोल टोपी पहनने से हरीश रावत तो मौलाना हरीश रावत हो गए और घर-घर में आपने वो टोपी वाली मेरी तस्वीर पहुंचा दी दी, अब जरा मुझे बताइए कि क्या राजनाथ सिंह जी भी मौलाना राजनाथ सिंह हो गए हैं, इसके साथ ही हरीश रावत ने पूर्व पीएम दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी और पीएम मोदी की भी एक फोटो ट्विटर पर पोस्ट की’ हरीश रावत ने ये दोनों फोटो शेयर करते हुए लिखा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी की एक पुरानी फोटो है, क्या इनको भी आप मौलाना अटल बिहारी वाजपेयी कहना पसंद करेंगे? मोदी जी की भी एक फोटो है, आपके हिंदुत्व के आइकॉन की। क्या इनको भी आप उसी संबोधन से नवाजेंगे जो संबोधन आपने केवल-केवल मेरे लिए रिजर्व करके रखा है। हिम्मत है तो मेरे साथ इनको भी उसी नाम से पुकारिये’।

इसके बाद हरीश रावत ने एक दूसरा ट्वीट किया।इसमें हरीश रावत ने लिखा कि सोशल मीडिया पर उनके बारे में लिखा जा रहा है कि हरीश रावत ने अपने कार्यकाल में जुमे की नमाज की छुट्टी का ऐलान किया था, हरीश रावत ने लिखा कि ‘भाजपा का सफेद झूठ, मैंने कभी भी जुमे की नमाज के लिए छुट्टी का ऐलान नहीं किया और न किसी ने मुझसे जुमे की नमाज के लिए छुट्टी मांगी, हां हरीश रावत ने सूर्य देव के आराधना के पर्व छठ पर छुट्टी दी, हमारी बहनें करवा चौथ का व्रत रखती हैं, मैंने उस पर छुट्टी दी, हरीश रावत ने कहा कि मैंने दो महापुरुषों की जयंती पर छुट्टी दी, यहां तक कि यदि भाजपाई झूठ न चल पड़ा होता है तो परशुराम जयंती पर भी मैं छुट्टी करने के विषय में अपने सहयोगियों से विमर्श कर रहा था, भाजपा के लोगों काठ की हांडी एक ही बार चढ़ती है, 2017 में तुम्हारा यह झूठ चल गया, मगर अब के तुम समय पर सामने आ गये हो तो मेरे झूठ का प्रतिवाद भी लोगों तक पहुंचेगा और लोग पढ़े-लिखे हैं, खुद रिकॉर्ड तलाश कर लेंगे, क्या मेरी सरकार ने जुमे की नमाज का जुमा मतलब शुक्रवार की नमाज के लिए छुट्टी का ऐलान किया है? हरीश रावत की इस पोस्ट पर जमकर लोगों की प्रतिक्रिया सामने आ रहीं हैं। इस बार भी विस चुनाव पर धार्मिक रंग भारी पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है, जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिये हानिकारक सिद्ध हो सकता है। 

I think all aspiring and professional writers out there will agree when I say that ‘We are never fully satisfied with our work. We always feel that we can do better and that our best piece is yet to be written’.
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