श्रीदेव सुमन विवि का ये कैसा कारनामा!  तय सीट से 700 ज्यादा इम्तिहान में बैठ गए

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श्रीदेव सुमन विवि का ये कैसा कारनामा! 
तय सीट से 700 ज्यादा इम्तिहान में बैठ गए
14 कॉलेजों के प्रबंधन के साथ ही कुलपति भी शक के दायरे में
राजभवन को भनक तक नहीं! 
दोषी जिस स्तर का भी होगा, कठोर कार्रवाई होगीरूउच्च शिक्षा मंत्री 


चेतन गुरुंग 
देहरादून।
श्रीदेव सुमन विवि की मिलीभगत या फिर घनघोर लापरवाही का नतीजा है कि उससे सम्बद्ध 14 प्राइवेट कॉलेजों के 700 छात्र-छात्राओं ने अवैध या फिर फर्जी ढंग से सालाना परीक्षा दे डाली। इस मामले का खुलासा होने से जबर्दस्त हड़कंप और खलबली मची है। कॉलेजों में तय संख्या से अधिक प्रवेश पाए छात्र-छात्राओं के रिजल्ट विवि ने रोक दिए हैं। विवि के कुलपति पीताम्बर दत्त ध्यानी पर भी आंच आ रही कि खुद उड़न दस्तों में जाने के बावजूद इतने गंभीर और बड़े गड़बड़झाले की अनदेखी वह कैसे कर गए। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने ‘शाह टाइम्स’ से कहा,‘इस धांधली में जो भी शामिल हैं, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। चाहे वह किसी भी स्तर का हो’। 


जिन कॉलेजों के नाम इस कांड में सुर्खियों में आए, उनमें चमनलाल (मंगलोर रोड, हरिद्वार), हरीओम सरस्वती (धनौरी, हरिद्वार), विद्या विकासनी (नारसन,रूड़की),आशादेवी (भोगपुर, हरिद्वार),राघोमल ओमप्रकाश गोयल (रूड़की),स्वामी विवेकानंद (रूड़की),डीडी कॉलेज (निम्बुवाला गढ़ी कैंट, देहरादून),एपेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और टेक्नॉलॉजी, रूबराज इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज़,फोनिक्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट (रूड़की),भारतीय महाविद्यालय (रूड़की),सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एवं टेक्नॉलॉजी (रूड़की),हरीश चन्द्र रामकली (लक्सर, हरिद्वार) और एचईसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स (जगजीतपुर,हरिद्वार) शामिल हैं। 


पिछले साल 18 अगस्त से ले के सितंबर तक चली परीक्षाओं में बैठे 14 प्राइवेट कॉलेजों के फर्जी ढंग से कराए गए प्रवेश से जुड़े छात्र-छात्राओं के नतीजे विवि प्रशासन ने तब रोक दिए, जब रिजल्ट तैयार करने के दौरान शक हुआ कि जितनी सीटें कॉलेजों को दी गई हैं, उस्से अधिक परीक्षा में बैठ गए हैं। ये इसलिए भी बहुत गंभीर और आपराधिक किस्म का मामला है कि इसी तरह के मिलते-जुलते मामलों में केन्द्रीय विवि (एचएनबी गढ़वाल) के कुलपति सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं और बुरी तरह फंसे हुए हैं। 


सूत्रों के मुताबिक विवि प्रशासन की पूरी मिलीभगत के बिना इतना बड़ा और गंभीर खेल मुमकिन ही नहीं है। हैरत है कि राजभवन को भी इस मामले में कोई इत्तिला पहले नहीं मिली। न ही कोई भनक उसको लगी। फर्जी प्रवेश वालों की परीक्षा हो जाने और इस मामले को जिस तरह दबाए जाने की कोशिश हो रही उससे कुलपति की भूमिका भी शक के दायरे से बाहर नहीं है। उन्होंने अभी तक कोई जांच खुद के स्तर पर नहीं बिठाई है। सूत्रों के मुताबिक खुद कुलपति और उनके हाथों गठित उड़न दस्ते ने ही उन कॉलेजों की उड़ान भरी थी, जिनके यहाँ तय संख्या से अधिक प्रवेश हो गए थे। कुलपति खुद क्यों उड़न दस्ते में गए, इस पर भी सवाल उठाए जा सकते हैं। 


इस मामले में पुष्कर सरकार एसआईटी जांच बिठा दे तो ताज्जुब नहीं होगा। विधानसभा चुनाव में जाने से पहले सीएम पुष्कर सिंह धामी इस किस्म के धांधलीबाजों और अहम कुर्सियों पर बैठे लोगों को नाप के ही अधिक दमदार और सकारात्मक संदेश देना पसंद करेंगे। वह जानते हैं कि सरकार इस मामले में कुछ नहीं करेगी तो विपक्षी दल इस मुद्दे को हाथों-हाथ उठा के घेरा बंदी कर सकते हैं। सीएम ऐसा कभी नहीं चाहेंगे। इस मामले में उच्च शिक्षा मंत्री ने साफ कहा, ‘बच्चों की इस मामले में कोई गलती नहीं दिखाई देती है। उनके रिजल्ट घोषित किए जाएंगे लेकिन जो लोग भी इस करतूत में शरीक हैं, चाहे किसी भी स्तर के हों, को बख्शा नहीं जाएगा’। 

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