वरुण-मेनका को किस बात की सजा

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गत 7 अक्टूबर को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की। इस राष्ट्रीय कार्यकारिणी से सांसद वरुण गांधी और उनकी माता मेनका गांधी को निकाल बाहर किया गया। पार्टी के नेता इस बदलाव को नियमित प्रक्रिया के तौर पर बता रहे हैं लेकिन दो दिन पहले ही सांसद वरुण गांधी ने लखीमपुर में किसानों के विरोध प्रदर्शन में  हिंसा को लेकर जिस तरह का बयान दिया था, उसके बाद ही यह चर्चा होने लगी थी कि वरुण गांधी को इसकी सजा मिलेगी। वरुण गांधी भी संभवतः यह समझ रहे होंगे, इसीलिए उन्हाेंने अपने फेसबुक से भाजपा शब्द हटा दिया था। लखीमपुर घटना को लेकर भी वरुण ने दूसरे दिन वहां का जो वीडियो जारी किया, उसमें साफ पता चलता है कि एक गाड़ी किसानों को कुचल रही है। बहरहाल, वरुण गांधी और मेनका भविष्य में क्या कदम उठाते हैं, इसकी प्रतीक्षा की जा रही है।

 

वरुण गांधी और उनकी मां मेनका गांधी को  भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया गया है। यूपी के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में वरुण गांधी  के लगातार ट्वीट के बाद संभवतः यह कदम उठाया गया है। गौरतलब है कि बीजेपी सांसद ने लखीमपुर घटना को लेकर लगातार ट्वीट किए थे और किसानों को निशाना बनाए जाने को लेकर नाराजगी जताई थी। हालांकि पार्टी सूत्रों की ओर से कहा गया है कि इस तरह के बदलाव रूटीन प्रक्रिया है। 

 

अब, भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यसमिति के लिए 80 सदस्यों के नाम की घोषणा कर दी है। बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यसमिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी और राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल सहित 80 सदस्यों को शामिल किया गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने लिस्ट जारी कर दी है जिसमें सभी सदस्यों के नाम हैं।

 

बीजेपी ने राष्ट्रीय कार्यसमिति में जिन 80 सदस्यों को शामिल किया है, उनमें रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, डॉ. हर्षवर्धन, एस जयशंकर, गिरीराज सिंह, रमेश बिधूड़ी, मनोज तिवारी, श्रीपद नायक, मीनाक्षी लेखी, अनुराग ठाकुर, डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रह्लाद जोशी, निर्मला सीतारमण, मुरलीधरन, नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरोत्तम मिश्रा, धर्मेंद्र प्रधान, हरदीप सिंह पुरी, सोम प्रकाश, ओम प्रकाश माथुर, गजेंद्र सिंह शेखावत, जसकौर मीणा, जी किशन रेड्डी, स्मृति ईरानी, मुख्तार अब्बास नकवी, संतोष गंगवार, साध्वी निरंजन ज्योति, मिथुन चक्रवर्ती, अनिल जैन, संजीव बाल्यान, दिनेश त्रिवेदी, अनिर्बान गांगुली आदि शामिल हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के लिए 13 सदस्यों का चुनाव किया गया है। इसमें छत्तीसगढ़ से डॉ. रमन सिंह, राजस्थान से वसुंधरा राजे सिंधिया, बिहार से राधा मोहन सिंह, चंडीगढ़ से सौदान सिंह, ओडिशा से बैजयंत जय पांडा, झारखंड से रघुवर दास, पश्चिम बंगाल से दिलीप घोष, उत्तर प्रदेश से बेबी रानी मौर्या और रेखा वर्मा, गुजरात से डॉ. भारती बेन शियाल, तेलंगाना से डीके अरुणा, नागालैंड से एम चुबा आओ और केरल से अब्दुल्ला कुट्टी को शामिल किया गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय कार्यसमिति में 50 विशेष आमंत्रित और 179 स्थायी आमंत्रित सदस्य होंगे, जिसमें मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, विभिन्न विधानसभा एवं विधान परिषद में विधायक दल के नेता, पूर्व उप मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय प्रवक्ता, राष्ट्रीय मोर्चा अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी, सह प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री शामिल हैं।  मेनका व वरुण गांधी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह न मिलने पर कानाफूसी होना स्वाभाविक है।

 

ध्यान देने की बात है कि लखीमपुर खीरी में किसानों पर गाड़ी चढ़ाने की घटना को लेकर बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने एक वीडियो शेयर किया था। अगले दिन उन्होंने इस घटना का एक दूसरा वीडियो शेयर किया था। यह वीडियो, पहले वाले वीडियो से बेहतर क्वालिटी का है। इसमें घटनाक्रम ज्यादा साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि, अभी तक इस वीडियो की पुष्टि नहीं हुई है। लखीमपुर खीरी की हिंसा की घटना में आठ लोगों की मौत हुई थी, जिसमें चार किसान थे। हिंसा तब हुई थी, जब एक कार प्रदर्शन कर रहे कुछ किसानों को रौंदते हुए निकल गई थी। वरुण गांधी ने वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा था कि निर्दोष किसानों का खून बहाने वालों का न्याय करना होगा। उन्होंने ट्वीट में लिखा था, यह वीडियो बिल्कुल शीशे की तरह साफ है। प्रदर्शनकारियों का मर्डर करके उनको चुप नहीं करा सकते हैं। निर्दोष किसानों का खून बहाने की घटना के लिए जवाबदेही तय करनी होगी। हर किसान के दिमाग में उग्रता और निर्दयता की भावना घर करे इसके पहले उन्हें न्याय दिलाना होगा। पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी ने इससे पूर्व भी घटना का एक वीडियो ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा था कि लखीमपुर खीरी में किसानों को गाड़ियों से जानबूझकर कुचलने का यह वीडियो किसी की भी आत्मा को झकझोर देगा। पुलिस इस वीडियो का संज्ञान लेकर इन गाड़ियों के मालिकों, इनमें बैठे लोगों, और इस प्रकरण में संलिप्त अन्य व्यक्तियों को चिन्हित कर तत्काल गिरफ्तार करे।

उधर, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की घटना पर सुप्रीम कोर्ट में 7 अक्टूबर को सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस मामले में यूपी सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने सरकार से अगले दिन तक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा कि उसने मामले में अभी तक कितनी गिरफ्तारियां की हैं, कितने आरोपी हैं, इन सब जानकारियों के साथ वो कल रिपोर्ट दाखिल करे। सुनवाई शुरू होने पर मामले में चिट्ठी डालने वाले वकील शिवकुमार त्रिपाठी ने कोर्ट में कहा कि लखीमपुर खीरी घटना में कई किसान मारे गए हैं। ये प्रशासन की लापरवाही से हुआ है। अदालत इस मामले में उचित कार्यवाही करे। मैं उम्मीद करता हूं कि कोर्ट हमारे लेटर को गंभीरता से लेगी और दोषियों के खिलाफ एक्शन लेगी। ये मानवाधिकार उल्लंघन का मामला है। इस पर सीजेआई ने यूपी सरकार के जवाब मांगा। यूपी सरकार ने कोर्ट से कहा कि ये घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। एसआईटी का गठन किया गया है। एफआईआर दर्ज की गई है। इसके बाद कोर्ट ने उसे अगले दिन तक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। यूपी सरकार के बयानों पर सीजेआई ने कहा कि लेकिन आरोप ये हैं कि आप जांच सही से नहीं कर रहे। यूपी सरकार ने इस पर कहा कि हमने इस मामले में न्यायिक आयोग का गठन भी किया है। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज प्रदीप श्रीवास्तव की अगुआई में जांच टीम बना दी है। 

~अशोक त्रिपाठी

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