उत्तराखण्ड कांग्रेसः ...और गेहरायगी गुटबाजी-बनेगे नये धड़े

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उत्तराखण्ड कांग्रेसः ...और गेहरायगी गुटबाजी-बनेगे नये धड़े
गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनवाने में सफल हुए हरदा
रणजीत-आर्येंद्र को एडजेस्ट करा प्रीतम ने भी दिखाई अपनी ताकत


मौहम्मद शाहनजर
देहरादून।
उत्तराखण्ड में मिशन 2022 को फतह करने के लिये कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब का जो फार्मूला पर्वतीय राज्य में अपनाया है, उससे गुटबाजी और अधिक गेहराने-नये धड़ों के वजूद में आने का खतरा भी कांग्रेस के सामना खड़ा हो गया है। करीब दो माह तक मंथन करने के बाद कांग्रेस में बड़ा चुनावी फेरबदल कर सबको खुश करने की कवायद की गई है, मगर कुछ फैसलों को लेकर विरोध के सुर उठ रहे हैं। चार कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाने से शक्ति केंद्रो की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जाने लगी है। कांग्रेस ने नई टीम में खेमे-जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने के भरपूर प्रयास किये, मगर फिर भी बगावत की चिंगारी शांत नही हो सकी है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, नवप्रभात, हरीश धामी व अल्पसंख्यक समाज नई कमेटियों में उचित स्थान न मिल पाने से नाराज है। उत्तरखंड कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाज़ी थमने के बजाय और बढ़ती ही जा रही है। अभी तके कांग्रेस में हरदा, प्रीतम व किशोर गुट थे, जो एक दूसरे की आंखों में चुभते रहे और कई बार एक-दूसरे पर सीधा हमला करने से भी नही चुके। इन गुटों के चलते ही कांग्रेस आलाकमान नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं कर पा रहा था।

नये फार्मूले के ऐजाद होने से कई और गुट बनते हुए दिखाई दे रहें है। कांग्रेस आलाकमान ने सभी गुटों को मान्यता दी। फिर भी पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी नाराज बताए जा रहे हैं, काफी लंबे समय से हरदा ये ही पद चाहते थे और अब मिलने के बाद उनकी नाराजगी की खबरे आना कांग्रेस में अंदरूनी कलह को दर्शाती हैं। हरदा जहां गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनवाने और अपनी टीम के सिपाहसालारों को फौज में शामिल कराने में कामयाब हुए है वही प्रीतम सिंह ने भी भुवन कापडी, रणजीत सिंह रावत और आर्येंद्र शर्मा को भारी भरकम पद दिला कर अपनी ताकत का एहसास हरीश रावत को करा दिया है। रणजीत कभी हरीश का साया हुआ करते थे, मगर 2017 के चुनाव के बाद रणजीत ने पाला बदल लिया था, वहीं, आर्येंद्र शर्मा ने 2017 में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के खिलाफ बागी होकर विधानसभा का चुनाव लडा, जो किशोर की हार का कारण बना, अब इन दोनों नेताओं को हरीश रावत के लिये पचाना आसान नही होगा। इन हालातों में कांग्रेस के अंदर खेमेबाजी का और अधिक उभार होने की आशंका से इंकार नही किया जा सकता।


जिसके चेहरे पर चुनाव लड़ा जाना है वही बनाए मेनिफेस्टोः नवप्रभात  
देहरादून।
विकासनगर के पूर्व विधायक नवप्रभात ने प्रदेश कांग्रेस मेनिफेस्टो कमेटी का अध्यक्ष पद लेने से इंकार कर दिया है। नवप्रभात का कहना है कि जब चुनाव किसी चेहरे को सामने रखकर लड़ा जाना है तो मेनिफेस्टो बनाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर होनी चाहिए। उन्होंने मेनिफेस्टो कमेटी का अध्यक्ष पद अस्वीकार किए जाने के संबंध में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अवगत करा दिया है। पूर्व मंत्री नवप्रभात को चुनाव घोषणापत्र समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। वे ब्राह्मण नेता के तौर पर अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार थे। जिसको लेकर वो खासे नाराज हैं। नवप्रभात ने इस जिम्मेदारी को लेने से इंकार कर दिया उन्होंने बोला कि, वो दो बार इस पद पर रह चुके हैं। वहीं, पूर्व मंत्री किशोर उपाध्याय भी अध्यक्ष पद के दावेदार थे, लेकिन उन्हें ज्यादा तरजीह नहीं मिली है। रणजीत की ताजपोशी से विधायक हरीश धामी भी नाराज बताए जा रहे हैं। अब सवाल यह हैं कि, कांग्रेस में इतनी गुटबाज़ी और पार्टी में बढ़ती अंदरूनी कलह के बाद कैसे उत्तराखंड में कांग्रेस मिशन 2022 को फतह कर पाएगी।


पार्टी छोड़ने का कोई बयान नही दियाः धामी
देहरादून।
धारचूला विधायक हरीश धामी का कहना है कि मेरी किसी से कोई नाराजगी नहीं है और न ही मैंने पार्टी छोड़ने का कोई बयान दिया है। हम ने जो मांगा था वह हमें मिल गया है।
हम 2022 मैं हरीश रावत के चेहरे के साथ चुनाव मैदान में उतरना चाहते थे। अध्यक्ष पद पर किसी ब्राह्मण नेता की नियुक्ति के साथ नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह को बनाए जाने की मांग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ पदों पर जरूर ऐसे लोगों की नियुक्ति कर दी गई है जो नहीं की जानी चाहिए थी। इसको लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच जरूर नाराजगी है।

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