चाचा शिवपाल यादव नरम,भतीजा अखिलेश यादव गरम

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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) को अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव नयी ऊर्जा दे सकते हैं। इससे पहले अखिलेश यादव यह कह चुे हैं कि वह चाचा शिवपाल को पूरा सम्मान देंगे। सीटों का बंटवारा फंसा हुआ है।

 

सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर अखिलेश और शिवपाल ने अलग-अलग कार्यक्रम किये। दोनों ने मुलायम सिंह का आशीर्वाद अलग-अलग लिया। शिवपाल यादव ने उपेक्षा का एहसास भी कराया लेकिन 100 सीटें मांग कर अपना रवैया गरम दिखाया है।

 

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आदित्य यादव ने कहा है कि 2022 विधानसभा चुनाव में बड़ी कामयाबी के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव एक मंच पर आएं। सवाल है कि अखिलेश यादव क्या प्रसपा 100 सीटें देंगे? सवाल यह भी है कि क्या शिवपाल सपा में विलय को तैयार होंगे?


फिलहाल, अखिलेश यादव ने जाटलैन्ड आरएलडी को 36 सीटें दे दी हैं। समाजवादी पार्टी के संस्थापक और संरक्षक मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन का इंतजार लंबे समय से हो रहा था। इसके पीछे एक बड़ी सियासी वजह भी थी। सियासी गलियारों में इस बात को लेकर लगातार चर्चा थी कि मुलायम सिंह के जन्मदिन पर चाचा-भतीजा एक होकर मुलायम सिंह को उनके जन्मदिन की सौगात देंगे। इस मौके पर अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल सिंह यादव ने अलग-अलग मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन मनाया। शिवपाल ने कहा कि नेताजी के जन्मदिन पर लोगों को बहुत उम्मीदें थीं कि जल्दी बात हो। उन्होंने कहा कि बीजेपी को हटाने के लिए गठबंधन हो जाना चाहिए। वहीं सपा में विलय की बातें भी कहीं। असल में यह विवाद 2016 में उस वक्त सामने आया था जब समाजवादी पार्टी की तरफ से तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कैंडिडेट की सूची जारी की, तो बेटे अखिलेश ने एक समानांतर सूची जारी कर दी। मुलायम ने चिट्ठी लिख कर अखिलेश यादव से जवाब मांगा। यही नहीं, 30 दिसंबर 2016 को मुलायम ने अखिलेश यादव और अपने चचेरे भाई रामगोपाल यादव को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित भी कर दिया। तब रामगोपाल यादव अखिलेश की तरफ से बयानबाजी कर रहे थे। एक जनवरी 2017 को जब पूरा देश और प्रदेश नया साल मना रहा था, समाजवादी पार्टी में शह और मात का खेल चल रहा था। अखिलेश यादव पार्टी से निष्कासन के बाद पिता मुलायम की जगह खुद पार्टी मुखिया बन बैठे थे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने पिता को साजिशकर्ताओं से बचाने के लिए कुछ भी करेंगे, जिसके चलते चुनावी नुकसान 2017 में अखिलेश को उठाना पड़ा। बीजेपी और खासकर पीएम मोदी ने अपनी चुनावी रैलियों में इसे बड़ा मुद्दा बनाया। पीएम मोदी ने यह मैसेज देने की कोशिश की कि जो अपने पिता का नहीं हुआ वह यूपी की जनता का क्या होगा।


अब 2022 के चुनाव सामने है ऐसे मे समाजवादी कार्यकर्ताओं को 22 नवंबर का इंतजार था। चाचा-भतीजे दोनों ने अलग अलग जन्मदिन मनाया। दूसरी तरफ बीजेपी ने एक बार फिर अखिलेश के पारिवारिक विवाद को लेकर हमला बोलना शुरू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने एक वीडियो ट्वीट किया है, जिसमें पारिवारिक विवाद का जिक्र कर अखिलेश यादव पर निशाना साधा गया है। बीजेपी की उत्तर प्रदेश यूनिट ने इस ट्वीट में लिखा है, ”गद्दी छीनने के लिए सियासत में पार्टी को यूं भी हथियाना पड़ता है, पिता-चाचा जो भी हो, उसको धकियाना पड़ता है। समझ गए न किसकी बात हो रही है ? याद है न, कहीं भूले तो नहीं?” दूसरी तरफ सपा की तरफ से अखिलेश यादव चाचा के लिए नरमी के संकेत दे दिए हैं। जबकि चाचा शिवपाल ने सौ सीटें मांगकर अड़ियल रुख दिखाया है। एक महीने में गठबंधन फाइनल हो जाएगा। 


गौरतलब है कि साल 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश में अपने बेटे अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया। अखिलेश 2017 तक इस पद पर बने रहे। इसी बीच परिवार में कलह के बाद मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव एसपी से अलग हो गये और उन्होंने बाद में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के नाम से एक अलग दल का गठन किया। दरअसल में यह कभी साफ नहीं हो पाया कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव कहां और किसके साथ खड़े हैं। कभी भाई शिवपाल के साथ नजर आए तो कभी बेटे के साथ।

 

अब सपा-प्रसपा दोनों के नेता ये मानते हैं कि गठबंधन में ही भलाई है। शिवपाल यादव ने मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन के मौके पर एक फोटो भी ट्वीट की। इसके साथ उन्होंने लिखा, मैंने वहां भी तुझे मांगा था, जहां लोग सिर्फ खुशियां मांगते हैं। आपको जन्मदिन की बधाई व शुभकामनाएं। आप दीर्घायु हों, स्वस्थ रहें और देश और समाज को दिशा दें, ऐसी मंगलकामना। 

 

बताते हैं कि दोनों के बीच गठबंधन होने में अभी एक महीने का वक्त लगेगा। इससे पहले इटावा में मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर मास्टर चंदगीराम में आयोजित दंगल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक हफ्ते के अंदर अपने लोगों से राय लेकर फैसला करेंगे। वैसे, वे समाजवादी पार्टी में विलय करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पीएसपीएल गठबंधन की संभावना से कतई इनकार नहीं कर रही है और इस बार के विधानसभा चुनावों में भाजपा को हटाने के लिए अपने समर्थकों व छोटी पार्टी के लिए केवल 100 सीटें चाहते हैं। 

 

शिवपाल यादव ने इस प्रकार अखिलेश यादव के सामने शर्त भी रखी है।  छोटे-छोटे दलों के साथ गठबंधन कर सत्ता में वापसी करने जुटे समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पश्चिम यूपी के जाटलैंड में जीत का फॉर्मूला तय कर लिया है। मंगलवार को राष्ट्रीय लोक दल  के अध्यक्ष जयंत चौधरी के साथ उनकी दो घंटे लंबी मुलाकात में गठबंधन पर चर्चा हुई। यह मुलाकात इसलिए भी खास थी क्योंकि पश्चिम यूपी में रालोद की भूमिका हमेशा से अहम रही है। किसान आंदोलन के साथ ही चौधरी अजीत सिंह की कोरोना से मौत की सहानुभूति भी जयंत के साथ होगी। लिहाजा अखिलेश और जयंत की जुगलबंदी से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती है। हालांकि अभी गठबंधन में सीटों का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों के हवाले से मिल रही खबर के मुताबिक सपा रालोद को जाटलैंड की 36 सीटें देगी। जिस फॉर्मूले पर गठबंधन पर सहमति बनी है उसके मुताबिक रालोद 30 सीटों  प्रत्याशी उतारेगी, जबकि 6 सीटों पर सपा के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे। दरअसल, सपा और रालोद गठबंधन पर सभी की निगाहें हुई थी। किसान बिल वापसी के बाद यह भी खबर आ रही थी कि सपा जयंत चौधरी को ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं हैं।

 

सभी अटकलों को विराम देते हुए मंगलवार को जब जयंत और अखिलेश के बीच मुलाकात हुई तो गठबंधन की गांठ बंध ही गई। ऐसा माना जा रहा है कि इस गठबंधन से जाट और मुस्लिम एक साथ होकर वोट करेंगे तो पश्चिम यूपी की कई सीटों पर सियासी समीकरण बदल सकता है।

अखिलेश यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे 2022 के विधानसभा चुनाव में किसी भी बड़े दल से गठबंधन इस बार छोटे-छोटे दलों को संग लेकर चलेंगे। अभी तक अखिलेश यादव ने 12 छोटे दलों से गठबंधन किया है। इनमें केशव देव मौर्य के महान दल, डा. संजय सिंह चैहान की जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट), शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी।

~अशोक त्रिपाठी

 

 

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