तिवारी का रिकार्ड नही तोड़ पाए त्रिवेंद्र

ShahTimesNews
Image Credit: ShahTimesNews

  • तिवारी का रिकार्ड नही तोड़ पाए त्रिवेंद्र
  • गठन से ही राजनीतिक अस्थिरता का शिकार रहा है उत्तराखण्ड
  • 20 साल में आठ मुख्यमंत्री देख चुकी है जनता
  • भाजपा न चार, तो कांग्रेस ने एक बार बदला चेहरा


मौहम्मद शाहनजर
देहरादून।
उत्तराखण्ड की सियासत में राजनीतिक अस्थिरता नई बात नही हैं, अपने गठन से ही यह पर्वतीय प्रदेश पार्टी हाईकमान की ओर से चेहरा बदलने का साक्षी रहा है। 20 वर्षो में उत्तराखण्ड की जनता दस मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल देख चुकी है। विकास पुरुष कहे जाने वाले पंड़ित नारायण दत्त तिवारी (2002 से 2007 तक-1832 दिन) के अलावा कोई भी मुख्यमंत्री यहा अपना कार्यकाल पूरा नही कर सका है। अभी तक भाजपा ने चार बार तो, कांग्रेस ने एक बार चेहरा बदला है। नारायण दत्त तिवारी सर्वाधिक 1832 व भगत सिंह कोश्यारी सबसे कम 123 दिन मुख्यमंत्री रहें हैं। राज्य में 44 दिन राष्ट्रपति शासन भी लगा है। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार को अपने कार्यकाल के 1448 वें दिन इस्तीफा दे दिया है। 


 त्रिवेंद्र सिंह रावत अपनी सरकार के चार साल पूरे होने का जश्न भी नही मना सके, जिसका दर्द उनकी प्रेस कांफ्रेंस में साफ तौर से झलका। पद से हटाये जाने का कारण पूछे जाने पर त्रिवेंद्र का यह कहना कि दिल्ली जाकर पता करों, बड़ा संदेश दे गया है। 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर पहाड़ी राज्य उत्तरांचल बना था तब से चाहे भाजपा की सरकार रही हो या कांग्रेस की, यहां एनडी तिवारी को छोड़कर कोई भी सीएम अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है।


साल 2017 में जिस सरकार को उत्तराखंड के इतिहास में सबसे ज्यादा सीटें मिली यानी कि 70 में से 57 वह सरकार भी राजनीतिक अस्थिरता की ओर बढ़ती चली गई। राज्य गठन के बाद भाजपा की आंतरिम सरकार बनी, नित्यानंद स्वामी को पहले मुख्यमंत्री बनने का सोभाग्य मिला, मगर 9 नवंबर 2000 को शपथ ग्रहण के दिन से ही स्वामी सरकार पर अस्थिरता के बादल मंडराने लगे थे, मंच पर खूब नारेबाजी हुई और हल्ले गुल्ले के बीच गठित हुई सरकार के मुखिया स्वामी को 29 अक्टूबर 2001 को 354 दिन बाद ही अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा। चुनाव से ठीक पहले नेतृत्व परिर्वतन कर भाजपा ने पार्टी के सीनियर नेता भगत सिंह कोश्यारी को प्रदेश की कमान सौंप दी थी। 

हरदा ने की थी मेहनत, तिवारी को मिला था इनाम
देहरादून।
2002 के पहले विधानसभा के चुनाव कोश्यारी के नेतृत्व में हुए और भाजपा चुनाव हार गई। तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हरीश रावत ने कांग्रेस को जिताने में खासी मेहनत की थी, आशा थी के हरीश रावत को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, मगर कांग्रेस हाईकमान ने एनडी तिवारी पर भरोसा जताया। तिवारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस में भी सत्ता संघर्ष शुरू हो गया, हालांकि नारायण दत्त तिवारी सरकार राज्य की पहली निर्वाचित सरकार थी, जिसने अपने कार्यकाल के 5 साल पूरे किए लेकिन इन 5 सालों में ऐसे कई मौके आए जब विधायक दिल्ली की ओर भागे। सरकार बदलने की बात हुई और खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री तिवारी ने मुख्यमंत्री नहीं रहने की इच्छा जताई, मगर तिवारी अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल साबित हुए। 

एक कार्यकाल में दो बार सीएम बने खंडूरी 
देहरादून।
2007 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस को हरा कर सत्ता हासिल की। पार्टी हाईकमान ने मेजर जनरल (रिटायर्ड) बीसी खंडूरी को सीएम बनाया, लेकिन खंडूरी की राह भी आसान नहीं रही। 2009 के लोकसभा चुनाव में पांचो लोकसभा सीटे हारने के चलते खंडूरी को को हटा कर 24 जून 2009 को डाॅ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को मुख्यमंत्री बनाया गया। फिर सितंबर 2011 में ‘खंडूडी जरूरी’ हो गये। निशंक अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही 10 सितंबर 2011 को हटा दिये गये। पार्टी में एक बार फिर खंडूरी को गद्दी सौंपी। 2012 में ‘खंडूडी है जरूरी’ नारे के साथ चुनाव हुआ, खंडूरी खुद अपनी सीट हार गए। खंडूरी की हार को पार्टी की अंदुरूनी बगावत कहा गया।


केदारनाथ आपदा ने लील ली थी बहुगुणा की कुर्सी
देहरादून।
वर्ष 2012 में एक बार फिर कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से बेदखल कर सरकार बनाई। फिर सीएम के चेहरे को लेकर घमासान मचा, हरीश रावत, सतपाल महाराज, डाॅ. इंदिरा ह्दयेश, यशपाल आर्य को पछाड़ विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री तो बन गये, मगर बहुगुणा बमुश्किल डेढ़ साल भी अपना कार्यकाल पूरा नही कर पाए और 2013 में केदारनाथ की भीषण आपदा और इसके बाद सरकार की जो देशभर में फजीहत हुई उसका संज्ञान लेते हुए कांग्रेस आलाकमान ने तब बहुगुणा को हटा कर हरीश रावत को मुख्यमंत्री बनाया। 


बगावत का शिकार हुए हरीश रावत, एक कार्यकाल में तीन बार बने सीएम
देहरादून।
बहुगुणा को हटा कर उनकी जगह उनके धुर विरोधी हरीश रावत को 1 फरवरी 2014 में मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन हरदा अपना कार्यकाल पूरा कर पाते, इससे पहले ही उनकी पार्टी में 18 मार्च 2016 को भगदड़ मच गई। 
विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत अपने साथ 11 नेताओं को लेकर 2016 में भाजपा में शामिल हो गये। प्रदेश में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा। सरकार के अस्तित्व का फैसला कोर्ट से हुआ, हरीश रावत 21 अप्रेल 2016 को एक दिन के सीएम बने, मामला फिर कोर्ट गया। 11 मई 2016 को हरदा बहाल हुए, और 18 मार्च 2017 तक सीएम रहे। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी तरह से हार हुई, हरीश रावत दो-दो जगह से चुनाव हार गये। कांग्रेस 11 सीटों पर सिमट गई।


2017 में प्रचंड जीत के बाद भी असंतोष बरकरार
देहरादून।
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदेश के संसदीय इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की। 70 विधानसभा सीटों में 57 सीटें भाजपा की झोली में आई। मोदी लहर के साथ सत्ता में आई भाजपा ने संघ के करीबी रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत को प्रदेश की कमान सौंपी। पार्टी के अंदर सत्ता संघर्ष जारी रहा। कांग्रेस से आये बागियों को मंत्रीमंडल में ज्यादा तवज्जोह मिलने, विधायकों की बात न सुनने के आरोप त्रिवेंद्र सिंह रावत पर पहले दिन से ही लगते रहे। कई बार त्रिवेंद्र को हटाने की चर्चाए चली। अब जो ताजा घटनाक्रम में उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल 1448 दिन का रहा। त्रिवेंद्र का त्यागपत्र इस ओर इशारा कर रहा है कि छोटे प्रदेश में पिछले 20 सालों में राजनीतिक अस्थिरता यहां की नियति बन गई है।


उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और उनका कार्यकाल
नित्यानन्द स्वामी-9 नवंबर 2000 से 29 अक्टूबर 2001 तक (354 दिन)
भगत सिंह कोश्यारी-30 अक्टूबर 2001 से एक मार्च 2002 तक (123 दिन)
नारायण दत्त तिवारी-2 मार्च 2002 से 7 मार्च 2007 तक (1832 दिन)
भुवन चन्द्र खंडूड़ी-8 मार्च 2007 से 23 जून, 2009 तक (839 दिन) प्रथम कार्यकाल
रमेश पोखरियाल निशंक-24 जून 2009 से 10 सितंबर 2011 तक (808 दिन)
भुवन चन्द्र खंडूड़ी-11 सितंबर 2011 से 13 मार्च 2012 तक (185 दिन) (एक कार्यकाल में दूसरी बार)
विजय बहुगुणा-13 मार्च 2012 से 31 जनवरी 2014 तक ( 690 दिन)
हरीश रावत-1 फरवरी 2014 से 27 मार्च 2016 तक ( 785 दिन) प्रथम कार्यकाल
राष्ट्रपति शासन- 27 मार्च 2014 से 21 अप्रेल 2016 तक ( 25 दिन) 
हरीश रावत-21 अप्रेल 2016 से 22 अप्रेल 2016 तक (1 दिन ) दूसरा कार्यकाल
राष्ट्रपति शासन- 22 मार्च 2016 से 11 मई 2016 तक ( 19 दिन) 
हरीश रावत-11 मई 2016 से 18 मार्च 2017 तक (311 दिन ) तीसरा कार्यकाल
त्रिवेंद्र सिंह रावत-18 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की (1448 दिन)
                     (नोटः वर्तमान में उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र ने मंगलवार 9 मार्च 2021 
                     को राज्यपाल को त्यागपत्र सौंप दिया है, अगले सीएम के 
                         शपथ ग्रहण तक त्रिवेंद्र सिंह रावत सीएम बने रहेंगे)

I think all aspiring and professional writers out there will agree when I say that ‘We are never fully satisfied with our work. We always feel that we can do better and that our best piece is yet to be written’.
View all posts

Leave a Reply