सोशल मीडिया का बच्चों के जीवन पर पड़ता प्रभाव

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अति रूपेण वै सीता ह्यतिगर्वेण रावणः ।

अतिदानाद् बलिर्बध्दो ह्यति सर्वत्र वर्जयेत् ।।

अर्थ: अति रूपवती होने के कारण सीता का हरण हुआ। अति गर्व के कारण रावण मारा गया और अति दानी होने के कारण राजा बलि बन्धन मे पड़ गये। अतःनिश्चित ही अति का सर्वत्र त्याग किया जाना चाहिये ,अति कही भी किसी भी चीज की नही करनी चाहिये ।

आज के समय में सोशल मीडिया का विस्तार काफी तेजी से हो रहा है और इसमें बच्‍चों की मौजूदगी रफ्तार पकड़ रही है। देखा जा रहा है कि बच्चे छोटी उम्र से ही स्मार्टफोन के आदी होते जा रहे हैं और अपना अधिक समय इनके साथ बिताना पसंद कर रहे हैं। वहीं, बच्चों पर सोशल मीडिया के अच्छे और बुरे प्रभाव दोनों देखे गए हैं। सोशल मीडिया का उपयोग आज के समय में तेजी से हो रहा है। ऐसे में  बच्चों पर पड़ने वाले इसके प्रभावों के बारे में पता होना चाहिए। सोशल मीडिया एक तरफ जहां बच्चों को फायदा पहुंचा सकता है, तो वहीं, दूसरी तरफ इसका अधिक इस्तेमाल बच्चों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।

अगर सोशल मीडिया के फायदों की बात की जाये तो, इसके माध्यम से बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों के बारे में भी ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। अगर बच्चे को होमवर्क में दिए गए किसी सवाल का जवाब नहीं मिल रहा है, तो वह यूट्यूब की मदद से उस सवाल के जवाब को समझ सकता है, जिससे उसे लिखने में काफी हद तक मदद मिल सकती है। इसके अलावा, फेसबुक के जरिए दोस्त या रिश्तेदार से जुड़कर वो पढ़ाई में मदद ले सकता है। सोशल मीडिया एक खुला मंच है, जहां हर चीज के बारे में जानकारी मिल सकती है। इसके माध्यम से बच्चे देश-विदेश में होने वाली घटनाओं से भी रूबरू हो सकते हैं और उनका ज्ञान बढ़ सकता है। सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल से बच्चों की कम्युनिकेशन स्किल्स बेहतर हो सकती है। यूट्यूब के वीडियो के माध्यम से बच्चे बोलने का तरीका सीख सकते हैं। इससे बच्चे खुद को प्रेरित कर सकते हैं।सोशल मीडिया एक खुला मंच है। यहां बच्चे अपनी रुचि के हिसाब से अपने टैलेंट को दिखा सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी बच्चे को गायन में रुचि है, तो वह उसका वीडियो बनाकर अपलोड कर सकता है। इससे उसके प्रतिभा को एक नया मंच मिल सकता है

 

साथ ही कुछ नुकसान भी सोशल मीडिया के साथ जुड़े हैं, सोशल मीडिया का अधिक उपयोग बच्चों की मानसिक स्थिति पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। स्मार्टफोन के अधिक उपयोग से बच्चों में मानसिक परेशानी की भी बढ़ोतरी हो सकती है। सोशल मीडिया के अधिक उपयोग से बच्चों की नींद में भी कमी देखी गई है। दरअसल, जो बच्चे देर रात तक सोशल मीडिया का प्रयोग करते हैं, इससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती है और वो अवसाद का शिकार हो सकते हैं। सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव में उनकी पढ़ाई-लिखाई भी शामिल है क्योकि अगर ज़्यादा वक़्त सोशल मीडिया पर दिया जाता हैं तो उनकी पढ़ाई-लिखाई सीधी प्रभावित होती हैं।इस बारे में साइबर लॉ एक्सपर्ट सैय्यद रिज़वान ज़ैदी बताते हैं कि स्मार्टफोन के अधिक उपयोग से बच्चों की सामाजिक कार्य प्रणाली के साथ-साथ स्कूली परफॉर्मेंस भी प्रभावित हो सकती है।


सोशल मीडिया का अधिक उपयोग बच्चों और माता-पिता के बीच में दूरी बढ़ा सकता है। सोशल मीडिया बच्चों में हिंसा को भी बढ़ावा दे सकता है। अगर बच्चे हिंसक चीजें देखेंगे, तो उनके अंदर भी वैसी आदतों का विकास हो सकता है। इससे वो घर में भी अपने परिवार वालों के साथ वैसा ही व्यवहार कर सकते हैं।अधिक सोशल मीडिया की आदत लग जाने से उनकी एकाग्रता पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए ज़रूरी हैं की एक वक़्त निर्धारित कर लेना चाहिए क्योकि अति सर्वत्र वर्जते अर्थात अति करने से हमेशा बचना चाहिए,अति का परिणाम हमेशा हानिकारक होता है।

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