भारत में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

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नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व सोमवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया है।


दिल्ली में कोरोना महामारी के बीच मंदिरों में खासी तैयारी देखी गई और सुबह से श्रृद्धालु मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचने शुरू हो गये। नोएडा के इस्कान मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा, बड़ी संख्या में लोग आरती में शामिल हुए।


भगवान कृष्ण जन्माष्टमी का मुख्य आकर्षण उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृन्दावन, गोवर्धन, नन्दगाव और बल्देव में देखा जा रहा है। इन स्थानों पर आज कृष्ण मन्दिरों में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। द्वारकाधीश मन्दिर में तीर्थयात्रियों की भारी संख्या के बीच ठाकुर का अभिषेक किया गया वहीं जन्म स्थान स्थित भागवत भवन में भोर जब श्रीकृष्ण जन्म की खुशी में शहनाई बजी तो वहां उपस्थित श्रद्धालु नृत्य करने लगे। भागवत भवन में प्रातःकालीन सत्र में कीर्ति किशोरी ने भजनों काे प्रस्तुत करके वातावरण ऐसा बनाया कि भक्ति की रसधारा बह निकली।
वृन्दावन के तीन मन्दिरों राधारमण मन्दिर, राधा दामोदर मन्दिर और शाह जी मन्दिर में आज जन्माष्टमी दिन में मनाई गई। सप्त देवालयों में मशहूर राधारमण मन्दिर में 27 मन दूध, दही, बूरा, धी, शहद, औषधियों एवं महाऔषधियों के द्वारा मुख्य विगृह का अभिषेक तीन घंटे से अधिक देर तक चला।


मन्दिर के सेवायत पद्मनाभ गोस्वामी, श्रीवत्स गोस्वामी, दिनेश चन्द्र गेास्वामी और ओम गोस्वामी ने वैदिक मंत्रों एवं घंटे घड़ियाल तथा शंखध्वनि के मध्य ठाकुर का अभिषेक किया। इसके बाद ठाकुर का श्रृंगार कर उनके काजल लगाया गया तथा सबसे अन्त में गोस्वामी समाज के लोगों ने लाला को दीर्घजीवी होने का आशीर्वाद दिया। इसके बाद मन्दिर के सामने खड़े जनसमुदाय में चरणामृत का वितरण किया गया क्योंकि वृन्दावन के लोग इसे ही ग्रहण कर व्रत के नियम का पालन करते है।

 


वृन्दावन के ही राधा दामोदर मन्दिर में भी आज कई घंटे तक घंटे घड़ियाल एवं शंखध्वनि के मध्य विगृहों का अभिषेक किया गया। इस अवसर पर उस पवित्र शिला का भी अभिषेक किया गया जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं सनातन गोस्वामी को यह कहकर दिया था कि वे यदि इसकी चार परिक्रमा करेंगे तो उनकी गोवर्धन की एक परिक्रमा हो जाएगी। इसके बाद का मन्दिर के चौक का दृश्य बड़ा ही मनोहारी था। पूजन में शामिल मन्दिर के सेवायत कणिका गोस्वामी, बलराम गोस्वामी, पूरनचन्द्र गोस्वामी आदि ने एक दूसरे पर तथा श्रद्धालुओं पर हल्दी मिश्रित दही को इस प्रकार से डाला जैसे होली खेली जाती है। उन्होंने ऐसा कर श्रीकृष्ण जन्म की खुशी का इजहार किया।


वृन्दावन के मशहूर शाह जी मन्दिर में भी आज मुख्य विगृह का पंचामृत अभिषेक दिन में ही किया गया। इसके बाद इस मन्दिर के बाहर इंतजार कर रहे भक्तों में चरणामृत का उसी प्रकार वितरण किया गया जिस प्रकार राधा दामोदर मन्दिर में किया गया।


उधर उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा आयोजित कृष्णोत्सव, 2021 के अन्तर्गत आज मथुरा नगरी नयी नवेली दुल्हन की तरह सज गई है तथा एक दर्जन चौराहों पर ब्रज की मशहूर कलाओं का प्रस्तुतीकरण किया जा रहा है।
झारखंड में भी श्री कृष्णाष्टमी की धूम रही मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इस अवसर राज्यपाल रमेश बैस और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लोगों को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं।
राज्यपाल ने सोमवार को कहा कि भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना है कि वह सबको उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और आनंद प्रदान करें तथा आजीवन प्रगति के पथ पर गतिमान रखे।


श्री सोरेन ने श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सभी देश और झारखण्डवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने सभी के स्वस्थ, सकुशल और सुखी रहने की कामना की है।
राजस्थान में धार्मिक नगरी अजमेर, मंदिरों की नगरी पुष्कर और श्री निम्बार्कपीठ तीर्थ सलेमाबाद में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व सुबह से ही श्रद्धा, भक्ति, उल्लास एवं उत्साहपूर्वक परंपरागत तरीके से मनाया जा रहा है।


अजमेर जिले में कोरोना महामारी की सरकारी कोरोना दिशा-निर्देशों के तहत जन्माष्टमी पर कोई सार्वजनिक कार्यक्रम अथवा झांकियों का आयोजन नहीं किया जा रहा है, लेकिन जिले के मंदिरों में जन्माष्टमी का उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है।


अजमेर के सलेमाबाद स्थित श्री निम्बार्क तीर्थ में सुबह जन्माष्टमी के मौके पर आचार्य पीठ में श्रीमद् भागवत कथा का मूर्ति पूजन हुआ। जगतगुरु निम्बार्काचार्य श्री श्रीजी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति सच्ची श्रद्धा ही प्रभु तक पहुंचने का मार्ग बताया। यहां सायंकालीन आरती के बाद रात्रि में जन्मलीलानुकरण, पंचामृत अभिषेक, पालना के अतिक्षय मनोरम दर्शन व प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा और वृंदावन के कलाकारों द्वारा रासलीलाअनुकरण किया जाएगा।


पुष्कर राज में भी विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है। लोग कृष्ण जन्मोत्सव पर पूरी श्रद्धा भाव के साथ विभिन्न कृष्ण मंदिरों में दर्शन पूजा अर्चना कर रहे हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर ब्रह्मा मंदिर में भी जन्मोत्सव धूमधाम से कोरोना नियमों के तहत आयोजित होगा और ब्रह्मा जी का भव्य श्रंगार किया जाएगा। मंदिर में ही भगवान श्रीकृष्ण की झांकी सजाकर रात्रि बारह बजे आरती व प्रसाद वितरण होगा।


पुष्कर के ही नये रंगजी मंदिर पर भी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। पुराने रंगजी मंदिर पर भी श्रद्धालु दर्शानार्थ पहुंच रहे हैं। व्यवस्थापकों की ओर से नये व पुराने रंगजी मंदिर में दक्षिण पद्धति से भगवान श्रीकृष्ण के श्याम वर्ण की पूजा अर्चना की जा रही है।
अजमेर के विभिन्न राधाकृष्ण मंदिरों में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लग रहा है। आगरा गेट स्थित मराठाकालीन श्री पंचमुख हनुमानजी और वैभव महालक्ष्मी मंदिर में जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन सुबह पांच बजे मंगल आरती के साथ हुआ। यहां फूल बंगले की झांकी सजाई जा रही है। प्रजापति ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय चंद्रवरदाई क्षेत्र में राधाकृष्ण एवं गोप गोपियों का धार्मिक रास कार्यक्रम आयोजित किया गया। शहर के विभिन्न कृष्ण मंदिरों में तथा कॉलोनियों के मंदिरों में भी कृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है।

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