पुण्यतिथि पर महान स्वतंत्रता सेनानी अब्बास तैय्यब को किया याद

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  • पुण्यतिथि पर महान स्वतंत्रता सेनानी अब्बास तैय्यब को किया याद
  • स्वतंत्रता सेनानी ही नही बल्कि मानवता के प्रतीक भी थे तैय्यब जीः डाॅ. फारूक


शाह टाइम्स संवाददाता 
देहरादून।
अब्बास तैयबजी एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट ने जस्टिस अब्बास तैयबजी की याद में एक वेबिनार का आयोजन किया, जिसे ‘छोटा गांधी’ के नाम से जाना जाता है, जिनका निधन 9 जून, 1936 को साउथ-वुड एस्टेट, मसूरी में हुआ था। महान स्वतंत्रता सेनानी को उनकी 85वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का संचालन आसिफ आजमी ने किया। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के संस्थापक सदस्य और अधिवक्ता अनिल नौरिया ने स्वर्गीय न्यायमूर्ति अब्बास तैयबजी के संक्षिप्त जीवन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अब्बास तैय्यब का परिवार भारत के कई भाग और एक शाखा बर्मा में फैला है। उनके एक बेटे एसएएस अब्बास तैय्यब बर्मा में विधायक बने और फिर वापस हैदराबाद (भारत) चले गए। न्यायमूर्ति अब्बास तैयब एक महान राष्ट्रीय नेता थे जिन्होंने न्यायमूर्ति सेवा छोड़ दी और देश को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए महात्मा गांधी के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए।


सलमान खुर्शीद पूर्व केंद्रीय मंत्री भारत सरकार ने कहा कि हमें अब्बास तैयबजी ट्रस्ट के लिए डॉ. एस. फारूक के योगदान को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अब्बास तैयब के जीवन के महत्व और सिद्धांतों को याद रखना चाहिए और अपनी यादों को ताजा करना चाहिए। एजाज इल्मी ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए और सलमान खुर्शीद और डॉ. एस. फारूक को अब्बास तैयब ट्रस्ट के साथ जोड़ने के लिए धन्यवाद व्यक्त किया।

न्यायमूर्ति अब्बास तैय्यब की परपोती डॉ. समन हबीब ने महान स्वतंत्रता सेनानी की कुछ तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने गुजरात के महाराजा की ओर से वर्ष 1897 में टीकाकरण की एक तस्वीर साझा की जिसमें अब्बास तैयब जी अपनी बेटी शरीफा को टीकाकरण के लिए ले गए। ब्रोडा के प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. जे.एस. बंदुकवाला ने हिंदू-मुस्लिम संबंध और समग्र राजनीति के संदर्भ में न्यायमूर्ति अब्बास तैय्यब के महत्व को बताते हुए अपने विचार व्यक्त किए। प्रो. प्रभु गुप्तारा ने भी अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि जस्टिस अब्बास तैय्यब पहले व्यक्ति थे जिन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज उठाई। ट्रस्ट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. एस. फारूक ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि न्यायमूर्ति अब्बास तैयबजी न केवल एक स्वतंत्रता सेनानी थे बल्कि मानवता के प्रतीक भी थे। जैसा कि 1897 में जस्टिस अब्बास तैय्यब जी अपनी बेटी शरीफा को टीकाकरण के लिए ले गए हमें भी टीका लगवना चाहिए। इस अवसर पर स्वर्गीय परिपूर्णा नंद पेनुली, पूर्व एमपी टिहरी और ट्रस्ट के संस्थापक सचिव और कोषाध्यक्ष को भी याद किया गया। प्रो. एम. फारूक ने धन्यवाद ज्ञापित किया। 
 

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