दो विधानसभाओं की सियासत जनहित पर भारी

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दो विधानसभाओं की सियासत जनहित पर भारी 

राजनीति में फंसा पुल का उद्घाटन 

पहले पंडाल पॉलिटिक्स, अब सीएम का इंतजार

शाह टाइम्स ब्यूरो 

ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश से सटी 2 विधानसभाओं के बीच राजनीति इस कदर हावी है कि अब इसमें जनहित भी दरकिनार किया जा रहा है। यही वजह है कि स्थानीय राजनीति और श्रेय लेने की होड़ के चलते हजारों की आबादी व पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र उद्घाटन के लिए फिलहाल ‘‘ माननीयों ’’ के इंतजार कर रहा है।
दरअसल, करीब डेढ़ दशक बाद मुनिकीरेती क्षेत्र में एक और झूलापुल का सपना साकार हुआ। पुल को अस्तित्व में लाने के लिए तकरीबन 50 करोड रुपए की रकम खर्च की गई। पुल का निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित विभाग पीडब्ल्यूडी ने इसके उद्घाटन के लिए 10 नवंबर की तारीख मुकर्रर की, लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री समय न होने की वजह से ब्रिज के उद्घाटन के लिए मुनिकीरेती नहीं पहुंच सके। वहीं, राजनीतिज्ञों की मानें, तो यह मामला मुख्यमंत्री के पास समय न होने का नहीं, बल्कि नरेंद्रनगर और यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र के माननीयों की राजनीति से जुड़ा बताया जा रहा है। 
चर्चा है कि पुल के उद्घाटन कार्यक्रम का पंडाल लगाने को लेकर रस्साकशी हावी है। पहले तो इसी वजह से पुल के उद्घाटन में देरी हुई। अब मुख्यमंत्री की व्यस्तता के चलते पुल का उद्घाटन लटका हुआ है। हालांकि, 20 नवंबर को पुल का उद्घाटन सीएम के हाथों होने की बात कही जा रही है, लेकिन 2 विधानसभाओं की राजनीति के बीच इस ब्रिज के उद्घाटन में देरी तो हो ही रही है।

शीलापट को लेकर भी हुआ था विवाद
ऋषिकेश। मुनिकीरेती से बना थ्रीलेन ब्रिज शीलापट को लेकर भी विवादों में आ चुका है। दरअसल, उद्घाटन से पहले ही स्वर्गाश्रम नगरपंचायत के अध्यक्ष का नाम उद्घाटन शीलापट पर नहीं होने को लेकर भी काफी विवाद सामने आया था। सोशल मीडिया पर काफी पोस्ट भी स्वर्गाश्रम नगरपंचायत अध्यक्ष का नाम न होने को लेकर वायरल हुई थी। यहां तक कि, नगरपालिका मुनिकीरेती के चेयरमैन ने तो खुद का नाम पट से हटवा भी दिया था।

 

पहले एक्सपेरिमेंट, अब उद्घाटन में देरी

ऋषिकेश। मुनिकीरेती में झूला पुल को लेकर राजनीति कोई पहली दफा नहीं हुई है, बल्कि साल 2006 से ही  यह पुल राजनीति फंसा रहा है। दरअसल, पूर्ववर्ती एनडी तिवारी सरकार में साल 2006 में सिंगल लेन ब्रिज निर्माण का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन कांग्रेस की सरकार के चले जाने के बाद राजनीति के चलते इस ब्रिज के निर्माण को लेकर महज कागजों पर एक्सपेरिमेंट ही हुए। साल 2013 तक पुल निर्माण को लेकर जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। नरेंद्रनगर विधायक और वर्तमान में कृषिमंत्री सुबोध उनियाल ने इस ब्रिज निर्माण के सपने को साकार करने के लिए पुरजोर कोशिश की, जिसके बाद साल 2013 के जनवरी माह में केंद्रीय योजना के तहत इस थ्रीलेन ब्रिज के निर्माण की वित्तीय स्वीकृति मिली। हालांकि, देरी के चलते 36 करोड़ से बढ़कर इसकी लागत लगभग 50 करोड जरूर पहुंच गई, जिसके लिए कृषि मंत्री भी पूर्व सीएम हरीश रावत को जिम्मेदार ठहराते हैं।

 

क्या कहता है पीडब्ल्यूडी

ऋषिकेश। पीडब्ल्यूडी की नरेंद्रनगर डिवीजन के अधिशासी अभियंता मोहम्मद आरिफ खान के मुताबिक पुल का उद्घाटन 10 नवंबर को किया जाना था, लेकिन मुख्यमंत्री की व्यस्तता के चलते यह कार्यक्रम नहीं हो पाया। विभाग को पुल के उद्घाटन के लिए अभी तक सीएम कार्यालय से कोई तारीख नहीं मिली है। 

 

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