प्रेम पर भारी पड़ेगी पीएम मोदी-त्रिवेन्द्र मुलाक़ात ! पुष्कर ले सकते हैं सख्त फैसला !

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  • प्रेम पर भारी पड़ेगी पीएम मोदी-त्रिवेन्द्र मुलाक़ात! पुष्कर ले सकते हैं सख्त फैसला !
  • आने वाले कुछ दिन कुछ मंत्रियों के लिए बेहद संकट-तनावपूर्ण!
  • लोकसभा चुनाव से पहले आला कमान मंत्रियों की कुर्बानी देने से भी नहीं हिचकेगा 
  • आर्केडिया चाय बागान-अमिताभ मिल लैंड यूज घोटाले से जुड़े दिग्गजों पर भी तलवार!


चेतन गुरुंग 
देहरादून।
सरकारी नौकरियों और विधानसभा में हुई नियुक्तियों पर हंगामे दौर में आज पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाक़ात कर सियासी माहौल में उबाल ला दिया। ये मुलाक़ात वित्त मंत्री और विधानसभा भर्तियों को ले के विवादों के केंद्र में चल रहे प्रेमचंद अग्रवाल के लिए घातक साबित हो सकती है। खास तौर पर ये देखते हुए कि सीएम पुष्कर सिंह धामी का रुख पहले ही भर्ती घोटालों को ले के बेहद सख्त चल रहा है। वह ऊपर की मंजूरी के साथ कभी भी बड़ा और चौंकाने वाला फैसला ले सकते हैं।  


त्रिवेन्द्र ने ही सीएम रहते उस फाइल को मंजूरी दी थी, जिसमें प्रेमचंद ने विधानसभा अध्यक्ष होने के दौरान 72 पदों पर नियुक्तियों की जरूरत प्रकट की थी। उन्होंने मंजूरी देने के साथ ही एक बंदिश भी हाथों हाथ लगा दी थी कि भर्तियाँ उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के जरिये होनी चाहिए। भर्तियाँ लेकिन किस अंदाज में हुई, अब दुनिया जान चुकी है। माना जा रहा है कि त्रिवेन्द्र ने मुलाक़ात के दौरान पीएम को इस पूरे खेल के बारे में पूरी जानकारी दी है। 
मोदी से वक्त हासिल करना अच्छे-अच्छों के लिए बहुत बड़ी चुनौती होती है। त्रिवेन्द्र को पूर्व सीएम होने के बावजूद वक्त दिया जाना सिर्फ और सिर्फ दो वजहों से मुमकिन माना जा रहा है। अधिकांश भर्तियों का काल उनके ही सीएम रहने के दौरान का है। मुमकिन है कि हाई कमान इस बाबत सही तस्वीर जानना चाहता हो। दूसरा ये कि उनसे मोदी भर्तियों और पार्टी के लोगों के खेल के बारे में फीड बैक लेना चाह रहे हों। 


त्रिवेन्द्र ने अगर मोदी के सामने वही बात बोल दी होगी, जो वह भर्तियों को मंजूरी के मामले में सार्वजनिक तौर पर लगातार बोल रहे हैं, तो प्रेमचंद के लिए ये बहुत भारी पड़ सकता है। प्रेमचंद के लिए संकट इसलिए भी गहरा माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर भर्ती घोटालों को ले के कतई कोई समझौता करने के मूड में नहीं हैं। वह भर्ती घोटालों पर इस कदर धड़ाधड़ फैसले ले रहे हैं कि विपक्षी दल काँग्रेस के पास भी उनकी घेराबंदी करने का मौका ढंग से नहीं है। 


पुष्कर के तेवरों से वे मंत्री इन दिनों सहमे हुए महसूस हो रहे हैं, जो किसी न किसी विवाद में घिर चुके हैं या फिर विवादों संग 7 फेरे ले चुके हैं। पुष्कर की गुड बुक्स से बाहर या फिर उनके लिए कुआं खोदने वाले और विवादित मंत्रियों के लिए तो इन दिनों मानो हर पल और सेकंड जान हथेली पर है। वे सीएम के रहमोकरम पर माने जा रहे हैं। उनकी एक रिपोर्ट ऐसे मंत्रियों के सियासी भविष्य पर बड़ा सा ताला ठोंक सकता है। इन मंत्रियों के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद संकटपूर्ण और चुनौती भरे साबित हो सकते हैं। 


सूत्रों के मुताबिक मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार पुष्कर से रिपोर्ट ले रहे हैं। दोनों के पास हर एक ऐसे शख्स की रिपोर्ट लगातार पहुँच रही है, जो किसी न किसी किस्म की धांधलियों और घोटालों से सीधे या परोक्ष तौर पर जुड़े माने जा रहे हैं। आर्केडिया चाय बागान की 1127 एकड़ जमीन का लैंड यूज मनमाने ढंग से खुद ही बदल के उसका उपयोग करना और प्रेमनगर कैंट के अमिताभ टैक्स्टाइल मिल के लैंड यूज परिवर्तन घोटाले से भी सरकार और बीजेपी के बड़े नामों के संलिप्त होने का खुलासा अंदरखाने हो चुका है। 


उनके खिलाफ भले कोई कार्रवाई सरकार ने नहीं की है लेकिन उनकी जन्मकुंडली मोदी-शाह के पास पहुँच चुकी है। इस सबके चलते लोकसभा चुनाव से पहले मोदी-शाह कोई भी बड़ा और कठोर कदम उत्तराखंड में उठा सकते हैं। दोनों के लिए लोकसभा चुनाव सबसे बड़ा लक्ष्य है। इसके लिए वे किसी की भी कुर्बानी देने से नहीं हिचकेंगे, चाहे वह मंत्री ही क्यों न हो और चाहे केन्द्रीय सियासत से जुड़े हों। खास पहलू ये है कि ताजे मामलों और घोटालों के दौर में पुष्कर बेहद मजबूत और शक्तिशाली बन के उभरे हैं। 

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