गलत विज्ञापन पर ओछी सियासत

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने विज्ञापन विवाद पर योगी को जमकर कोसा है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार यूपी में फेल हो गई है और दूसरे राज्यों के विकास मॉडल को चुराकर अपना बता रहीं है। भाजपा से टीएमसी में घर वापसी करने वाले मुकुल राय ने आरोप लगाते हुए कहा है ट्रांसफॉर्मिंग यूपी का मतलब तस्वीरें चुराना है। उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के झूठ की पोल फिर खुल गईं है।

द इंडियन एक्सप्रेस में उत्तर प्रदेश सरकार का छपा एक विज्ञापन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के गले की हड्डी बन गया। ट्रांसफॉर्मिंग उत्तर प्रदेश अंडर योगी आदित्यनाथ शीर्षक से विज्ञापन प्रकाशित हुआ है। विज्ञापन न सिर्फ योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार के लिए मुसीबत बन गया है बल्कि इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबार की छवि को भी इस विज्ञापन से आघात पहुंचा है। मीडिया के अनुसार विज्ञापन में उत्तर प्रदेश की तस्वीर छापने के बजाय पश्चिम बंगाल के कोलकाता की तस्वीर छाप दी गयी है। विज्ञापन में दिखाया गया चित्र माँ फ्लाईओवर का है, जिसका निर्माण मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कराया है। विज्ञापन में कोलकाता शहर की पीली टैक्सी भी दौड़ती दिख रहीं हैं। वहां का एक मशहूर होटल भी दिखाई दे रहा है। विज्ञापन की सच्चाई जानने के बाद विपक्ष योगी सरकार पर पिल पड़ा है क्योंकि सामने उत्तर प्रदेश का चुनाव है। राजनैतिक लिहाज से बड़ा राज्य होने के कारण सभी दलों की निगाहें इस पर हैं। लिहाजा विज्ञापन को लेकर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, टीएमसी सीधे मुख्यमंत्री योगी पर हमला बोल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए विपक्ष ने कहा है कि विकास के नाम पर उत्तर प्रदेश में कुछ नहीं है। लिहाजा अपनी नाक बचाने के लिए सरकार ने झूठा विज्ञापन प्रकाशित किया है। राज्य विधानसभा का चुनाव भाजपा के लिए करो और मरो की स्थिति बन गया है। कोविड की दूसरी लहर में राज्य में काफी मौतें हुईं। लोगों को आक्सीजन और दूसरी सुविधाएं नहीं मिल पायीं। लोग शवों का अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाए। इसे लेकर विपक्ष सरकार को पहले ही कठघरे में खड़ा कर चुका है जबकि केंद्र ने साफ कह दिया था कि ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुईं है। विज्ञापन विवाद पर विपक्ष का आरोप है कि दूसरे राज्यों के विकास मॉडल को चुरा कर योगी सरकार अपना बताने पर तुली है। राज्य में डेंगू कहर बरपा रहा है। कई जिलों में स्थिति भयावह है। सरकार विज्ञापनों से अपनी छबि को सुधारना चाहती है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने विज्ञापन विवाद पर योगी को जमकर कोसा है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार यूपी में फेल हो गई है और दूसरे राज्यों के विकास मॉडल को चुराकर अपना बता रहीं है। भाजपा से टीएमसी में घर वापसी करने वाले मुकुल राय ने आरोप लगाते हुए कहा है ट्रांसफॉर्मिंग यूपी का मतलब तस्वीरें चुराना है। उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के झूठ की पोल फिर खुल गईं है। जमीन पर कुछ नहीं दिख रहा है जनता के पैसे को विज्ञापन में लगाया जा रहा है। दूसरे राज्य की तस्वीर चुरा कर अपना बताया जा रहा है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा है कि ऐसा विकास आपने देखा होगा न सुना होगा। कोलकाता के विकास को हमारे मुख्यमंत्री खींचकर यूपी में लाए हैं। एक भूल को विपक्ष ने मुद्दा बना लिया है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्री ने लिखा है सरकार अपनी नीयत बदले या एड एजेंसी।

विज्ञापन को लेकर लोग जहां सरकार की चुटकी ले रहे हैं, वहीं सोशलमीडिया पर विदेश की तस्वीरें डाल कर लिख रहे हैं कि उत्तर प्रदेश बदल रहा है। लोग बता रहे हैं कि देखिए हमारा गांव कितना बदल गया है। सरकार की खूब चुटकी ली जा रहीं है। विज्ञापन को लेकर चैतरफा हमले से घिरी सरकार मुंह छुपा रही है उसके पास कोई जवाब नहीं  है। वैसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और योगी में राजनीतिक लिहाज से छत्तीस का आंकड़ा है। बंगाल में संपन्न हुए चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विजय हासिल कर मोदी एंड शाह टीम को धूल चटाई है, लेकिन कोलकाता में दीदी का विकास मॉडल योगी बाबा को कैसे भा गया यह समझ नहीं आ रहा। यह कैसा खेला होबै है।

सोशलमीडिया यूजर्स इंस्टाग्राम, फेसबुक,ट्विटर पर विदेशी तस्वीरें लगाकर सरकार के विकास मॉडल को ट्रोल कर रहे हैं। सोशलमीडिया प्लेटफॉर्म पर इस तरह की पोस्ट पर काफी कमेंट आ रहे हैं। सरकार के बचाव में भाजपा ने कई तर्क दिए हैं। सवाल उठता है इस विज्ञापन को लेकर कहां गलती हुई। सरकार की सहमति से यह सब खेल हुआ या फिर इंडियन एक्सप्रेस के विज्ञापन विभाग की तरफ से। विज्ञापन को सरकार को बताए बिना छाप दिया गया। यह भी हो सकता है कि विज्ञापन का संदेश समाज में सकारात्मक जाए जिसकी वजह से अखबार ने इस तरह का विज्ञापन जारी कर दिया। यह भी हो सकता है कि विज्ञापन फाइनल करने से पूर्व सरकार से अनुमति नहीं ली गई हो।

इंडियन एक्सप्रेस ने माफी भी मांगी है। अखबार की तरफ से कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के विज्ञापन में भूल से गलत तस्वीर प्रकाशित हुई है। सभी डिजिटल संस्थान से यह तस्वीर हटा दी गईं है लेकिन सवाल उठता है कि इतनी बड़ी भूल इतने बड़े मीडिया संस्थान से कैसे हो सकती है। विज्ञापन सरकार की नीति और योजनाओं से जुड़ा है । अखबार का विज्ञापन विभाग अपने मन से ऐसी तस्वीर नहीं छाप सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार को बगैर बताए उसने ऐसा छापा है तो निश्चित रूप से संस्थान की यह बड़ी भूल है। गलती अखबार की तरफ से की गई है लेकिन, इसका खामियाजा सरकार भुगत रही है। सवाल उठता है कि विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं क्या विज्ञापन के लिए प्रदेश में ऐसा कोई कार्य नहीं हुआ जिसका उपयोग विज्ञापन में किया जाता। फिलहाल यह मानवीय भूल है विपक्ष को बेवजह इस मसले को तूल नहीं देना चाहिए था। उसे जमीनी मुद्दों पर सरकार को घेरना चाहिए।

 ~प्रभुनाथ शुक्ल

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