महिला दिवस पर ही नहीं, हर रोज हो सम्मान : पिया शर्मा

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नई दिल्ली देश की जानी मानी एंकर, मॉडल और एक्‍टर पिया शर्मा ने अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस के एक दिन पहले अपने संदेश में कहा है कि महिलाओं का हर दिन सम्मान होना चाहिए। एक दिन की औचारिकताएं न हों.उन्होंने सभी लोगों को महिला दिवस की बधाई दी. यह साल बहुत खास है क्‍यों कि महिला दिवस को 8 मार्च को मनाते हुए इस बार पूरे सौ साल हो जाएंगे. 8 मार्च को पहली बार महिला दिवस 1921 में मनाया गया था और उसके बाद से यही तारीख अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस के लिए घोषित की गई. इससे पहले अलग-अलग तारीखों पर इसका आयोजन होता था।

 

 

उन्‍होंने मीडिया से बातचीत में कहा है कि एक महिला होने के नाते यह खास दिन मेरे लिए बहुत मायने रखता है. मेरे लिए ही नहीं, बल्कि हम सब के लिए, चाहे वे महिलाएं हों या पुरूष हों, सबको बहुत शुभकामनाएं।

 

 

इंटरनेशनल वूमेन डे का ऐसा है इतिहास


पिया शर्मा ने कहा कि विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर मनाया जाता है. सबसे पहली बार महिला दिवस न्यूयॉर्क शहर में 28 फ़रवरी 1909 में एक समाजवादी राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया था. इसके बाद यह फरवरी के आखिरी इतवार के दिन मनाया जाने लगा.1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में इसे अन्तर्राष्ट्रीय दर्जा दिया गया. उस समय इसका प्रमुख ध्येय महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाना था, क्योंकि उस समय अधिकतर देशों में महिला को वोट देने का अधिकार नहीं था. 1917 में सोवियत संघ ने इस दिन को एक राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया।


प्रसिद्ध जर्मन एक्टिविस्ट क्लारा ज़ेटकिन के जोरदार प्रयासों के बदौलत इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस ने साल 1910 में महिला दिवस के अंतर्राष्ट्रीय स्‍वरूप और इस दिन पब्लिक हॉलीडे को सहमति दी. इसके भी 11 साल बाद महिला दिवस की तारीख को साल 1921 में फाइनली बदलकर 8 मार्च कर दिया गया. तब से महिला दिवस पूरी दुनिया में 8 मार्च को ही मनाया जाता है।

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