डिग्री कॉलेजों को अनुदान बंद करने पर फैसला नहीं:आनंदबर्द्धन

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डिग्री कॉलेजों को अनुदान बंद करने पर फैसला नहीं:आनंदबर्द्धन

गैर सरकारी प्रबंधन वाले कॉलेजों के शिक्षकों-कर्मचारियों में बेचैनी-आक्रोश

चेतन गुरुंग

देहरादून। राज्य के प्रबंधन संचालित गैर सरकारी डिग्री कॉलेजों को सरकारी अनुदान बंद करने का फैसला अभी अटका हुआ है। प्रमुख सचिव (उच्च शिक्षा) आनंदबर्द्धन ने `शाह टाइम्स से कहा, `इस संबंध में प्रस्ताव तो है लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ है

सरकार का ये फैसला अगर अमल में आता है तो गैर सरकारी डिग्री कॉलेजों के प्रबंधन के सामने तालाबंदी के सिवाय कोई चारा नहीं रह जाएगा। प्रोफेसर-असोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर या इस स्तर के शिक्षकों की तनख्वाह ढाई लाख रुपए तक है। इनमें से कईयों की नौकरियाँ सालों की बची हैं। सरकारी अनुदान बंद हो जाता है तो प्रबंधन के बूते की बात नहीं कि वह 10 फीसदी स्टाफ को भी अपने खर्च पर मौजूदा तनख्वाह-सुविधाओं-शर्तों पर सेवा में रख सके।

अधिकांश कॉलेजों की अपनी वित्तीय दशा पहले ही बहुत खराब है। त्रिवेन्द्र सरकार इन कॉलेजों को सरकारी अनुदान खत्म करने की सोच रही है। इससे मुताल्लिक प्रस्ताव तैयार कर फ़ाइल चल पड़ी है। इसके चलते इन कॉलेजों के शिक्षकों-कर्मचारियों में हंगामा और घबराहट संग सरकार के खिलाफ नाराजगी का आलम है। उनको अपना भविष्य अंधकार में दिखाई दे रहा है। प्रबंधन के सामने बिना सरकारी अनुदान के छंटनी करने या फिर कॉलेज को बंद करने के अलावा विकल्प नहीं रह जाएगा।

इस संबंध में पूछे जाने पर प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन ने साफ किया कि अभी ये सिर्फ विचार के स्तर पर शुरुआती दौर में है। प्रस्ताव की फ़ाइल बनी है लेकिन किसी भी प्रकार का फैसला नहीं हुआ है। फैसला किया भी जाता है तो पहले उसके मानक बनाए जाएंगे। ऐसा नहीं होगा कि सरकार इन कॉलेजों के अनुदान को झटके में रोक देगी। मानक क्या होंगे, अभी ये ही तय नहीं है। कब बनाए जाएंगे और फैसले को मंजूरी मिलती भी है तो उसको कब से व्यवहार में लाया जाएगा, कुछ भी साफ नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, `मौजूदा सूरते हाल ये है कि फिलहाल सभी कॉलेजों को सरकारी अनुदान मिल रहा है। बंद करने की कोई फ़ाइल मेरे पास आई नहीं है। त्रिवेन्द्र सरकार ने इसी तरह के मिलते-जुलते मामले में गैर सरकारी प्रबंधन वाले स्कूलों को सरकारी अनुदान बंद करने के प्रस्ताव को रद्द कर दिया है। मुमकिन है कि कॉलेजों के मामले में भी वह प्रस्ताव को या तो रद्द कर दे या फिर विधानसभा चुनाव से पहले इस किस्म के सख्त प्रशासनिक-अलोकप्रिय किस्म के प्रस्तावों को रोक के रखें। इस किस्म के फैसलों से सत्तारूढ़ बीजेपी को चुनावों में नुक्सान पहुँचने का अंदेशा जताया जा रहा है।    

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