न्यू वर्ल्ड ऑर्डर अब क्या गुल खिलाएगा

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आज दुनिया में न्यू वर्ल्ड ऑर्डर लगभग तय हो चुका है। अब दुनिया का कोई भी देश इस नए निजाम से बच नहीं सकता। दुनिया के इस बंटवारे में मुस्लिम जगत एक महत्वपूर्ण ऐसा है। इस विश्लेषण में हमें देखना और समझना है कि मुस्लिम जगत किसके साथ जाएगा और उसका अंजाम क्या होगा।


जब बात मुस्लिम जगत की आती है, तो सबसे पहले नाम आता है सऊदी अरब, यह देश इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि तमाम इस्लामिक मान्यताओं का प्रमुख सेंटर मक्का और मदीना ही है। उसके बाद नाम आता है बेतुल मुकद्दस वह मस्जिद-ए-अक्सा, यानि फ़िलिस्तीन यरुशलम, और फिर यह सफर बाबल मिस्र इराक सीरिया और तुर्की तक जाता है।  इस विश्लेषण में मेरी कोशिश दुनिया के अभी तक किए गए विश्लेषण से अलग हटकर ऐसे पहलुओं का सही अध्ययन करना है, जिसे अक्सर मुस्लिम रहनुमाओं या कूटनीति विशेषज्ञ या फिर भविष्य की योजनाओं पर प्रतिक्रिया देने वालों से अभी तक अछूता है। यह बात तो हम सभी जानते हैं कि दुनिया में एजेंडा-2030 के तहत जो विजन डाक्यूमेंट तैयार किए गए हैं, बल्कि पूरी दुनिया में इस प्रावधन के अंदर जो धन वितरण व्यवस्था है, उसका वितरण व विस्तार पूरी दुनिया में चल रहा है। भारत पाकिस्तान सऊदी अरब सहित सभी देश इसका लाभ उठा रहे हैं और किस संधि दस्तखत कर चुके हैं, जिससे पलट जाना शायद अब इन सभी देशों के बस के बाहर है।


 एजेंडा-2030 का ही एक पाठ 17 सस्टेनेबल गोल है, और इन गोल को प्राथमिकता देकर सभी देश अपने अपने यहां लागू कर आगे बढ़ रहे हैं। आप सभी को इन 17 गोल के बारे में अध्ययन करना चाहिए, जिससे आपको यह पता चल सके कि अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का असल एजेंडा और मकसद क्या है और जो भी आपके देश में निर्माण कार्य चल रहे हैं वह किसके अंतर्गत आते हैं और यह भी के कई देशों के नेता जो राजनीतिक जुमले बोल रहे हैं वह भी इसी गोल में सेट किए गए हैं। अब हम असल मुद्दे की शुरुआत करते हैं किस न्यू वर्ल्ड ऑर्डर में सऊदी अरब का क्या होगा ? देखा जाए तो सऊदी अरब वजूद में आने के बाद 1931-32 में दमाम में अमेरिका ने पहले तेल कुए का निर्माण करता है और फिर यहां से तेल आधरित जरूरतों को समझते हुए इस टीम से चलने वाले वाहनों को रिप्लेस करने की योजना बनाकर अमेरिकी ब्रिटेन के थिंक टैंक ने काम करना शुरू किया और सऊदी अरब के साथ आर्थिक समझौते कर लिए गए, और यहीं से अरबों का उदय शुरू हुआ। इन देशों की आर्थिक स्थिति सुधरतीं चली गई और दुनिया के अमीर देश बनते चले गए और अगर हम आज बात करें सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, यूएई तो इनकी मुख्य कमाई का आधार तेल ही है, मगर तेल से कमाई गई दौलत के जरिये इन देशों ने अपने यहां तकनीक आयात की उद्योग भी लगाए और तेल के सहयोग से बनने वाले दूसरे उत्पाद भी पैदा करने शुरू किए। ऊपर से देखने पर लगता है कि यह अमीर देश अब पूर्ण संपन्न और आत्मनिर्भर हो चुके हैं मगर यह आधी सच्चाई है। पूरा सच समझने के बाद ही हमें यह समझ में आएगा कि मुस्लिम जगत न्यू वल्र्ड ऑर्डर में क्यों दो हिस्सों में बंट जाने को मजबूर हो जाएगा। कौन-कौन से देश किसके साथ जाएंगे? मुस्लिम जगत की जनता पर मनोवैज्ञानिक क्या प्रभाव पड़ेगा? अल्पसंख्यक रूप में रह रहे मुसलमानों की मानसिकता और उनके साथ हो रहे व्यवहार में क्या बदलाव आएगा और फिर इन सब देशों का अंजाम क्या होगा? इसका अगला भाग जरूर पढ़ें।
क्रमशः
~वाहिद नसीम
(लेखक विदेश मामलों के विशेष जानकार हैं)

I think all aspiring and professional writers out there will agree when I say that ‘We are never fully satisfied with our work. We always feel that we can do better and that our best piece is yet to be written’.
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6 Comments

Irfan Irfan Friday, June 2021, 09:12:06

कृपया दूसरा अंक जल्दी जारी कीजिये


Punjab Singh Punjab Singh Friday, June 2021, 09:45:51

Good job Sir and next part ka intjaar hai


अनवर हुसैन अनवर हुसैन Friday, June 2021, 11:11:44

बहुत ही शानदार वाहीद साहब आपके लेखन में जादू है दूसरे अंक का इंतजार रहेगा। बहुत बहुत शुक्रिया।


Waseem Multani Waseem Multani Friday, June 2021, 11:45:00

Shandaar analysis Wahid Sahab Thank you...


Kuldeep Singh Kuldeep Singh Saturday, June 2021, 04:26:15

बेहतरीन विश्लेषण दादा आपके अगले पार्ट का इंतजार रहेगा


Mushtaque Anwar Mushtaque Anwar Saturday, June 2021, 04:45:25

Wow great, Wahid Nasim sb.


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