विरासत को क़ायम रखकर साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल बने नवाब काज़िम अली खां

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रामपुर। साम्प्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल क़ायम करना रामपुर के शाही खानदान से सीखी जा सकती है। अब इस विरासत को आगे बढ़ाकर नवाब काज़िम अली खां 'नवेद मियां' सामाजिक रिश्तों को और ज़्यादा मज़बूत बना रहे हैं। जयपुर में पुलिस महानिरीक्षक कुंवर संदीप सिंह चौहान की बेटी की शादी में नवेद मियां मौजूदगी यही साबित करती है। रामपुर रियासत हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल रही है। यहाँ के नवाब अपनी रियासत में हिन्दू परिवारों में होने वाली बेटियों की शादी में खुद जाते थे। अंतिम शासक नवाब रज़ा अली खान तो उपहार के साथ साथ विदाई गीत भी लिखकर भेजते थे। उस गीत की कम्पोज़ीशन भी खुद बनाते थे। इससे यहाँ के लोगों के सामाजिक रिश्ते बेहद मज़बूत थे। अब न शासन रहा है और न ही रियासत, लेकिन परम्परा अब भी क़ायम है। नवाब रज़ा अली खान के पौत्र पूर्व मंत्री नवाब काज़िम अली खां 'नवेद मियां' हिन्दू मित्रों की बेटियों की शादी में विशेष रूप से शामिल होते हैं और एक पिता की भूमिका में नज़र आते हैं। ऐसा ही नज़ारा शुक्रवार को जयपुर में आईजी पुलिस कुंवर संदीप सिंह चौहान और कुंवरानी अपराजिता सिंह चौहान की बेटी कुंवरानी गृषिमा राजे की शादी में नज़र आया। इस शादी में इस राजपूत परिवार के अलावा वो एक मात्र मुस्लिम थे, जिन्होंने दोस्त की बेटी की शादी के मौके पर एक पिता की भूमिका निभाई और कन्यादान समेत सभी रस्मों में शामिल हुए। उन्होंने वर-वधु को प्रदान किया।

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