नरेंद्र-त्रिवेन्द्र काफी हैं, फिर भी जोशीमठ में वीवीआईपी का जमावड़ा

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  • नरेंद्र-त्रिवेन्द्र काफी हैं, फिर भी जोशीमठ में वीवीआईपी का जमावड़ा
  • बचाव-राहत में बाधा बन रहे:शिक्षा-उच्च शिक्षा मंत्री-सांसद-विधायक भी पहुंचे आपदा स्थल

चेतन गुरुंग

देहरादून। केंद्र और राज्य के मंत्री जोशीमठ (चमोली) में खौफनाक त्रासदी के बाद लगातार दौरे कर रहे। वे अफसरों को तलब कर उनसे हालात का जायजा ले रहे। इससे बचाव और राहत कार्यों में जुटे अफसरों को काम करने में परेशानी हो रही। उनका काफी बड़ा वक्त वीवीआईपी के साथ रहने में बर्बाद हो रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत खुद हालात पर करीबी नजर रख रहे। ऐसे में वीवीआईपी के गैर जरूरी दौरे सिर्फ स्थानीय लोगों में असंतोष उत्पन्न कर रहे। 

जोशीमठ आपदा पर प्रधानमंत्री के साथ ही गृह मंत्री अमित शाह-रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी पूरा ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा कि जोशीमठ आपदा राहत-बचाव अभियान में गैर जरूरी मंत्री-सांसद-विधायकों के दौरों पर क्यों न रोक लगा दी जाए। उनकी कोई जरूरत ही नहीं है वहाँ। 2013 की केदारनाथ आपदा में सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार के किस्से-आरोपों की पूरी कथा आज तक बाँची जाती है। भालू का काटा-कंबल से भी डरता है, से सीख ले के नरेंद्र-त्रिवेन्द्र सरकार इस बार फूँक-फूँक के लेकिन तेज कदम उठा रही हैं।

केंद्र और राज्य सरकार केदारनाथ आपदा में सरकारों को मिली बदनामी की कालिख अपने मुख पर मलना नहीं चाहती है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने जोशीमठ राहत और बचाव कार्यों में गज़ब की फुर्ती और निर्णय क्षमता का प्रदर्शन किया है। उनका बार-बार खुद ही मौके पर आपदा प्रभावितों-राहत व बचाव कर्मियों से मुलाक़ात कर उनका मनोबल बढ़ाना काबिले तारीफ है। केंद्र सरकार और पीएम से भी लगातार संपर्क कायम किए हुए हैं। केंद्र से भी पूरी मदद-सहयोग उत्तराखंड सरकार को मिल रही है। अभी तक आपदा और राहत-बचाव कार्यों को ले के सरकार को किसी किस्म के आरोप का सामना करना नहीं पड़ा है। न ही कोई खरी-खोटी सुनने को  मिली है। ये निश्चित रूप से बड़ी बात है।

केन्द्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री आरके सिंह भी जोशीमठ पहुंचे। वहाँ पूरा जायजा हर किस्म का लिया। मुख्यमंत्री और आरके के दौरे से जोशीमठ में बचाव-राहत कार्यों में मदद ही मिली है। दोनों इस हादसे से एकदम करीबी वास्ता रखते हैं। हैरानी इस बात पर है कि केंद्र और राज्य के ऐसे महकमों के मंत्री भी वहाँ पहुँच के अफसरों को मशरूफ़ रख रहे, जिनका राहत-बचाव कार्यों से कोई नाता नहीं है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक-राज्य के उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत और सांसद-विधायक भी जोशीमठ पहुँच के हालात का जायजा ले चुके हैं। अफसरों को तलब कर उनको आदेश दे रहे हैं।

इससे दो किस्म के नुक्सान हो रहे। एक-बचाव राहत कार्यों को छोड़ सभी अफसर उनके साथ घूमने को मजबूर हो रहे। उनको पूरी रिपोर्ट देने में कीमती वक्त बर्बाद कर रहे हैं। दो-उनकी व्यवस्था और शारीरिक क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ रहा। जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया हर वीवीआईपी के साथ होने को मजबूर हैं। इससे उनको कामकाज अधिक तेजी से करने में परेशानी हो रही होगी। डीजीपी अशोक कुमार भी प्रोटोकॉल के चलते वीवीआईपी के साथ खड़े होने को मजबूर हैं। इससे उन कार्यों में प्रशासन ध्यान केन्द्रित नहीं कर पा रहा, जहां करना जरूरी है। कोई ये बता के राजी नहीं है कि आखिर प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री के खुद ही मोर्चे पर डटने के बाद अन्य के लिए क्या ज़िम्मेदारी बची रह जाती है। क्यों वे जोशीमठ जा के लोगों के बचाव-राहत कार्यों में बाधा बन रहे।   

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