नरेंद्र मोदी के सात साल और उनके सात बड़े फैसले

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नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल का सात साल पूरा हो गया है लेकिन इन सात सालों में देश ने बहुत उतार चढ़ाव देखा हैं। कभी नोटबंदी की लाइन तो कभी हॉस्पिटल में ऑक्सीजन सिलेंडर ना मिलने की मार, बेड ना मिलने की मार ऊपर से कोरोना, ब्लैक फंगस जैसी महामारी ने तो मानो देश की जनता पर गर्म पानी डाल दिया हो। इसी को देखते हुए मोदी सरकार ने तय किया है की उनके सरकार का कार्यकाल 7 साल पुरे होने पर उनकी पार्टी जश्न नहीं मनाएगी। पहली बार जब नरेंद्र मोदी जीत कर प्रधानमंत्री बने थे तब लोगों को उनसे बहुत उम्मीदें थी लेकिन जब दूसरी बार पहले के मुकाबले अधिक सीटें लाकर प्रधानमंत्री बने तो उसके पीछे उनकी सरकार के द्वारा किए गए काम की उपलब्धि थी। जिसे आज बात करना जरूरी है की उनके कार्यकाल में 7 कौन कौन से बड़े फैसले थे जो जनता को प्रभावित किया जिसमे जनता ने अपनापन देखा और दोबारा नरेंद्र मोदी चुना।

जनधन योजना : मनमोहन सरकार में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के नाम से जाना जाता था लेकिन पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2014 को नाम बदलकर उसे जनधन योजना नाम देकर दोबारा लांच किया। इस योजना के जरिए देश के गरीब लोगों को जीरो रुपए में खाता खुलवाने का मौका मिला। प्रधानमंत्री मोदी का मकसद था आम लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा जाए और केंद्र और राज्य सरकार जो पैसे जारी करती है वो अफसरों के हाथ में ना जाकर सीधे आम लोगों के खाते में जाए। इस योजना की सबसे खास बात ये है की लोगों ने इसे बड़ी गंभीरता से लिया और बहुत कम ही समय में 42.37 करोड़ बैंक खाते खोले गए। पीएम मोदी के इस फैसले में गरीब लोगों को अपनापन दिखा। और कहीं ना कहीं जो पूर्व की सरकारों में इंदिरा आवास, वृद्धा पेंशन या बाकी योजनाओं के जो पैसे आते थे जिसे निचले स्तर के जिला पदाधिकारी अपने हिसाब से गांव गांव जाकर लोगों के बीच बाटँते थे और उसमे जमकर भ्रष्टाचार होता था जनधन खाते खुलवाकर कहीं ना कहीं मोदी सरकार कुछ हद तक उस भ्रष्टाचार को रोकने में कामयाब रही है

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना : मोदी सरकार के सभी बड़े योजनाओं में से एक योजना भी ये शामिल है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में 1 मई 2016 को प्रधानमंत्री ने शुरुआत की थी। इस योजना के जरिए 8 करोड़ से अधिक परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिया गया जिसमे एक सिलेंडर, एक चूल्हा एक पाइप और एक रेगुलेटर दिया जाता है। अगर हम 2014 से पूर्व में देखे तो आम लोगों को गैस सिलेंडर लेने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता था। निचले स्तर पर कालाबाजारी खूब होती थी लेकिन मौजूदा सरकार में बहुत कम या ना के बराबर दिखाई देती है। हालांकि ऐसा नहीं है की इस योजना पर सवाल नहीं हैं इस योजना में बहुत सारे सवाल ऐसे है जिसपर सरकार को स्पष्ट करना चाहिए क्योंकि कहीं ना कहीं इस योजना को लाने के पीछे का मकसद देखा जाए तो पूंजीपतियों की जेब भरना था बरहाल इस योजना में आम लोगों ने अपनापन देखा उन्हें लगा की कोई सरकार है जो हमारे बारे में सोचती है। मोदी के इस योजना ने वास्तव में गरीब लोगों को बहुत अधिक प्रभावित किया है।

किसान सम्मान निधि योजना : इस योजना की शुरुआत 1 दिसंबर 2018 को मोदी सरकार ने किया था। सरकार का उद्देश्य था देश के छोटे और सीमांत किसान को सीधे फायदा पहुंचाया जाए। बहुत ही कम समय में सरकार ने इस योजना से 9.5 करोड़ किसानों को जोड़ दिया जिसे हर साल 6000 रुपए नकद राशि किसानों के बैंक खाते में सरकार के द्वारा भेजा जाता है। हालांकि इस योजना को लेकर कई रिपोर्ट भी ऐसे सामने आए है जिसमे भ्रष्टाचार की बात कही गई है। लेकिन एक सच ये भी है की कहीं ना कहीं जमीनी स्तर पर आम लोगों को इस योजना से बहुत फायदा मिल रहा है जो आम लोगों को मोदी सरकार से जोड़ती है। इस योजना के जरिए मुफ्त में हर महीने लोगों को 500 रुपए सरकार दे रही है आप ही बताइए किसको अच्छा नहीं लगेगा ये योजना?

स्वच्छ भारत अभियान : इसको हम योजना नही मान सकते क्योंकि सफाई कौन नहीं चाहता है। साफ सुथरा कौन नहीं रहना चाहता है। कौन अपने आसपास को खूबसूरत देखना नहीं चाहता है। इसी बात का नब्ज नरेंद्र मोदी सरकार ने 2014 में पकड़ा और खुद झाड़ू उठा कर लोगों को सफाई के लिए एक संदेश दिया। गंदे लोगों को झाड़ू के जरिए शर्मिंदगी का अहसास करवाया गया और इस अभियान से जोड़ा। मोदी सरकार ने इसी मिशन के तहत प्रधानमत्री शौचालय योजना के जरिए लोगों को घरों में शौचालय बनवाने के लिए 12-12 हजार रूपए दिया। ये योजना निचले स्तर पर खास तौर से ग्रामीण इलाके को बहुत अधिक प्रभावित किया। हालांकि इस पर भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आए है लेकिन सच तो यही है की इस योजना से करोड़ों लोगों को बहुत फायदा हुआ है।

मेक इन इंडिया : इसको आप योजना भी कह सकते है या हर भारतीय का एक मिशन। क्योंकि इस नाम को देश के विकास से जोड़ा गया, देश के लोगों से जोड़ा गया, लोगों के देशभक्ति से जोड़ा गया, लोगों की भावनाओं से जोड़ा गया। इसलिए बाकी योजनाओं से इसका अधिक महत्व है क्योंकि लोग गैस कनेक्शन छोड़ सकते है। शौचालय छोड़ सकते है। नकद राशि छोड़ सकते है लेकिन कोई देशभक्ति नहीं छोड़ सकता देश के खिलाफ कोई नहीं जाना पसंद करेगा। मेक इन इंडिया के जरिए नरेंद्र मोदी ने लोगों को संदेश दिया की आप विदेशी सामान खरीदना और बनाना बंद करिए और अपने देश में उत्पाद हुए चीजों को उपयोग करिए अपने देश में उत्पाद करिये। लोगों ने इसको अपनी भावनाओं से जोड़ा। लोगों को लगा की इसके जरिए देश की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी देश का विकास होगा। हम अपने पैसे पाकिस्तान चीन को नहीं देंगे।

सर्जिकल स्ट्राइक : पाकिस्तान पर भारत की जीत भला किस भारतीय को पसंद नहीं आएगा? पाकिस्तान की करारी हार किस भारतीय को पसंद नहीं आएगा? इसी नजरिए से ही सर्जिकल स्ट्राइक देखा जाता है। 29 सितंबर 2016 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुस कर सैकड़ों आतंकवादी को मार गिराया और कई आतंकी कैंपों को तबाह कर दिया। इस स्ट्राइक से पहले 18 सितंबर 2016 को पाकिस्तान से आए आतंकियों ने हमारे 18 जवान को शहीद कर दिया था। देश गुस्से में था सरकार पर सवाल उठ रहे थे। मोदी को कमजोर प्रधानमंत्री माना जा रहा था। ये सभी को देखते हुए सर्जिकल स्ट्राइक किया गया। हालांकि विपक्ष ने कहा की इसमें सरकार ने कुछ नहीं किया सारा श्रेय सेना को मिलना चाहिए बात सही है लेकिन सरकार के आदेश के बिना कोई भी देश की सेना इतना बड़ा कदम नहीं उठाता ये भी विपक्ष को मानना पड़ेगा। इस स्ट्राइक के बाद लोगों को मोदी सरकार में मजबूत सरकार दिखने लगा, भारतीयों को लगने लगा की ये पीएम नवाज शरीफ से गले मिला सकता है अपने शपथ समारोह में उसके स्वागत के लिए कार्पेट बिछा सकता है तो उसके घर में घुस कर मारने की भी हिम्मत रखता है। इस स्ट्राइक के बाद लोगों की इस सरकार के प्रति विश्वास बढ़ गया। जो अब तक कहीं ना कहीं पाकिस्तान और चीन मुद्दे पर बरकरार दिखता है।

धारा 370 : जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाना भी बहुत बड़ा फैसला इस सरकार का रहा है धारा 370 हटाने को लेकर वर्षों से मांग होते रहा है जिसे इस सरकार ने पूरा किया। ये बेहद संवेदनशील मामला था इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने वहां के क्षेत्रीय नेताओं को कई महीनों तक नजरबंद रखा है। खासतौर से बीजेपी के जो अपने बेस वोटर है उनको ये फैसला काफी पसंद आया और उनका अपने सरकार पर विश्वास बढ़ा ऐसा ही राम मंदिर मामले में देखा गया। भले मंदिर का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया लेकिन सरकार ने इसे अपने तरीके से भुनाया जिसके वजह से हिंदू वर्ग के लोगों को लगा की मंदिर का फैसला बीजेपी सरकार में ही संभव था वर्ना दूसरी सरकार इसको हाथ भी नहीं लगाती। दूसरा पक्ष ये भी है मुस्लिम वर्ग भी ये मानते है की कहीं ना कहीं राम मंदिर का फैसला बीजेपी सरकार की देन है। सच ये भी है राममंदिर को लेकर वर्षों से बीजेपी आरएसएस ने आंदोलन भी किया है। जिसका परिणाम है जी बीजेपी आप बहुमत की सरकार में विराजमान है। 


बाकी आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं भी मोदी सरकार की देन है जो गरीब परिवार में किसी भी सदस्य की बीमारी में 5 लाख रुपए तक के खर्च को सरकार उठाती है हालांकि जमीनी स्तर पर इस योजना का अभी उतना प्रभाव नहीं दिखता या यूं कहे तो सरकार इस योजना का प्रचार प्रसार उस हिसाब से नहीं कर पाई है। जो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को समझ आए।

मोदी सरकार के कई फैसले ऐसे भी है जो विवाद में रहे है जिसका विरोध भी समय समय किया जाता रहा है। जैसे एनआरसी, CAA, कृषि कानून, नोटबंदी, जीएसटी, निजीकरण और कोरोना महामारी में गलत प्रबंधन शामिल है। इसको लेकर मोदी सरकार कहीं ना कहीं सवालों के घेरे में खड़ी है। जिसका नतीजा ये सामने आ रहा है मोदी सरकार की लोकप्रियता में लगातार गिरावट देखी जा रही है, खासतौर से उस समय देश की जनता को बड़ा झटका लगा जब देश कोरोना महामारी में लोग ऑक्सीजन के लिए दर दर भटक रहे थे उस समय पीएम मोदी बंगाल में रैली करते नजर आए।

~ दीपक राजसुमन 

I think all aspiring and professional writers out there will agree when I say that ‘We are never fully satisfied with our work. We always feel that we can do better and that our best piece is yet to be written’.
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