मुहर्रम : दुःख का महीना जिसमे नवासे ए रसूल और उनके 72 साथियो को शहीद किया गया 

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लखनऊ अभी हाल ही में मुहर्रम को लेकर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकुल गोयल ने मातमी मोहर्रम को लेकर दिशा निर्देश जारी किया है। इसके लिए एक सर्कुलर पास किया गया हैं जिसपर शिया मुस्लिम समाज ने सर्कुलर में शब्दों को लेकर आपत्ति ज़ाहिर की हैं। 

सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता व राजनैतिक विश्लेषक सैय्यद रिज़वान ज़ैदी ने सर्कुलर में इस्तेमाल किये गए कुछ शब्दों को लेकर कड़ी निंदा ज़ाहिर की हैं। ज़ैदी का कहना हैं : मुहर्रम किसी त्योहार या खुशी का महीना नहीं है, बल्कि ये महीना बेहद गम से भरा है, इतना ही नहीं दुनिया की तमाम इंसानियत के लिए ये महीना इबरत (सीखने) के लिए है। 

ज़ैदी बताते हैं, आज से लगभग 1400 साल पहले मुहर्रम के महीने में कर्बला के मैदान में नवासे ए रसूल हज़रत इमाम हुसैन अलैहिसलाम और उनके 72 साथियो को शहीद किया गया। बातिल के खिलाफ अहल-ए-बैत (नबी के खानदान) ने अपनी जान को कुर्बान कर कर इस्लाम और इंसानियत को बचाया। मुहर्रम की 7 तारीख से इमाम हुसैन, उनके घर के छोटे छोटे बच्चो और उनके साथियो का पानी बंद कर दिया गया। एक तरफ यज़ीद और उसकी फौजे थी जबकि दूसरी तरफ अपने नाना के दीन को बचाने के लिए हज़रत इमाम हुसैन, उनके घर के छोटे छोटे बच्चे और कुछ अज़ीज़ साथी थे, हज़रत इमाम हुसैन की तरफ से, तीन दिनों के भूके प्यासे 6 महीने के इमाम के बच्चे हज़रत अली असग़र 18 साल के हज़रत अली अकबर और 14 साल के उनके भतीजे हज़रत कासिम ( इमाम हसन के बेटे) को भी बड़ी बेरहमी से यज़ीद की सेना द्वार शहीद कर दिया गया लेकिन बावजूद इन सब ज़ियादतियो के इमाम हुसैन ने यज़ीद के बेयत नहीं की और इमाम हुसैन के सभी साथियो ने एक एक करके क़ुरबानी दी, आखिर में पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन को नमाज़ पढ़ते समय सजदे में ही बड़ी बेहरमी से यज़ीदीयो द्वारा शहीद कर दिया गया, उनके खेमो को आग लगा दी गई और परिवार के बचे  हुए लोगों को कैदी बना लिया गया। खानदाने रसूल को शहीद कर दिया गया। अहल-ए-बैत ने अपनी जान को कुर्बान कर इस्लाम और इंसानियत को बचाया। 

ज़ैदी बताते हैं, शिया समुदाय के लोग मुहर्रम में शोक मनाते हैं। शिया समुदाय के लोग मुहर्रम की 10 तारीख को भूखे प्यासे रहते हैं, क्योंकि इमाम हुसैन और उनके काफिले के लोगों को तीन दिनों तक भूखा प्यासा रखा गया था और भूख-प्यास की हालत में उनको शहीद किया गया था।

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