उपचुनाव में भी ममता बनर्जी का ही खेला

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  पश्चिम बंगाल में सीएम ममता बनर्जी का ही खेला चला और भाजपा को जनता ने फिर ठुकरा दिया है। ममता बनर्जी ने उपचुनाव  में 58,389 मतों से जीत हासिल की है ।

भवानीपुर से बीजेपी की प्रियंका टिबरेवाल को 26,320 वोट मिले हैं। ममता ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है क्योंकि उन्होंने भबानीपुर में अपनी पिछली जीत के मुकाबले इस बार अधिक वोट हासिल किए हैं। उन्होंने 2011 के उपचुनाव में 52,213 वोटों से और 2016 में 25,301 वोटों से जीत हासिल की थी।   

 

भबानीपुर विधानसभा क्षेत्र में 30 सितम्बर  को हुए उपचुनाव में 57 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था । इस निर्वाचन क्षेत्र से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही थीं। मुर्शिदाबाद के समसेरगंज और जांगीपुर सीटों पर क्रमशः 79.92 प्रतिशत और 77.63 प्रतिशत मतदान हुआ था।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से हार गई थीं। उनको उनके ही पुराने साथी शुभेंदु अधिकारी ने पराजित किया था। मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए ममता बनर्जी को इस उपचुनाव में जीत हासिल करनी जरूरी थी, वरना उनको मुख्य मंत्री की कुर्सी  छोड़ना पड़ती । वहीं, दो उम्मीदवारों की मौत के बाद अप्रैल में जांगीपुर और समसेरगंज में चुनाव रद्द करना पड़ा था।पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री फिरहाद बॉबी हकीम ने कहा कि भवानीपुर में जीत के बाद टीएमसी का अगला नारा होगा दिल्ली चलो। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी पश्चिम बंगाल को हिंसा के नाम पर बदनाम कर रही है।

 

   मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय बलों की चौबीस कंपनियां तैनात की गई थीं और पूरे इलाके को सीसीटीवी की निगरानी में रखा गया ।चुनाव अधिकारियों ने बताया कि मतगणना कर्मियों को सिर्फ पेन और पेपर इस्तेमाल करने की अनुमति थी। सिर्फ रिटर्निंग ऑफिसर और पर्यवेक्षक ही फोन का उपयोग कर सकते थे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी  जहां  से चुनाव लड़ रही थीं अर्थात भबानीपुर में 57.09 फीसदी मतदान हुआ था। समसेरगंज में सर्वाधिक मतदान हुआ था।  मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा। तीन निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 6,97,164 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते थे।

 

भबानीपुर सीट पर तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो बनर्जी का मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रियंका टिबरेवाल और माकपा के श्रीजीव विश्वास से था।    पश्चिम बंगाल की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे घोषित होने से पहले चुनाव आयोग ने ममता सरकार को साफ निर्देश दिए थे कि राज्य में किसी भी तरह का जीत का जश्न न मनाया जाए। चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि चुनाव बाद हिंसा रोकने के लिए भी सभी जरूरी उपाय किए जाएं।

 

चुनाव आयोग की ओर से बंगाल सरकार को लिखी गई चिट्ठी में कहा गया है कि उपचुनाव के लिए मतगणना के दौरान या नतीजे आने के बाद किसी भी तरह का जश्न न मनाया जाए। ध्यान देने की बात है कि खुद बंगाल की सीएम भवानीपुर सीट से चुनाव लडी हैं और भाजपा प्रत्याशी को  को रिकॉर्ड मतों से पराजित किया है, जिसके बाद कई जगह टीएमसी कार्यकर्ता जश्न मनाते देखे गए हैं। बीजेपी ने इस सीट से प्रियंका टिबरेवाल को ममता के खिलाफ अपना उम्मीदवार बनाया था।इसी साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राज्य में कई जगह हिंसा और आगजनी की घटनाएं सामने आई थीं, जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी चल रही है। इसी कारण चुनाव नतीजों के बाद जश्न मनाने पर रोक लगाई गयी। 

 

भबानीपुर का विधानसभा उपचुनाव इसीलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि अगर ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल का सीएम बने रहना है तो उनके लिए भवानीपुर सीट पर हो रहे उपचुनाव को जीतना जरूरी था। वह विधानसभा चुनाव में बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से नंदीग्राम सीट पर हार गई थीं। ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से दो बार चुनाव जीत चुकी हैं। भवानीपुर के अलावा बंगाल की मुर्शिदाबाद जिले के  समसेरगंज और जंगीपुर सीटों पर भी 30 सितंबर को उपचुनाव हुआ था। तीनों सीटों के नतीजे घोषित हो गये हैं। 

 

 उपचुनावों में जीत से पहले तृणमूल कांग्रेस  में कयी नेता शामिल हुए जो भाजपा में  शामिल  हो गये थे। इस प्रकार खेला तो ममता के पक्ष में चार महीने पहले ही शुरू हो चुका था। मई के मध्य से सितंबर तक मुकुल रॉय सहित कई भाजपा विधायक और पार्टी सांसद बाबुल सुप्रीयो भगवा खेमा छोड़कर ममता बनर्जी नीत पार्टी में शामिल हो चुके हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में रायगंज से भाजपा विधायक कृष्णा कल्याणी ने भी 11अक्तूबर को घोषणा की कि उन्होंने भाजपा से खुद को अलग करने का फैसला कर लिया है। उन्होंने कहा कि उनके लिए भगवा दल के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री देबाश्री चैधरी के क्षेत्र में चल रहे ‘तमाशे के साथश् आम लोगों के लिए काम करना असंभव हो गया है। वहीं, राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कल्याणी के इस बयान के बाद उन्हें पार्टी में शामिल होने का न्योता देने में देरी नहीं की। रायगंज में संवाददाताओं से बातचीत में कल्याणी ने कहा कि चैधरी ने इस साल हुए विधानसभा चुनाव में उनकी हार सुनिश्चित करने के लिए साजिश रची। उन्होंने दावा किया, ‘‘रायगंज की सांसद देबाश्री चैधरी मेरे खिलाफ लंबे समय से साजिश रच रही हैं। वह मुझे विश्वासघाती कहती हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि वह उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने रायगंज में मेरी हार सुनिश्चित करने के लिए साजिश रची क्योंकि यह उनके निजी एजेंडे में था।

 

कल्याणी ने आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों को राज्य और केंद्रीय नेतृत्व ने ‘भुलाश् दिया। उन्होंने कहा कि ‘‘इसलिए यह उचित है कि मैं स्वयं को पार्टी से अलग कर लूं. यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होता है।

 

हालांकि, विधायक ने यह खुलासा नहीं किया कि क्या उन्होंने पहले ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अपना इस्तीफा भेज दिया है या नहीं।कल्याणी ने कहा कि उनकी फिलहाल तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि ‘‘मेरी इच्छा केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र की जनता की सेवा करना है, जो भाजपा में उस व्यक्ति (चैधरी) के साथ संभव नहीं है जो यहां संगठन चला रही हैं।श् उल्लेखनीय है कि भाजपा सांसद ने दो सप्ताह पहले कल्याणी के इसी तरह के आरोप पर कहा था कि वह ‘‘ऐसी सस्ती और घटिया हमलोंश् पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहती। चौधरी ने कहा कि पार्टी की सच्ची कार्यकर्ता की तरह उन्होंने कल्याणी और अन्य पार्टी उम्मीदवारों को विधानसभा में जीताने का प्रयास किया है। बहरहाल, दीदी की सीएम वाली कुर्सी पक्की हो गयी और खेला भी चल रहा है।

~अशोक त्रिपाठी

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