मध्य प्रदेश सरकार ने महेश्वर किला होलकर राजवंश को सौंपने से किया इंकार

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इंदौर महेश्वर किला होलकर राजवंश को सौंपने से सरकार ने इंकार कर दिया है। शासन का कहना है कि मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा पांच अक्टूबर 2020 को दिया गया बिलकुल सही है। इसमें किसी संशोधन की गुंजाईश ही नहीं है। इस संबंध में अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसी स्थिति में फैसले में संशोधन के लिए प्रस्तुत रिव्यू याचिका निरस्त किए जाने योग्य है। सरकार ने यह बात होलकर राजवंश द्वारा हाई कोर्ट में प्रस्तुत रिव्यू याचिका में दिए जवाब में कही है।

गौरतलब है कि खासगी ट्रस्ट की संपत्तियों को लेकर हाई कोर्ट में दो अपीलें और एक जनहित याचिका चल रही थीं। 5 अक्टूबर 2020 को इन सभी का एक साथ निराकरण करते हुए मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने माना था कि खासगी ट्रस्ट को संपत्तियां बेचने का अधिकार नहीं था और ट्रस्ट द्वारा किए गए विक्रय व्यवहार गलत थे। कोर्ट ने शासन से यह भी कहा कि वह ट्रस्ट की संपत्तियों को अपने कब्जे में ले लें और इस बात की भी जांच करे कि ट्रस्ट ने कब-कब और किन-किन संपत्तियों को बेचा है। इस बात की भी योजना बनाए कि बेची गई संपत्तियों को वापस कैसे प्राप्त किया जा सकता है। कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने महेश्वर किला सहित देशभर में फैली खासगी ट्रस्ट की ज्यादातर संपत्तियों को अपने कब्जे में ले लिया। इस बीच ट्रस्ट, होलकर राजवंश और अन्य पक्षकार हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर 2020 के हाई कोर्ट के फैसले के अमल पर रोक लगाते हुए सभी पक्षकारों को यथास्थिति बनाए रखने को कहा, लेकिन इसके पहले ही सरकार महेश्वर किला अपने कब्जे में ले चुकी थी। वर्तमान में किला शासन के कब्जे में ही है।

इस बीच होलकर राजवंश के रिचर्ड होलकर ने हाई कोर्ट में एक रिव्यू याचिका दायर कर 5 अक्टूबर 2020 के फैसले में संशोधन की गुहार लगाई। उनका कहना है कि महेश्वर का किला खासगी ट्रस्ट की संपत्ति नहीं बल्कि होलकर राजवंश की संपत्ति है। इसे फैसले से अलग रखा जाए और राजवंश को सौंपा जाए। शासन ने इस रिव्यू याचिका में जवाब देते हुए किला राजवंश को सौंपने से इंकार कर दिया है। अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि शासन के जवाब पर राजवंश की तरफ से प्रतिउत्तर आ गया है। इसमें एक बार फिर महेश्वर किले को राजवंश की संपत्ति बताया गया है। हम इस पर दोबारा जवाब देंगे। मामले में अब चार सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

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