लखनऊ नगर निगम अवैध वसूली में अव्वल!

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राजधानी लखनऊ में सी एम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने जाने वाले रास्ते शहर के दिल की धड़कन कहे जाने वाले हजरतगंज में आज नगर निगम के कर्मचारियों ने एक ठेले पर चाय बेचकर अपना जीवन यापन चलाने वाले पर गुण्डों की तरह हमला कर उसका ठेला उठा ले गए,काऱण यह था कि कोरोना की महामारी के चलते ठेले वाले पर घर खर्च चलाने के लिए कोई कमाई तो हुई नही ऊपर से कर्ज लेकर अब मेहनत कर रहा था पर नगर निगम के कुछ गुंडों पर इसका कोई फर्क नही दिखा महीने की तय रकम नही मिलने से गरीब को कुछ और दिन का समय तक नही दिया गया,और अपनी ड्यूटी निभाई। कर्ज में डूबा चाय वाला अपनी पूंजी लुटती देख पास की बिल्डिंग कसमाण्डा हाउस के भीतर ठेले सहित घुस गया पर नगर निगम के गुडों को इससे कोई फर्क नही पड़ा,उनकी आदत जो पड़ी हुई है अवैध कमाई में मस्त रहने पर उनके अधिकारी भी सहयोग देतें हैं।ठेले को वहां से उठा कर लाद लिए अपनी गाडी में और निकल गए पर उनको अन्य दुकानें नही दिखी जो अतिक्रमण कर सड़क किनारे भीड जमा किये थी मुख्यमंत्री के मंसूबों पर पानी फेर रहे नगर निगम के यह डकैत प्रदेश के मुख्यमंत्री कोरोना से बुरी तरह प्रभावित हुए गरीबों को रोजी रोजगार के वास्ते पैसा दे रहें है ताकि किसी को बच्चों की पढ़ाई लिखाई रोज मर्रा के खर्च में कमी न रहने पाए किसी से ब्याज लेकर काम करने को परेशान न हो वहीं अभी भी कोरोना के बाद ज़िंदगी पटरी पर ठीक तरह लौट नही पाई है पिछला कर्ज इन जैसे गरीबों का अभी उतर भी नही पाया है। लेकिन नगर निगम जहाँ सिर्फ पैसा दो जिस जगह जाम लगाना हो लगाओ की नीति पर अपनी कमाई तो कर ही रही है जिसका असर अतिक्रमण के कारण शहर की गलियों तक मे जाम देखकर देखा जा सकता है नगर निगम के चलते ही जाम कभी खत्म नही होगा ,ट्रैफिक अधिकारी भी करते हैं बर्दाश्त गाडियों से टैक्स लिये जाने के बाद भी लोगों को कोई राहत नही मिलती है सड़क पर गाड़ी तो छोड़िए पैदल चलना भी काफी मुश्किल हो रहा है,कारण यही है नगर निगम बकायदा हर क्षेत्र में अपने लोग ड्यूटी पर तैनात किये रहते हैं उनके यह लोग उस क्षेत्र के दुकानदार ही वसूली कर इनको पैसा एकत्रित कर मोटी अवैध कमाई देते हैं । रोज शाम को एक कर्मचारी आकर पैसा लेकर चला जाता है फिर अगले दिन बंदरबांट में जोनल व अन्य अधिकारी की जेब गर्म की जाती है हर चौराहे पर दुकान लगाने की कीमत तय होती है मीट आदि की हर रोज एक से तीन सौ तक,चाय ठेला 50 रुपये रोज,पान मसाला 30 रुपये रोज, टैक्सी से सवारी भरने की 10 रुपिया प्रति गाड़ियों से लिये जाते हैं।जिसकी वजह से अपनी ड्यूटी कर रहे स्थानीय पुलिस व ट्रैफिक वालो से कोई नही डरता न ही कोई मान सम्मान रह गया है। ट्रैफिक और स्थानीय पुलिस का ऐसे में भीड़ भाड़ की जिम्मेदारी के खिलाफ कोप भजन का शिकार होना पड़ता है पैसा नगर निगम कमाए भरे ट्रैफिक व स्थानीय पुलिस,, जांच की जाए तो शहर के बाहर के लोगों की मिलेंगीं थोक भाव मे दुकानें शहर को स्वच्छ और साफ सुथरा रखने की जिम्मेदारी नगर निगम के हाथों में हैं पर स्वच्छता की जगह गन्दगी रखने में यह विभाग नम्बर टॉप पर है। जब कोरोना महामारी के कारण शहर में काम काज ठप हो गया था तो लखनऊ शहर की शोभा देखते बनती थी गर्व होता था हम सबको पर जैसे ही लोगों को छूट मिली पहले से भी ज्यादा भीड़ और दुकान इस कदर बढ़ चुकी है कि पैदल या इलाज के लिए इमरजेंसी गाड़ियां भी काफ़ी देर ट्रैफिक साफ होने का इंतज़ार करती है। नगर निगम ने अवैध कमाई के लालच में शहर में न जाने कहाँ कहाँ से आये लोगों को नुक्कड़ के हर चौराहों पर बसा दिया है जो दिन में तो शहर को जाम करतें ही हैं रात को भी दुकानों में भीड़ एकत्रित रहती है हर फुटपाथ पर सजी दुकानों का कोई और नही यही नगर निगम ही है जिम्मेदार नीचे बॉक्स में ((( सरकार की नजर है इस महामारी के बाद आये नए नए लोगों पर, लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए यह भी सामने आया है कि राजधानी के लोग कम, बाहरी ज्यादा अंजाम दिए है हाल की घटनाओं को। कल की यह गुंडई संकेत दे रही है कि नगर निगम चंद रुपयों की लालच में शहर को नरक निगम तो बना ही रही है बाहरी लोगों को बसाने का भी काम कर रही है सरकार की छवि को धूमिल भी कर रही है।बाहरी लोगों की बिना जॉच पड़ताल कर धंधा करवाके शासन प्रसाशन पर आँच लगने का भी काम कर रही है। जिसका खामियाजा अधिकारी तक भुगतते हैं। पंकज सिंह अपराध संवाददाता लखनऊ

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