ऐतिहासिक होगा संयुक्त किसान मोर्चा का भारत बंद

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गाजियाबाद यूपी गेट (गाजीपुर बार्डर) पर किसानों का आंदोलन जारी है। बुधवार को भी दिन भर किसान आंदोलन के मंच से संबोधन चलता रहा। आंदोलन स्थल पर किसानों का आना-जाना लगातार जारी है। होली का त्यौहार ज्यों-ज्यों नजदीक आ रहा है, गाजीपुर बार्डर पर इस त्यौहार से जुड़ी गतिवि‌धियां बढती जा रही हैं। बुधवार को किसानों ने होली के मौके पर गाए जाने वाले गीत गए और होली के रंग में सराबोर किसान इन गीतों की धुन पर थिरकते भी देखे गए। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन,  भारतीय किसान यूनियन (युवा) अध्यक्ष गौरव टिकैत समेत तमाम लोग मौजूद रहे। बुधवार दोपहर संघर्ष मोर्चा की ओर से किसानों ने एक प्रेसवर्ता आयोजित कर 26 मार्च को प्रस्तावित भारत की जानकारी भी मीडिया से शेयर की।

प्रेसवार्ता में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन ने कहा कि 26 मार्च का भारत बंद पूरी तरह सफल होगा। इस बंद में किसानों के अलावा व्यापारी संगठनों, ट्रेड यूनियनों, ट्रक यूनियनों, बस यूनियनों और रेलवे यूनियनों का भी समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि गाजीपुर बार्डर पर दिल्ली से गाजियाबाद की ओर जाने वाली लेन, जो कुछ दिनों पहले तक दिल्ली पुलिस ने बंद की हुई थी, 26 मार्च को सुबह छह बजे से सायं छह बजे तक किसान इसे बंद रखेंगे। एंबुलेंस, स्कूली वाहन, सेना के वाहन, विदेशी पर्यटकों के वाहन और फूड सप्लाई और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहन नहीं रोके जाएंगे। जादौन ने कहा यह भारत बंद भारत के उन आम नागरिकों का है जो दो रोटी खाते हैं। उन्होंने चुटकी भी ली क‌ि छह सौ रूपए की रोटी खाने वालों को इस बंद में सहयोग करने की जरूरत नहीं है। जादौन ने कहा कि किसान आंदोलन देश के हर आम नागरिक का आंदोलन है, क्योंकि सरकार जो तीन नए कृषि कानून लेकर आई है उनका असर हर आम नागरिक पर पड़ेगा। सरकार इन कानूनों के जरिए अनाज को पूंजीपतियों के गोदामों में बंद कराना चाहती है और उस स्थिति में पूंजीपति देशवासियों की भूख पर व्यापार करेंगे। 


किसान नेता डीपी सिंह ने कहा कि भारत बंद में हमें सभी वर्गों का समर्थन मिल रहा है। 26 तारीख का बंद एतिहासिक होगा। देश भर की बड़ी ट्रेड यूनियनें और इस सरकार से पीड़ित कर्मचारी और व्यापारी सब इस बंद को सफल बनाएंगे।किसान नेताओं ने 26 मार्च को स्थानीय लोगों बंद से होने वाली परेशानी के लिए क्षमा मांगते हुए सहयोग की अपील की है। उनका कहना था कि आने वाली जिन समस्याओं के लिए हम आंदोलन कर रहे हैं उनके सामने एक दिन की पेरशानी बहुत कम है। किसान नेता आशीष मित्तल ने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम में सरकार ने जब संसोधन किया तो राज्यसभा में इसका विरोध भी हुआ था लेकिन सरकार ने उसे दबा दिया। उन्होंने कहा कि सरकार यह कह रही है कि देश में खाना बहुत ज्यादा है, जबकि स्थिति इसके उलट है, देश में भूख भी बहुत ज्यादा है। सरकारी आंकड़े ही देश में कुपोषण की तस्वीर बयां करते हैं।


गाजीपुर बार्डर आंदोलन समिति के सदस्य जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि 26 मार्च का बंद पूरी तरह से स्वभाविक बंद होगा। कहीं किसी को कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी। व्यापारी स्वभाविक रूप से अपने प्रतिष्टान बंद रखेंगे और बस व ट्रक यूनियनें भी खुद से बंद में सहयोग करेंगे। छोटे शहरों में पल्लेदार और सफाई मजदूर यूनियनों का भी समर्थन है। संयुक्त मोर्चा के आव्हान पर यातायात के साधन बंद रखे जाएंगे। अधिकतर संगठनों का इस बंद को समर्थन है।   

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