यदि राजनीति में धार्मिकता वहां विकास नहीं अंधकार

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राजनीतिक सभाओं में धार्मिक नारों का क्या काम नारे लगाने का काम जनता अपनी अपनी धार्मिक सभाओं में वखूबी कर सकती है।धर्म एक आस्था है राजनीति नहीं। धर्म की आड़ लेकर राजनीति करने वाले नेता कभी विकास नहीं कर सकते। उन नेताओं का समर्थन करिये जो सभाओं में रोटी,कपड़ा, रोजगार,शिक्षा, स्वास्थ, आर्थिक विकास की बात करे ।संवेधानिक और सरकारी दफ्तर में कोई धर्म स्थल नहीं होना चाहिए


औवेसी साहब की राजनीतिक सभाओं में लगने वाले धार्मिक नारों और बीजेपी पार्टी की राजनीतिक सभाओं में लगने वाले धार्मिक नारों और किसी भी नेता और पार्टी की राजनीतिक सभाओं में लगने वाले धार्मिक नारे और धार्मिक कटृरवादी सोंच पैदा करने वाले भाषण संविधान की प्रस्तावना के प्रथम वाक्य"हम भारत के लोग"के खिलाफ है।माननीय सर्वोच्च न्यायालय को इस पर स्वत: संज्ञान लेना चाहिए।राजनीति धार्मिकता से स्वच्छ होनी चाहिए। राजनीति में धार्मिकता नहीं होनी चाहिए।

 

राजनीतिक सभाओं में धार्मिक नारों और धार्मिक कटृरवादी सोंच पैदा करने वाले भाषणों पर प्रतिबंध लगना चाहिए।भारतीय संविधान निर्माताओं ने भारत के संविधान की शुरुआत किसी धर्म के शब्द,प्रार्थना अथवा ईश्वर के किसी श्लॉक से नहीं की क्योंकि वो जानते थे कि भारत में सभी धर्मों के लोग रहते हैं, यदि संविधान में ऐसा किया गया तो देश में विकास सम्भव नहीं हो पायेगा और देश अंधकार में चला जायेगा और कट्टरवादी सोच के नेता मासूम जनता की सोंच पर कब्जा कर लेंगे। इसलिए उन्होंने संविधान की शुरुआत"हम भारत के लोग"श्लोक से की।क्योंकि संविधान का निर्माण हम लोगों के विकास, खुशहाली, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक, कमजोर, गरीब, पिछड़ो का हक़ जैसी तमाम व्यावस्थाओं के लिए बनाया गया है जिससे हम भारत के लोगों का जीवन शांति और एकता के साथ सुचारू रूप से चल सके और हमारे अंदर एक दूसरे के प्रति कट्टरवादी और घृणित सोंच न पनप सके।और भारतीय संविधान में सभी लोगों को अपने धर्म के अनुसार, इबादत या प्रार्थना करने और उसका प्रचार प्रसार करने की स्वातंत्रता है।जिसकी जिसमें आस्था हो वो उसी की इबादत या पूजा करे।वो आपकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता है और भारत का संविधान हर किसी को व्यक्तिगत स्वातंत्रता का अधिकार देता है।जहां राजनीती में धार्मिकता हो तो वहां विकास होना सम्भव नहीं है और ये सब आपकी आंखों के सामने हैं।आप देख रहे हैं हमारे देश में क्या हो रहा है कुछ समय से हमारा देश किस दौर से गुज़र रहा है।जहां राजनीति में धार्मिकता को लाकर खड़ा कर दिया गया है।अब ये भी समझ लीजिए इबादत या पूजा दिखावा न हो आपकी जिसमें आस्था हो उसको सच्चे मन से याद करो।अगर आपको मंदिर जाना है या मस्जिद या जिस धार्मिक स्थल में आपकी आस्था हो वहां जाओ सच्चे मन से इबादत या पूजा करो दिखावा नहीं होना चाहिए। नेता अगर किसी धर्म स्थल पर जाते हैं तो पीछे पीछे मीडिया का केमरा और एंकर दहाड़े मार मार कर देखो फला नेता मंदिर में गया फला नेता दरगाह पर गया ये देखो वो नेता कितना सेकुलर है और वो कितना कटृरवादी है। और आपको यही पता नहीं वो नेता इवादत और पूजा के दिखावे की आड़ में अपने ग़लत कामो पर पर्दा डाल रहा है और आपको बेवकूफ बना कर अपनी सियासत को चमका रहा है।

 

आज की मीडिया ये नहीं दिखाती के इन नेताओं ने अपने क्षेत्र में कितना विकास कराया जनता की परेशानियों और मुद्दों को कितना विधानसभा और संसद में उठाया जनता ने अपना प्रतिनिधित्व नेता जी को अपनी समस्यायों को हल करने और क्षेत्र का विकास करने के लिए दिया है या ये दिखाने के लिए दिया है कि नेता जी कितने धार्मिक हैं और कितने सेकुलर? और ऐसा नेता न जनता का हो सकता है और न धर्म का।और आप देख रहे हैं धार्मिकता की आड़ में आपका ध्यान देश की तरक्की और विकास से हटा दिया गया है।

 

देश में अब शिक्षा, रोज़गार,स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति देश के विकास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा नहीं होती। दिन रात मीडिया का चीखना चिल्लाना दो हिंदू और दो मुस्लिम प्रवक्ताओं को चेनल पर बैठाया और धार्मिक तुष्टिकरण डिबेटे चालूं। मीडिया ने सूचनाएं देना बंद कर दिया है।आपकी आंखों पर अब धार्मिकता का चश्मा लगा कर आपको धार्मिक कट्टरवाद की सौंच में धकेला जा रहा है जिससे आप सिर्फ इनकी जुगलबंदी में उलझे रहैं।अधिकतर कटृरवादी सोंच के नेता जनता को यही दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि आपका धर्म खतरे में है लेकिन धर्म कभी किसी का खतरे में नहीं रहा है वल्की नेताओं ने आपकी सोंच को कट्टरवादी बनाके आपको ख़तरे में डाल दिया है जिससे इनकी गंदी राजनीति की दुकान चलती रहे। और यही नेता आपको और हमें धर्म का नारा धर्म का झंडा देकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए हमसे पत्थर फिकवायेंगे और अपने बच्चों को बिदेशो में पढ़ायेंगे।और आप देख रहे हैं देश के हालात किया है। देश की आर्थिक स्थिति क्या है? कितना रोजगार है?वाकि आप देख रहे हैं देश किस और जा रहा है। 
मो राशिद अल्वी
    (युवा छात्र व सोशल एक्टिविस्ट)

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