मैं एक ऐसे गांव से हूं जहां आज भी कोई सहूलियत नहीं

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नई दिल्ली तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने एक टेस्ट क्रिकेटर के रूप में मिली सफलता का श्रेय अपने पिता और अपने भाई को दिया है। शमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा ज़िले के एक गांव सहसपुर अली नगर के रहने वाले हैं और उनका कहना है कि यह उनके परिवार का प्रोत्साहन था, जिसके कारण वह क्रिकेट में आगे बढ़ सके और अंततः 200 टेस्ट विकेट लेने वाले केवल पांचवें भारतीय तेज़ गेंदबाज़ बन गए। उन्होंने सेंचुरियन टेस्ट के तीसरे दिन यह उपलब्धि हासिल की, दक्षिण अफ़्रीका की पहली पारी में पांच विकेट लेते हुए शमी इस मुक़ाम तक पहुंचे। शमी ने 44 रन देकर 5 विकेट लिए और इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय टीम को 130 रनों की बढ़त प्राप्त हुई।


शमी ने मंगलवार को तीसरे दिन के खेल के बाद प्रेस कांफ़्रेंस में कहा, "मैंने कई बार मीडिया में कहा है कि मैं अपनी सफलता के लिए अपने पिता को श्रेय देना चाहता हूं। मैं एक ऐसे गांव से आता हूँ जहां आज भी कोई सुविधा नहीं है। खेलने के लिए मेरे पिता मुझे वहां से 30 किमी की यात्रा करने के लिए बार-बार प्रेरित करते थे, और कभी-कभी मेरे साथ भी जाते थे। वह हर संघर्ष में मेरे साथ रहे। मैं हमेशा अपने पिता और भाई को श्रेय देता हूं जिन्होंने मेरा समर्थन किया। और उन परिस्थितियों और उस स्थिति में खेलने में मेरी मदद की। अगर मैं आज यहां हूं, तो इसका श्रेय उन्हें जाता है।"

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