सोनिया से मुलाकात को हरीश रावत दिल्ली रवाना

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  • सोनिया से मुलाकात को हरीश रावत दिल्ली रवाना
  • प्रदेश कांग्रेस में मची हलचल, 
  • कृषि कानून पर होने वाली चर्चा में करेंगे प्रतिभाग
  • अलोकतांत्रिक सरकार को लोकतांत्रिक काम करना सिखाना होगाः हरदा


शाह टाइम्स संवाददाता
देहरादून।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत दिल्ली में कृषि कानूनों को लेकर होने वाली बैठक में हिस्सा लेने रवाना हो गये है। शुक्रवार को हरदा ने माल्टा पार्टी दी, पार्टी खत्म होने से पहले ही हरीश रावत अचानक दिल्ली के लिये रवाना हुए तो पार्टी में हलचल मच गई। पार्टी हाईकमान ने कृषि कानूनों को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई है। बैठक में शिरकत करने के लिये दिल्ली रवाना होने से पहले हरीश रावत ने एक तरफ केंद्र सरकार पर कृषि कानून को लेकर किसानों के साथ ज्यादती करने का आरोप लगाया है तो वहीं, उन्होंने मोदी सरकार को कड़ा सबक सिखाने की भी बात कही है। इसी को लेकर हरीश रावत शनिवार को पार्टी हाईकमान के साथ होने वाली बैठक में हिस्सा लेंगे। बैठक में कृषि कानून पर आगे किस तरह केंद्र की घेराबंदी होनी है, इस पर निर्णय लिया जाना है। 


उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार पर विभिन्न मुद्दों को लेकर हमलावर हैं। किसानों के विरोध को देखते हुए हरदा कृषि कानून पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं तो वहीं, दूसरी तरफ विधानसभा सत्र की समय सीमा बढ़ाए जाने को लेकर भी अपने विधायकों को सलाह देते नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि हरीश रावत कृषि कानून को लेकर आने वाली रणनीति पर चर्चा के लिए दिल्ली रवाना हुए हैं, जहां वे कल सोनिया गांधी से मुलाकात कर कृषि कानूनों पर मोदी सरकार को घेरने की रणनीति पर काम करेंगे। 


हरीश रावत पार्टी के अहम पद पर हैं और उत्तराखंड में विधानसभा के सदस्य ना होने के बावजूद भी सदन में होने वाली कार्यवाही को लेकर अपने विधायकों का नेतृत्व करते हुए दिखाई देते रहे हैं। हालांकि, यह नेतृत्व सदन के बाहर से ही सरकार को घेराबंदी से जुड़े सुझाव के जरिए हरीश रावत करते हैं। हरीश रावत ने विधानसभा सत्र की समय सीमा कम होने को लेकर त्रिवेंद्र सरकार की घेराबंदी के लिए अपने विधायकों को एक और सलाह दी है। हरीश रावत ने कहा कि 3 दिन का विधानसभा सत्र बेहद कम समय है और इसका समय बढ़ाया ही जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो हमारे विधायकों को सदन में सदन खत्म होने के बावजूद भी मौजूद रहकर अपना विरोध दर्ज कराना चाहिए।

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