गुरु पूर्णिमा : गुरुजनों के लिए एक विशेष दिन

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गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।

बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।।

अर्थ : गुरू और गोबिंद (भगवान) एक साथ खड़े हों तो किसे प्रणाम करना चाहिए – गुरू को अथवा गोबिन्द को, ऐसी स्थिति में गुरू के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है जिनके कृपा रूपी प्रसाद से गोविन्द का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

आज 24 जुलाई को देशभर में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को होता है। आज के दिन लोग मंदिरों में देवों के गुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। वेदों का ज्ञान देने वाले और पुराणों के रचनाकार महर्षि वेद व्यास जी का जन्मदिन इस तिथि को ही पड़ता है। मानव जाति के कल्याण और ज्ञान के लिए उनके योगदान को देखते हुए उनकी जयंती को गुरु पूर्णिमा के रुप में मनाते हैं। गुरु पूर्णिमा को व्यास जयंंती के नाम से भी जाना जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुजनों की पूजा की जाती है, जीवन को एक नई दिशा देने के लिए उनका आभार प्रकट करते हैं और उनके स्वस्थ एवं सुखद जीवन की कामना करते हैं। 

~सैयद रिज़वान ज़ैदी

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