अशासकीय स्कूलों को जारी रहेगा सरकारी अनुदान::मीनाक्षी सुंदरम 

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  • अशासकीय स्कूलों को जारी रहेगा सरकारी अनुदान::मीनाक्षी सुंदरम 
  • सीएम ने नामंज़ूर किया बंद करने का प्रस्ताव
  • अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों-कर्मचारियों में थी घबराहट
  • 65 स्कूलों को बंद करने का था पिछली हरीश रावत सरकार फैसला

चेतन गुरुंग

देहरादून। उत्तराखंड के सभी अशासकीय स्कूलों को सरकारी अनुदान मिलता रहेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अनुदान खत्म करने के प्रस्ताव को नामंज़ूर कर दिया है। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने `शाह टाइम्स से कहा-`सरकारी अनुदान बंद करने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने ठुकरा दिया है। उन्होंने सभी स्कूलों की तनख्वाह भी जारी करा दी है

राज्य के 65 अशासकीय स्कूलों को बंद करने के प्रस्ताव की फ़ाइल चल रही थी। शासन सूत्रों के मुताबिक ये फैसला मौजूदा सरकार का नहीं था। पिछली हरीश रावत सरकार ने जाते-जाते इस फैसले की फ़ाइल चलाई थी। इस सरकार में ये फ़ाइल दबी रही। फ़ाइल की जानकारी बाहर आने के बाद से ही अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों-कर्मचारियों में बवाल शुरू हुआ। इन दिनों वे आए दिन धरना-प्रदर्शन-नारेबाजी कर रहे हैं। प्रस्ताव लागू हो जाता तो अशासकीय स्कूलों की बंदी तय थी। शिक्षकों-कर्मचारियों की तनख्वाह देना बिना सरकारी अनुदान के प्रबंधन के लिए नामुमकिन है।

हरीश सरकार ने उन स्कूलों को बंद करने का फैसला मुख्य रूप से किया था, जहां बच्चे बहुत कम थे। इसके साथ ही स्कूलों को अनुदान बंद करने के कई मानकों को बहुत शिथिल कर दिया था। इसकी जद में राज्य के 65 स्कूल आए थे। इस प्रस्ताव की भनक लाग्ने पर उन अशासकीय स्कूलों के शिक्षक-कर्मचारियों में भी उबाल आया हुआ है, जिनको अनुदान बंद करने का फैसला नहीं हुआ है। उनको आशंका है कि भविष्य में मानकों को शिथिल कर उनको भी इस फैसले के दायरे में सरकार ला सकती है।

विधानसभा चुनाव के लिए सवा साल भी नहीं रह गया है। इस किस्म के फैसलों पर मुहर लगाना किसी भी सरकार के लिए हाराकिरी से कम नहीं होता है। ऐसे में त्रिवेन्द्र सरकार का इस प्रस्ताव को फिलहाल नामंज़ूर किया जाना सियासी नजरिए से भी उनको और बीजेपी को फायदा पहुंचाएगा। मुमकिन है कि विधानसभा चुनाव को ध्यान में रख के ही सरकार ने प्रस्ताव रद्द किया हो। इस प्रस्ताव के चलते वित्त मंत्रालय ने सभी स्कूलों का बजट रोका हुआ था। इसके चलते तनख्वाह तक जारी नहीं हो पा रहे थे।

शिक्षा सचिव मीनाक्षी सुंदरम ने कहा, `ये सच है कि अनुदान बंद करने की फ़ाइल चल रही थी। मुख्यमंत्री ने अशासकीय स्कूलों को अनुदान बंद करने के इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया है। साथ ही उनका बजट जारी करने के निर्देश भी दिए। अब सभी स्कूलों के शिक्षकों-कर्मचारियों को तनख्वाह दे दी गई है। अशासकीय स्कूलों को अनुदान बंद करने का कोई फैसला अब विचाराधीन नहीं है

सरकार के इस फैसले से अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों-कर्मचारियों को निश्चित तौर पर राहत मिलेगी। ये ताज्जुब की बात है कि सियासी नजरिए से इतने अहम फैसले के बारे में टीम मुख्यमंत्री और बीजेपी की तरफ से कोई सफाई या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया। न ही वे लोगों को ये समझा या बता पाए कि ये फैसला मूल रूप से उनका नहीं बल्कि पिछली काँग्रेस सरकार का था। टीम त्रिवेन्द्र पर इस तरह की अंगुली लगातार उठती रही है।    

 

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