राजनीति के धर्म का पालन करें “ममता” तो बेहतर होगा

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अभी दो दिन पहले रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी रचना ‘रश्मिरथी’ का एक अंश पढ़ रहा था जिसमें अपने रथ के पहिए को निकालते समय कर्ण का अर्जुन ने बध किया। कर्ण ने धर्म का सवाल उठाया तो भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया कि धर्म का पालन कौन कर रहा है? यह प्रश्न पश्चिम बंगाल की राजनीति को देखकर भी उठता है। कभी प्रशासनिक अधिकारी के पैर केन्द्र और राज्य की सरकार अपनी, अपनी तरफ खींचती हैं तो कभी राहत सामग्री लेने पर चोरी का आरोप लगाया जाता है। नंदीग्राम से ममता बनर्जी को चुनाव में पराजित करने वाले शुभेन्दु अधिकारी और उनके भाई पर चोरी का आरोप लगाया गया है। इस मामले मंे एक व्यक्ति की गिरफ्तारी भी हुई है। कवि डा। कुमार विश्वास ठीक ही कहते हैं कि धर्म की राजनीति नहीं होनी चाहिए लेकिन राजनीति का धर्म जरूर होना चाहिए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में बहुत बड़ी जंग जीती है, इसलिए राजनीति के धर्म का पालन करें तो बेहतर होगा।


पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव के बाद से सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सियासी तनातनी बरकरार है। यास तूफान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में सीएम ममता बनर्जी और बंगाल के तत्कालीन मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय 30 मिनट की देरी से पहुंचे थे। बीजेपी विधायक शुभेंदु अधिकारी ने न केवल इसकी आलोचना की थी बल्कि ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा था कि गैर विधायक सीएम ने पीएम का अपमान किया है। उधर, ममता बनर्जी ने उस समीक्षा बैठक में शुभेंदु अधिकारी के शामिल होने पर सवाल उठाया था और पूछा था कि एक विधायक को इसकी इजाजत क्यों दी गई? बीजेपी ने ममता के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा था कि शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता और विरोधी दल का नेता चुना गया है। इस हैसियत से वह पीएम के साथ मीटिंग में थे। पीएम की मीटिंग में देरी से पहुंचने पर ममता ने जब सफाई दी तो शुभेंदु ने उस पर भी पलटवार किया और कहा कि ममता झूठ बोल रही हैं। इसी विवाद में केंद्र ने मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय की प्रतिनियुक्ति केंद्र सरकार में कर दी। ममता ने जहां इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया, वहीं शुभेंदु ने इसे रूटीन की कार्रवाई बताया।
इसी बीच, 1 जून को शुभेंदु अधिकारी, उनके भाई सौमेंदु अधिकारी और उनके नजदीकियों पर राहत सामग्री चोरी करने का केस दर्ज कर लिया गया। यह केस पूर्वी मिदनापुर के कांठी थाना में दर्ज किया गया है। कांठी नगर पालिका के प्रशासक मंडल के सदस्य रत्नदीप मन्ना ने पुलिस को लिखित शिकायत में आरोप लगाया कि 29 मई को हिमांशु मन्ना और प्रताप डे ने कोंटाई नगर पालिका के आधिकारिक गोदाम से तिरपाल का एक ट्रक लूट लिया, जिसकी अनुमानित लागत करीब एक लाख रुपये है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि टीएमसी से बीजेपी नेता बने शुभेंदु अधिकारी और सौमेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राहत सामग्री की चोरी आपराधिक साजिश का परिणाम था।


 शिकायतकर्ता ने आगे कहा कि कथित चोरी को केंद्रीय सशस्त्र बलों की मदद से अंजाम दिया गया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि सूचना मिलने पर जब शिकायतकर्ता नगर पालिका के अन्य सदस्यों के साथ गोदाम की जांच करने गए तो उनका सामना हिमांशु मन्ना से हुआ। पूछने पर उन्होंने बताया कि शुभेंदु अधिकारी और सौमेंदु अधिकारी के निर्देशानुसार तिरपाल लिए गए हैं। रत्नदीप मन्ना की शिकायत पर शुभेंदु अधिकारी, सौमेंदु अधिकारी, हिमांशु मन्ना और प्रताप डे के खिलाफ कांठी थाना में 1 जून को आईपीसी की धारा 448,379,409,120बी और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत केस दर्ज किया गया है।
भारतीय जनता पार्टी के नेता शुभेन्दु अधिकारी और उनके भाई सौमेंदु अधिकारी के खिलाफ कांथी नगर पालिका कार्यालय से कथित तौर पर राहत सामग्री चोरी करने के आरोप में प्राथमिकी राजनीतिक रूप ले लिया है। पुलिस के अनुसार कांठी नगर प्रशासनिक बोर्ड के सदस्य रत्नदीप मन्ना की शिकायत पर अधिकारी बंधुओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार शुभेन्दु अधिकारी एवं उनके भाई एवं कांठी नगर पालिका के पूर्व नगर प्रमुख सौमेंदु अधिकारी के निर्देशानुसार शासकीय त्रिपाल जिसका अनुमानित मूल्य लगभग लाख रुपए है, उसको नगर पालिका कार्यालय का गोदाम का ताला अवैध रूप से खोलकर जबरदस्ती छीन लिया गया। कांथी पुलिस स्टेशन में मन्ना द्वारा प्रस्तुत शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि भाजपा नेताओं ने कथित चोरी में सशस्त्र केंद्रीय बलों का इस्तेमाल किया है। कोलकाता पुलिस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेन्दु अधिकारी के करीबी राखल बेरा को गिरफ्तार कर लिया है। बेरा को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। शुभेन्दु के करीबी की गिरफ्तारी ऐसे वक्त हुई है, जब पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार के बीच विधानसभा चुनाव के बाद विभिन्न मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। बेरा पर 2019 के दौरान सिंचाईं एवं जलमार्ग मंत्रालय में नौकरी दिलाने के फर्जी वादा करके लोगों को धोखा देने का आरोप है। ऐसी शिकायत मिलने के बाद कोलकाता पुलिस ने जांच के दौरान उनकी गिरफ्तारी की है।


बहरहाल, बेरा की गिरफ्तारी बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद से गरमाई सियासत में नया तूफान ला सकती है। शुभेन्दु अधिकारी या भाजपा के किसी अन्य बड़े नेता ने इस घटनाक्रम पर अभी कुछ नहीं कहा है। शुभेन्दु अधिकारी ने ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रतिष्ठापूर्ण नंदीग्राम सीट से हरा दिया था। हालांकि चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बड़ी जीत हासिल हुई। इससे पहले चक्रवाती तूफान यास को लेकर बुलाई गई समीक्षा बैठक के दौरान ने विवाद का रूप लिया था। माना जाता है कि बैठक में नेता विपक्ष शुभेन्दु अधिकारी को बुलाए जाने से ममता बनर्जी खुश नहीं थीं। लिहाजा वो और तत्कालीन मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय समीक्षा बैठक में शामिल नहीं हुए थे। ममता बनर्जी ने कहा था कि उन्हें पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में जाना था, लिहाजा वो पीएम मोदी से अनुमति लेकर ही वहां से रवाना हुईं। हालांकि केंद्र सरकार के सूत्रों ने ऐसी किसी मंजूरी से इनकार किया था। बंदोपाध्याय को बैठक में न आने को लेकर केंद्र ने वापस दिल्ली आने का फरमान भी सुना दिया था, हालांकि उन्होंने ऐसा करने की बजाय पद से इस्तीफा दे दिया। ममता बनर्जी ने बंदोपाध्याय को तीन साल के लिए अपना निजी सलाहकार नियुक्त किया है। अब यह तो जनता ही तय करेगी कि राजनीति के धर्म का पालन कौन कर रहा है। 
~अशोक त्रिपाठी

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