चुनावी बरसात: कोरोना काल के दौरान दर्ज मुक़दमे वापिस होंगे तीन लाख मुकदमे, किसानों को बर्बाद फसल का मुआवजा

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लखनऊचुनावी मौसम में सरकारें लोक लुभावने वाली घोषणाएँ कर जनता का ध्यान बढ़ती महंगाई से हटाने का ज़रिया भी माना जा सकता है क्योंकि जनता सरकारों के द्वारा प्रायोजित महंगाई की मार से त्रस्त हैं लेकिन सरकारें बेलगाम महंगाई को नियंत्रित करती दिखाई नहीं दे रही हैं पूरा विपक्ष जनता को महंगाई की मार से बचाने के लिए शोर मचा रहा है लेकिन सरकार जनता और विपक्ष की आवाज़ को दबाने में लगी हुई है।

ख़ैर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेश के लोगों को मंगलवार को दो बड़ी राहतें दीं। एक तो आम आदमी पर कोरोना काल में दर्ज हुए तीन लाख से ज्यादा मुकदमों की वापसी का आदेश जारी कर दिया दूसरी ओर बेमौसम बरसात और बाढ़ से बर्बाद फसलों का 90 हजार से ज्यादा किसानों को 35 जिलों में मुआवजा देने के लिए 30.54 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है।

 

योगी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कोरोना काल में आम लोगों पर दर्ज लाखों अपराधिक मुकदमे वापस लेने का निर्णय लिया है। इससे संबंधित आदेश न्याय विभाग ने मंगलवार को जारी कर दिया। वर्तमान या पूर्व सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य इस दायरे से बाहर रखे गए हैं। इनके मामले में हाईकोर्ट की अनुमति से ही अलग से विचार किया जाएगा।


कानून मंत्री बृजेश पाठक ने बताया कि कोविड -19 प्रोटोकाल व लाकडाउन के उल्लंघन में दर्ज मुकदमें वापस लेने के लिए सभी जिला मजिस्ट्रेट से लिखित रूप से कहा गया है। अब अदालत में दर्ज हो चुके ऐसे मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस बीच न्याय विभाग के प्रमुख सचिव प्रमोद कुमार श्रीवास्तव द्वितीय द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005,महामारी अधिनियम 1897 व आईपीसी की धारा 188 आदि में प्रदेश भर में तीन लाख से अधिक दर्ज मुकदमे, जिनमें आरोप पत्र दाखिल हो चुका है, वापस लेने की कार्यवाही शुरू की जाए।असल में इस मामले में सरकार को यह कार्यवाही तीन महीने में पूरी कर अमल रिपोर्ट इलाहाबाद उच्च न्यायालय को देनी है।

 

अगर इस तरह के मुकदमे वापस नहीं लिए जाएंगे तो संबंधित व्यक्ति को अदालत अधिकतम दो साल की सजा देने व साथ ही जुर्माना लगाने का प्रावधान है।गृह मंत्रालय ने दी थी सलाह-केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने राज्यों को सलाह दी थी कि कोविड-19 प्रोटोकाल के उल्लंघन के मामलों की समीक्षा की जाए, जिससे सामान्य नागरिकों को अनावश्यक अदालती कार्यवाही, न्यायालयों में लंबित फौजदारी के मामलों को रोकने और नागरिकों को फौजदारी प्रक्रिया की कार्यवाही से बचाया जा सके। इस क्रम में गृह मंत्रालय ने इस तरह के अपराधिक मामलों की  समीक्षा कर मुकदमे वापस लेने के संबंध में विचार करने को कहा गया।किसानों के ज़ख़्मों पर भी मरहम लगाने का प्रयास किया गया है जो काफ़ी नहीं हैं क्योंकि किसान पिछले लगभग एक साल से मोदी सरकार द्वारा तीन काले क़ानून को रद्द करने की माँग को लेकर आंदोलनरत हैं लेकिन सरकार उनको रद्द करने को तैयार नहीं हैं किसानों का कहना है कि यह क़ानून किसानों को गुलाम बनाने के लिए बनाए गए हैं जिसे हम स्वीकार नहीं करेंगे। उसी के चलते योगी सरकार ने 90 हजार किसानों को दिया जाएगा मुआवजा-राज्य सरकार बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों की भरपाई के लिए 35 जिलों के 90950 किसानों को कृषि निवेश अनुदान के तहत राहत सहायता प्रदान करेगी। इसके लिए इन जिलों को 30 करोड़ 54 लाख 16,203 रुपये जारी कर दिया गया है।

 

अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने मंगलवार को इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है।अब सवाल उठता है कि क्या किसानों के आंदोलन को इतने भर से कम किया जा सकता है और किसानों में पनप रहे आक्रोश को इस तरह के चुनावी टोटकों से कम किया जा सकता है।

~शाह टाइम्स ब्यूरो

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