अस्सी और बीस फीसदी की लड़ाई

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जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरति देखी तिन तैसी

 यह हकीकत गोस्वामी तुलसीदास ने राम चरित मानस में दिखाई है। भावना के अनुरूप ही हम मतलब निकाल  लेते हैं। दरअसल, गत 10 जनवरी को एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में योगी ने कहा कि ये लड़ाई अब 80 और 20 की हो चुकी है, जो लोग सुशासन और विकास का साथ देते हैं वो 80 फीसदी भाजपा के साथ हैं और जो लोग किसान विरोधी हैं, विकास विरोधी है, गुंडों, माफियाओं का साथ देते हैं वो 20 फीसदी विपक्ष के साथ । बात सीधी थी लेकिन  विपक्षी दलों  के नेताओं ने इसके अपनी भाजपा के प्रति भावना के अनुरूप अर्थ निकाल लिया। कांग्रेस नेता दिग्विजय और अन्य इसे चुनाव  आचार संहिता का उल्लंघन बताने लगे । भाजपा के नेता अपनी केन्द्र सरकार को लेकर पांच बनाम पचास का उदाहरण देते रहते हैं। इसी तर्ज पर मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने  भी कहा कि यह चुनाव 80 बनाम 20 प्रतिशत का है। हमारे साथ 80 प्रतिशत हैं और जो 20 प्रतिशत  विपक्ष  के साथ हैं, वो अपराधियों, भ्रष्टाचार  व माफियाओं के साथ हैं। मुख्यमंत्री  योगी ने यह भी कहा था कि कांग्रेस  की करतूतें सबके सामने हैं वह नकारात्मक राजनीति कर रही है। कांग्रेस  राम के अस्तित्व को ही नकार रही थी  तब सपा और बसपा उसका समर्थन  करते थे। योगी ने कहा प्रधानमंत्री की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया । कांग्रेस  आईसीयू में  पड़ी हुई है। आज चुनाव में  सभी राम का नाम ले रहे हैं। इसलिए  जनता सब समझती है और 10 मार्च को प्रचंड बहुमत  से भाजपा की सरकार बनेगी।मुख्यमंत्री योगी कहते हैं  कि भाजपा  के लिए सत्ता सेवा का साधन है, इसीलिए 80 प्रतिशत हमारे साथ  हैं ।    उत्तर प्रदेश में योगी आदित्य नाथ की सरकार ने निश्चित रूप से कई उपलब्धियां अर्जित की हैं ।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार की साढ़े चार साल की उपलब्धियां गिनाते हुए  कहा था कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जो कुछ कहा था, सरकार बनने के बाद उसे पूरा करके दिखाया है। उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरे देश में नजीर है। साढ़े चार सालों में कोई दंगा नहीं हुआ है। दीपावली समेत सभी पर्व शांतिपूर्वक संपन्न हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन वैश्विक मंच पर छा गया है। दिवाली हमारे सत्ता में आने से पहले भी मनाई जाती रही है। प्रयागराज में कुंभ भी पहली बार नहीं हुआ था, लेकिन तब यूपी के सामने पहचान का संकट था। अयोध्या के दीपोत्सव, प्रयागराज के भव्य-दिव्य कुंभ जैसे आयोजनों से व्यवस्था बदली है। अब पहचान का संकट नहीं है। बेहतर कानून व्यवस्था, निवेश और रोजगार के भरपूर अवसरों से नई पहचान मिली है।मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े चार वर्षों के दौरान अच्छा निवेश हुआ है। मोबाइल डिस्प्ले बनाने वाली कंपनी चीन से भारत आ गई है। निवेश भारत में आ रहा है। पहले भारत से निवेश बाहर जाता था। निवेश के लिहाज से उत्तर प्रदेश प्रमुख पसंद है। शानदार सड़कों की कनेक्टिविटी और सुरक्षा की गारंटी से सब कुछ बदला है। पहले कहा जाता था कि जहां सड़क में गड्ढे शुरू हों, वही यूपी है, लेकिन आज यूपी की पहचान एक्सप्रेस वे और फोरलेन सड़कों के संजाल से होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का उद्घाटन इसी महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 60 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। साढ़े चार वर्षों में साढ़े चार लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। इतनी पारदर्शिता से सब कुछ हुआ है कि कोई उंगली नहीं उठा सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा था कि खाद्यान्न वितरण में उत्तर प्रदेश आगे है। सरकार बनने के बाद जांच कराई तो 40 लाख राशन कार्डों में गड़बड़ी मिली थी। सारी व्यवस्था दुरुस्त कराई गई है। अब 80 हजार राशन की दुकानों पर ई-पाज मशीनें लगाई गई हैं। कोरोना की पहली लहर के बाद खाद्यान्न वितरण की जांच करने भारत सरकार की टीम आई थी। एक भी शिकायत नहीं मिली है। यूपी ऐसा अकेला राज्य है जहां राशन वितरण व्यवस्था को लेकर 97 प्रतिशत लोगों ने संतुष्टि जताई है।मुख्यमंत्री ने कहा थाकि पहले उत्तर प्रदेश के बारे में कहा जाता था कि जहां से अंधेरा शुरू होता है, वह यूपी है।

अब धारणा बदल गई है। बिना भेदभाव पर्याप्त बिजली आपूर्ति हो रही है। कोयला संकट के दौरान प्रदेश ने 22 प्रति यूनिट तक की दर से बिजली खरीदी, लेकिन राज्य के लोगों को कोई परेशानी नहीं होने दी है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने सरकार में सोशल इंजीनियरिंग का भी ध्यान रखा है। पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार में जो 15 ओबीसी नेता मंत्री बने, वे अधिकांश यादव समुदाय से ही ताल्लुक रखते थे. लेकिन भाजपा सरकार के 19 ओबीसी मंत्रियों में सिर्फ एक यादव है। इसी तरह का गुणा-भाग भाजपा ने संगठन में भी लगाया गया है।भाजपा ने संगठन और सरकार में जातिगत प्रतिनिधित्व

देते हुए सोची-समझी रणनीति के साथ सोशल इंजीनियरिंग की है। इस तथ्य को खासकर ध्यान रखा कि ओबीसी का प्रतिनिधित्व सिर्फ यादवों और एससी का जाटवों तक केंद्रित न रह जाए। पहले से तुलना करें तो भारतीय जनता पार्टी में हुआ बदलाव स्पष्ट नजर आता है। योगी आदित्यनाथ सरकार में अन्य पिछड़ा वर्गों और अनुसूचित जातियों को करीब-करीब उतना ही प्रतिनिधित्व दिया गया है, जितना अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी  की सरकार ने दिया था। अखिलेश की सरकार में 48.9  फीसदी मंत्री ओबीसी और एससी वर्गों के थे. जबकि योगी सरकार में 48.1फीसदी इन वर्गों से हैं। इस प्रकार के फैसलों से भी सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास का नारा सार्थक होता है। भाजपा ने संगठन और सरकार में जातिगत प्रतिनिधित्व देते हुए सोची-समझी रणनीति के साथ सोशल इंजीनियरिंग की। इस तथ्य को खासकर ध्यान रखा कि ओबीसी का प्रतिनिधित्व सिर्फ यादवों और एससी का जाटवों तक केंद्रित न रह जाए. जैसा कि प्रदेश में पहले होता आया था। इसलिए उसने गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलितों की तरफ ज्यादा ध्यान दिया। उन्हें अधिक प्रतिनिधित्व दिया है। मिसाल के तौर पर, अखिलेश सरकार में जो 15 ओबीसी नेता मंत्री बने, वे अधिकांश यादव समुदाय से ही ताल्लुक रखते थे. लेकिन भाजपा सरकार के 19 ओबीसी मंत्रियों में सिर्फ एक यादव है। इसी तरह का गुणा-भाग भाजपा ने संगठन में भी लगाया। इसीलिए भाजपा को सवर्णों की पार्टी कहने वाले गलत साबित होते हैं। पूर्वाग्रहग्रस्त होने के चलते ही भाजपा पर यह आरोप लगाया जाता है।   इस विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि भाजपा ने भारत की जातीय-व्यवस्था की शक्ति को अच्छी तरह पहचाना है। यह भी समझा है कि जातीय-समीकरण बदलते रहते हैं, इसलिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी उसी हिसाब से मायने रखता है. भाजपा के रणनीतिकारों ने इन तथ्यों को समझकर संगठन के हर स्तर पर बदलाव किया. तमाम जातियों को समूचा प्रतिनिधित्व दिया। इसका सीधा लाभ उसे चुनाव में मिला. जबकि तमाम लोग भाजपा के बारे में कुछ और ही सोचते रहे।

   योगी आदित्य नाथ के इस ताजा बयान को लेकर भी इसी तरह की सोच देखने को मिल रही है। भाजपा के नेता और कार्यकर्ता चुनाव  से ठीक पहले बूथ स्तर तक इसीलिए जा रहे हैं ताकि लोगों को सच्चाई बताई जा सके। 

~अशोक त्रिपाठी

 

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1 Comments

Asepabow Asepabow Thursday, February 2022, 04:05:47

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