कोरोना महामारी का व्यवसाय और नए स्टार्टअप पर असर

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सैय्यद रिज़वान ज़ैदी,  बिज़नेस एंड कमर्शियल लॉ एक्सपर्ट व सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता, का कहना हैं, कोरोना महामारी से लड़ते हुए देश को एक लम्बा अरसा होने को जा रहा हैं। महामारी का बड़ा असर बिज़नेस सेक्टर में देखने को नज़र आता हैं। हाल ही के दिनों में अगर नज़र दौड़ाई जाये तो बस कुछ ही क्षेत्र ऐसे हैं, जिनमे महामारी के दौरान वस्तुओ का उपभोग ज़्यादा रहा हैं उनमे खासकर चिकित्सा क्षेत्र, फ़ूड सेक्टर और बुनियादी ज़रूरत से जुड़े क्षेत्र हैं अन्यथा महामारी का असर सभी क्षेत्रों में देखने को नज़र आता हैं। लोगो में एक असुरक्षा की भावना सी जाग गयी जिसका सीधा असर क्रय शक्ति पर पड़ा हैं। बिज़नेस सेक्टर आपसी यकीन और भरोसे पर चलता हैं किन्तु महामारी ने समाज में एक असुरक्षा सी पैदा कर दी जिसका असर सीधा व्यवसायी पर पड़ा हैं। 

अगर बात की जाये स्टार्टअप्स के विषय में, तो इनपर भी एक नकारात्मक असर महामारी का देखने को मिलता हैं। महामारी के कारण पूरा देश लॉकडाउन की स्तिथि में रहा हैं, जिसके कारण इस फील्ड में काफी स्लो डाउन रहा हैं। कोई भी नया एंटरप्रन्योर स्टार्टअप्स की हिम्मत नहीं जुटा पाया कुछ एक अपवादों को छोड़कर। 

कॉस्मेटिक स्टार्टअप कैफीन नेशन के डायरेक्टर का कहना हैं "हम आशा करते हैं की मार्किट फिर से अपनी गति पकड़ेगी, फिर से इंडस्ट्रीज में तेज़ी देखने को मिले।" उनका कहना हैं  "स्टार्टअप के लिए ये वक़्त बहुत क्रिटिकल हैं और हमे मार्किट में सर्वाइवल के लिए स्ट्रेटेजीज व पॉलिसीस में बदलाव लाना होगा।"  

शॉपिंग सेंटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एससीएआई) ने कहा है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के प्रसार को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन लगाने से उद्योग का कारोबार करीब 50 प्रतिशत गिर गया हैं। एसोसिएशन ने बयान में कहा, कुछ राज्यों में स्थानीय अंकुशों, मॉल बंद होने तथा सप्ताहांत कर्फ्यू की वजह से कारोबार, पुनरुद्धार और संगठित खुदरा क्षेत्र में रोजगार प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि कोविड पूर्व से पहले उद्योग मासिक आधार पर 15,000 करोड़ रुपये का कारोबार कर रहा था, मार्च, 2021 के मध्य में यह आंकड़ा फिर हासिल हो गया था लेकिन स्थानीय स्तर पर अंकुशों के बाद अब उद्योग का कारोबार 50 प्रतिशत नीचे आ गया है। एससीएआई के अनुसार, देशभर में मॉल्स का कारोबार करीब 90 प्रतिशत पर और लोगों की आवाजाही 75 प्रतिशत पर पहुंच गई थी लेकिन स्थानीय स्तर पर अंकुशों के बाद अब इसमें जबरदस्त गिरावट आई है। 

अब जबकि फिरसे देश में लगभग लॉकडाउन की सीमा ख़त्म सी हो गयी हैं और बिज़नेस ने साँसे लेने की कोशिश शुरू कर दी हैं ऐसे में ज़रूरी हैं के केंद्र और राज्ये सरकारे व्यपारियो की परिस्थिति को समझे और उन्हें फिर से व्यापार में रफ़्तार पकड़ने में ज़रूरी मदद करे।

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