न्यूयार्क में विवादास्पद लेखक सलमान रुश्दी पर घातक हमला

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न्यूयार्क भारतीय मूल के विवादास्पद लेखक सलमान रुश्दी  पर अमेरिका के न्यूयार्क शहर में एक कार्यक्रम के दौरान चाकू से घातक हमला किया गया।


न्यूयार्क पुलिस के अनुसार श्री रुश्दी पर हमला उस समय किया जब उनका परिचय कराया जा रहा था। तभी एक हमलावर मंच की ओर दौड़ा और उन पर चाकू से हमला कर दिया। इस हमले में साक्षात्कारकर्ता भी घायल हो गया। हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया है।


पुलिस ने एक बयान में कहा है कि 12 अगस्त को स्थानीय समयानुसार लगभग 11 बजे एक संदिग्ध व्यक्ति मंच की ओर दौड़ा और श्री रुश्दी और उनके साक्षात्कारकर्ता पर हमला किया। श्री रुश्दी को गर्दन पर चोट आयी है। उन्हें हेलीकॉप्टर से पास के अस्पताल ले जाया गया। हमले में साक्षात्कारकर्ता भी घायल हो हुआ है।
श्री रुश्दी पश्चिमी न्यूयार्क में चौटाउक्वा इंस्टीट्यूट की एक सभा में व्याख्यान देने जा रहे थे वहां उनका परिचय कराया जा रहा था कि इसी दौरान एक व्यक्ति ने उन पर चाकू से प्रहार शुरू कर दिया। वहां उपस्थित लोगों ने हमलावर को रोक लिया था लेकिन तब तक  रुश्दी जमीन पर गिर चुके थे।


घटना की एक तस्वीर में दिख रहा था कि श्री रुश्दी फर्श पर पीठ के बल गिरे हुए हैं और उन्हें पांच-छह व्यक्ति उठाने का प्रयास कर रहे हैं।


सलमान रुश्दी 1980 के दशक में अपनी एक पुस्तक सेटेनिक वर्सेज को लेकर विवाद में आये थे। उनकी विवादास्पद किताब भारत में भी प्रतिबंधित है।  रुश्दी अंग्रेजी में लिखते हैं और लंदन में रहते हैं।

 


इसबीच न्यूयॉर्क प्रांत की गवर्नर कैथी होचुल ने हमले के बाद त्वरित प्रतिक्रिया देने वालों और न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर लिखा, “इस भयावह घटना के बाद हमारी सहानुभूति सलमान और उनके चाहने वालों के साथ है। मैंने स्टेट पुलिस को जांच में ज़रूरत पड़ने पर और मदद करने का निर्देश दिया है।”

 


भारतीय मूल के उपन्यासकार ने 1981 में ‘मिडनाइट चिल्ड्रन’ के साथ प्रसिद्धि मिली। अकेले ब्रिटेन में इसकी दस लाख से अधिक प्रतियां बिकीं। वर्ष 1988 में रुश्दी की चौथी किताब द सैटेनिक वर्सेज़ प्रकाशित हुई। इस उपन्यास से कुछ मुसलमानों में आक्रोश फैल गया, उन्होंने इसकी सामग्री को ईशनिंदा करार दिया।


पूरी दुनिया में विरोध प्रदर्शन होने लगे और इस किताब पर प्रतिबंध लगाने की मांग होने लगी। वहीं सेंसरशिप और किताब जलाने के विरोध में भी कई विरोध प्रदर्शन हुए। पुस्तक के प्रकाशन के एक साल बाद, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमैनी ने रुश्दी के ख़िलाफ़ मौत का फ़जारी किया।


फ़तवा जारी होने के बाद सारी चीज़ें एक अलग ही स्तर पर चली गई। खुमैनी के बयान के बाद दुनिया में कूटनीतिक संकट पैदा हो गया। इस किताब के प्रकाशन के बाद हुए विरोध प्रदर्शन में पूरी दुनिया में 59 लोग मारे गए। मृतकों की इस संख्या में उपन्यास के अनुवादकों की संख्या भी शामिल हैं। जान से मारे जाने की धमकियों की वजह से ख़ुद सलमान रुश्दी नौ साल तक छिपे रहे।


 लेखक सलमान रुश्दी को शुक्रवार को उस समय चाकू मार दिया गया, जब वह अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य में एक कार्यक्रम में बोलने के लिए तैयार थे। रुश्दी के सिर पर करोड़ों डॉलर का इनाम है। राज्य पुलिस ने कहा कि रुश्दी की गर्दन में छुरा घोंपा गया प्रतीत होता है, उन्हें हेलीकॉप्टर से न्यूयॉर्क शहर से लगभग 550 किलोमीटर दूर चौटौक्वा में दूरस्थ शिक्षा और आध्यात्मिक केंद्र से एक अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्होंने स्थिति का खुलासा नहीं किया।

 

पुलिस ने कहा कि कथित हमलावर, जिसने उसे फर्श पर धकेल दिया और उस पर हमला किया, को वहां मौजूद राज्य पुलिस के एक जवान ने हिरासत में ले लिया।

हमलावर की तत्काल पहचान नहीं हो सकी है।

एक चश्मदीद ने डेली बीस्ट को बताया कि हमलावर भारी सेट और एक काला हेडपीस पहने हुए था।

गवाह, वार्ड पोटलर ने कहा कि उसे लगा कि हमलावर 'रुश्दी को घूंसा मार रहा है, लेकिन तब मुझे एहसास हुआ कि वह उसे छुरा घोंप रहा है।'

संगठन की वेबसाइट के अनुसार, विडंबना यह है कि रुश्दी चौटाउक्वा संस्थान में 'लेखकों और निर्वासन में अन्य कलाकारों के लिए शरण के रूप में और रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए एक घर के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका की चर्चा' में भाग ले रहे थे।

1989 में उनके उपन्यास, सैटेनिक वर्सेज के प्रकाशन के बाद, जिसे कुछ मुसलमानों ने ईशनिंदा माना, तत्कालीन ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमैनी ने रुश्दी की हत्या के लिए एक फतवा जारी किया था।

विभिन्न ईरानी संगठनों ने भारत में जन्मे 75 वर्षीय लेखक की हत्या के लिए 3 मिलियन डॉलर से अधिक का पुरस्कार दिया।

रुश्दी कई वर्षों तक ब्रिटिश सरकार के संरक्षण के साथ भूमिगत रहे और 2000 में अमेरिका चले गए और तब से सार्वजनिक रूप से हैं।

वह 1989 में हत्या के प्रयास से बच गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लाम समूह के मुजाहिदीन ने ली है।

अल कायदा ने उसे कई साहित्यिक और मीडिया हस्तियों के साथ अपनी हिट लिस्ट में भी डाल दिया था, जिसने दावा किया कि उसने इस्लाम का अपमान किया है।

I think all aspiring and professional writers out there will agree when I say that ‘We are never fully satisfied with our work. We always feel that we can do better and that our best piece is yet to be written’.
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