विपरीत राजनैतिक विचारधाराओ का टकराव

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बंगाल मैं हाल ही के महीनो में राजनीति अपनी परिकाष्ठा पर रही हैं, भारतीय जनता पार्टी ने राज्य मैं अपनी सरकार बनाने  के लिए पूरी ताक़त झोक दी दूसरी और ममता बनर्जी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। चुनाव संपन्न हुए जिसमे ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस आगे रही और  ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले चुकी हैं। मुद्दा अब यह नहीं रहा की कोन जीता और कोन हारा बल्कि यह हैं कि, क्या विपरीत राजनैतिक विचारधारा हिंसा का रूप ले रही हैं ,जैसा की देखने को नज़र आ रहा हैं।  

 

राजनैतिक सभय्ता हमारे समाज की आवश्यकता हैं। हमारे भारतीय संविधान कि प्रस्तावना मैं वैचारिक अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित किया गया हैं किन्तु क्या हमारी इच्छा शक्ति ऐसा कर रही हैं , क्या हम सविधान मैं लिखी इन बातो पर अमल कर रहे हैं , यह एक वैचारिक मुद्दा हैं जिस पर हर भारतवासी को चिंतन करना चाहिए और सभी दलो को अपनी सामाजिक जवाबदेही निर्धारित करनी होगी साथ ही अपने संघटनो को नैतिक ज़िम्मेदारी के लिए तैयार रखना होगा।

~सैयद रिज़वान ज़ैदी

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