पुडुचेरी में कांग्रेस सरकार गिरी

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पुडुचेरी- विश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी के इस्तीफे के कारण पुडुचेरी में कांग्रेस सरकार गिर गई है।

हाल ही में कई कांग्रेस विधायकों और बाहर से समर्थन दे रहे द्रमुक के विधायक के इस्तीफे के कारण केन्द्र शासित प्रदेश की सरकार अल्पमत में आ गई थी। सदन में फिलहाल सरकार के पास 11 और विपक्ष के पास 14 का संख्या बल है।

नारायणसामी ने उपराज्यपाल तमिलिसाई सुन्दरराजन से भेंट कर मंत्रिमंडल का इस्तीफा उन्हें सौंपा। एनआर कांग्रेस प्रमुख और विपक्ष के नेता एन. रंगासामी ने कहा कि उनका सरकार बनाने का दावा पेश करने का कोई इरादा नहीं है और आगे की चर्चा की जाएगी।

सुन्दरराजन ने इससे पहले सोमवार को एक दिन का विशेष सत्र बुलाया था और उसका एजेंडा विश्वासमत था। गौरतलब है कि विपक्ष ने पिछले सप्ताह उन्हें आवेदन देकर कहा था कि विधायकों के इस्तीफे के कारण सरकार अल्पमत में आ गई है।

रविवार को दो विधायकों के इस्तीफे के बाद पिछले कुछ दिन में सत्ता पक्ष से इस्तीफा देने वालों की संख्या तीन हो गई है। वहीं पूरे एक महीने में देखें तो कांग्रेस-द्रमुक सत्ता पक्ष से कुल छह लोगों ने इस्तीफा दिया है जिससे सदन में उनकी संख्या कम होकर 11 रह गई है। रविवार को कांग्रेस सदस्य के. लक्ष्मीनारायण और द्रमुक सदस्य के. वेंकटेशन ने इस्तीफा दिया था।

फिलहाल सदन में सदस्य संख्या के हिसाब से पार्टियों की स्थिति कुछ इस प्रकार है... कांग्रेस (विधानसभा अध्यक्ष सहित नौ), द्रमकु (दो), ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (सात), अन्नाद्रमुक (चार) भाजपा (तीन, सभी मनोनीत सदस्य, मताधिकार के साथ) और एक निर्दलीय (जो सरकार के साथ था)। सात सीटें सदन में खाली हैं।

इस्तीफा देने वालों में पूर्व मंत्री ए. नमशिवाय (अब भाजपा में) और मल्लाडी कृष्ण राव शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत केन्द्र सरकार और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी पर सोमवार को निशाना साधते हुए नारायणसामी अपने सहकर्मियों के साथ सदन से बाहर निकल गए। इससे पहले मनोनीत सदस्यों के विश्वासमत में वोट करने को लेकर सदन में चर्चा हुई थी।

इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष वी. पी. शिवकोलुंधु ने मुख्यमंत्री द्वारा सदन में रखे गए विश्वास प्रस्ताव के गिरने की घोषणा की। हालांकि आज सुबह रखे गए प्रस्ताव पर किसी भी रूप में कोई मतदान नहीं हुआ।

नारायणसामी ने बाद में संवाददाताओं से कहा, ‘‘सिर्फ निर्वाचित सदस्य ही सदन में मतदान कर सकते हैं, हमारे इस विचार को विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार नहीं किया। इसलिए हमने सदन से बहिर्गमन किया और उपराज्यपाल से भेंट करके अपना और मंत्रिमंडल का इस्तीफा सौंपा।’’

उन्होंने कहा कि उनके साथ उनके सभी मंत्री, कांग्रेस और द्रमुक के विधायक और सरकार को समर्थन देने वाले निर्दलीय विधायक भी थे। उन्होंने कहा कि इस्तीफे पर फैसला करना अब उपराज्यपाल के विवेक पर है। हालांकि उन्होंने अपनी आगे की रणनीति पर कोई जवाब नहीं दिया।

 

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