सीएयू सचिव पर सनसनीखेज आरोप लगा चीफ कोच जाफ़र ने दिया इस्तीफा

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माहिम वर्मा अयोग्य खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने के लिए दबाव बनाते हैं,झूठे हैं 

सीएयू सचिव पर तमाम सनसनीखेज आरोप लगा चीफ कोच जाफ़र ने दिया इस्तीफा

बीसीसीआई की भ्रष्टाचार निरोधक विंग-सीबीआई कर सकती है भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच

चेतन गुरुंग

देहरादून। उत्तराखंड क्रिकेट की बागडोर कथित तौर पर थामे क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के मुख्य प्रशिक्षक तथा भारतीय टीम के पूर्व सदस्य वासिम जाफ़र ने मंगलवार को सचिव माहिम वर्मा पर तमाम सनसनीखेज आरोपों की बारिश कर ई-मेल भेज के पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने माहिम पर अयोग्य खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने के लिए दबाव डालने का आरोप लगा के उत्तराखंड क्रिकेट में भ्रष्टाचार के आरोपों को ताकत दे दी।

जाफ़र के इस्तीफे में सिर्फ और सिर्फ माहिम के खिलाफ अनेक गंभीर किस्म की शिकायतें भरी हुई हैं। इनमें सबसे बड़ा और गंभीर आरोप टीम में ऐसे खिलाड़ियों को शामिल करने का है, जो लायक ही नहीं थे। ये बात सैय्यद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए टीम चयन के दौरान की है। ये भी आरोप लगाया गया है कि माहिम उनके बारे में झूठी और निराधार बातें करते हैं। `वह लोगों से ये कहते थे कि मैंने उनके लिए अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया। जो एकदम झूठ है

भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज ने ये आरोप भी लगाए कि उनको टीम चयन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती थी। टीम को बेहतर करने के उनके सुझावों को दरकिनार कर दिया जाता था। विजय हजारे ट्रॉफी के लिए टीम चयन में भी मुझे कुछ नहीं बताया गया। मैं चाहता था कि टूर्नामेंट के चयन से पहले 4-5 अभ्यास मैच अन्य राज्यों की टीमों से खेला जाए। इससे खिलाड़ियों की काबिलियत को पहचानने में मुझे मदद मिलती। बेहतर टीम का चयन हो सकता था। माहिम ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

अपने इस्तीफे में वासिम ने कहा, `मैंने माहिम से इस बारे में फोन पर बात करने की कोशिश की। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने फिर उनको फोन किया। उन्होंने कॉल रिसीव ही नहीं की। मैं अपनी नियुक्ति से ही सीईओ के संपर्क में लगातार था। मुझसे माहिम ने कहा, `मैं सचिव हूँ। आप सीधे मुझे रिपोर्ट करो। उनके इस रुख के कारण कई अहम कार्यों में देरी हुई। किसी भी कार्य योजना पर विचार-विमर्श हुआ

इस्तीफे में ये भी कहा गया है, `उत्तराखंड में काफी शानदार प्रतिभाएँ हैं। टीम चयन में माहिम के दखल और पूर्वाग्रह (किस किस्म का, ये नहीं बताया) के कारण यहाँ की प्रतिभाएँ मुझसे कुछ नहीं सीख पाईं। माहिम के गैर पेशेवर बर्ताव के कारण मैं क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड से नाता तोड़ने के लिए मजबूर हो गया। ये देख के बहुत दुख हो रहा है कि सचिव के रुख के कारण उत्तराखंड की प्रतिभाएँ बर्बाद हो रहीं। मेरे पास दुबई-श्रीलंका और बांग्लादेश से बेहतरीन पेशकश थीं। मैंने उनसे जुड़ने के बजाए उत्तराखंड को तवज्जो दी। 

जाफ़र ने सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष रिजवान शमशाद पर भी अपनी किसी भी कॉल का जवाब न देने और टीम चयन में उनको विश्वास में न लेने के आरोप लगाए। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और सीएयू के मुख्य प्रशिक्षक के गंभीर आरोपों से `शाह टाइम्स में पूर्व में छपी खबरों को बल मिला है। शाह टाइम्स पहले भी उत्तराखंड टीम चयन में धांधली पर बीसीसीआई का ध्यान भी खींचता रहा है। सूत्रों के मुताबिक माहिम और सीएयू पर बोर्ड के भ्रष्टाचार निरोधक विंग की गाज गिर सकती है। ऐसे मामलों को ही सीबीआई भी जांच के लिए अपने हाथों में लेती है।  

 

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