विधानसभा चुनाव जीतने  के लिए भाजपा ले रही सीमावर्ती दोस्तों की मदद

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उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव जीतने  के लिए भाजपा हर संभव उपाय कर रही है। यूपी के सीमावर्ती हरियाणा, मध्यप्रदेश और बिहार के लोग अपने राज्य से जुडी विधानसभाओं में अपने रसूख और संबंधों का फायदा उठाकर मदद कर रहे हैं। इसी प्रकार उत्तराखंड में सीमावर्ती राज्य हिमाचल से भाजपा के नेता और कार्यकर्ता अपने स्तर से चुनाव में सहायता कर रहे हैं। हरियाणा से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों वाली निकटता है । इसी हरियाणा में भाजपा ने बेहतर बूथ मैनेजमेंट के फार्मूले पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ते हुए दो बार सरकार बनाई है। माना जाता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब हरियाणा में भाजपा के प्रभारी हुआ करते थे, तब उन्होंने यहां के पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को बूथ मैनेजमेंट का फार्मूला सुझाया था। वो फार्मूला अब भी कारगर है। हरियाणा में भाजपा के नेता ओमप्रकाश धनखड़ के नेतृत्व में पार्टी अब पन्ना प्रमुखों से लेकर प्रांतीय परिषद के सदस्यों तक सीधे संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ा रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 27 सीटों पर भाजपा के हरियाणवी दोस्त मदद कर सकते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने जयंत चैधरी की रालोद से गठबंधन किया है।

 

इस गठबंधन को हरियाणा ही कमजोर कर सकता है। ऐसा भी नहीं  है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर यूपी विधानसभा चुनाव में ही पूरी तरह में व्यस्त हो गये हों बल्कि सौ करोड़ रुपये से अधिक की सभी परियोजनाओं की उच्च स्तरीय समीक्षा भी करवा रहे हैं ताकि सभी कार्य गुणवत्तापरक सम्पन्न हों। भाजपा ने सीमावर्ती छेत्र में हरियाणा की मदद लेते हुए मुख्य प्रतिद्वंद्वी सपा को कमजोर करने का प्रयास भी जारी रखा है। पश्चिमी यूपी के ही शाहजंहापुर से सपा की प्रत्याशी सलोना कुशवाहा ने साइकिल से उतरकर भगवा थाम लिया है। 

 


भाजपा और जन नायक जनता पार्टी (जजपा) के गठबंधन सरकार वाले राज्य हरियाणा से सटी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 27 विधानसभा सीटों पर यूपी के साथ हरियाणा के भी भाजपा नेता चुनाव प्रचार कर रहे हैं। हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने प्रत्येक विधानसभा सीट पर दो-दो पार्टी नेताओं की ड्यूटी लगाई है। पार्टी ने इन नेताओं को प्रवासी कार्यकर्ता का नाम दिया है। हरियाणा भाजपा के यह नेता पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बूथ मैनेजमेंट का काम करेंगे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर हरियाणा के भाजपा नेताओं को जिम्मेदारी सौंपते हुए जातीय गणित का ध्यान रखा गया है।

 

लाडवा के पूर्व विधायक एवं पार्टी के प्रदेश महामंत्री डॉ. पवन सैनी को उत्तर प्रदेश के लिए प्रांतीय प्रवास प्रमुख बनाया गया है। पूर्व मंत्री कर्ण देव कांबोज को सहारनपुर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई, जबकि उनके साथ धर्मवीर मिर्जापुर में काम करेंगे। इसी तरह मुजफ्फरनगर जिले के लिए राजेंद्र सलूजा व राम मेहर मलिक, शामली जिले के लिए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के पूर्व चेयरमैन भारत भूषण भारती व विजयपाल आहलुवालिया तथा बागपत जिले के लिए सीएम के पूर्व मीडिया सलाहकार राजीव जैन व रणबीर ढाका को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बिजनौर जिले के लिए मदन चौहान व सत्यव्रत शास्त्री को प्रचार की कमान सौंपी गई है।


प्रांतीय प्रवास प्रमुख डा. पवन सैनी ने बताया कि पांच जिलों की 27 विधानसभा सीटों पर भी प्रवास प्रमुख और सह प्रमुख के दायित्व सौंपे गए हैं। भाजपा के प्रांतीय मीडिया प्रमुख डा. संजय शर्मा और प्रांतीय प्रवक्ता सुदेश कटारिया के अनुसार कैराना में विधु रावत व निशांत छौकर, थानाभवन में वीरेंद्र चौहान व मनोज जैन, शामली में दिनेश गोयल व नंदराम धानिया, छपरौली में प्रदीप खोखर व प्रकाशवीर नागर, बड़ौत में राष्ट्र दहिया व रश्मि खेत्रपाल, बागपत में नवीन गोयल व वैशाली तंवर, नजीबाबाद में बलकार डोडला व राजेंद्र बाखली तथा नगीना में हीराल नंबरदार व मुकेश वाल्मीकि की ड्यूटी लगाई गई है।

 


चुनाव प्रबंधन के साथ ही हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल राज्य  की व्यवस्था पर भी पैनी नजर रखे हैं। उन्होंने प्रदेश में चल रही 100 करोड़ रुपये से अधिक की सभी परियोजनाओं की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव संजीव कौशल की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन करने की मंजूरी प्रदान की हैं, ताकि इन चल रही परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सके। यह कमेटी हर माह इन परियोजनाओं की समीक्षा करेगी। इस कमेटी में वित्तायुक्त और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्तविभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सदस्य हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल इस प्रकार की परियोजनाओं की समीक्षा स्वयं भी करेंगे, ताकि जहां किसी भी परियोजना में विभागों को दिक्कत या समस्या आ रही होगी उसका तुरंत समाधान हो सके। इसी कड़ी में आगामी 24 जनवरी को मुख्यमंत्री स्वयं एक बैठक करके इन परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे। वर्तमान में प्रदेश में 82 ऐसी परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए कार्य जारी हैं, जिन्हें निर्धारित समय अवधि में पूरा करने का कार्य किया जाएगा। ये 100 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं 14 विभागों की चलाई जा रही हैं, जिनमें तकनीकी शिक्षा विभाग की दो परियोजनाएं, गृह विभाग की तीन परियोजनाएं, स्वास्थ्य सेवाएं विभाग की तीन परियोजनाएं, परिवहन विभाग की एकपरियोजना, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की तीन परियोजनाएं, चिकित्सा शिक्षा विभाग की सात परियोजनाएं, ग्राम एवं आयोजना विभाग की सात परियोजनाएं, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की छह परियोजनाएं शामिल हैं।


इधर, उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी उथल-पुथल का दौर लगातार जारी है। मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव औपचारिक तौर पर भाजपा में शामिल हो गईं। अब अपर्णा यादव को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है कि अपर्णा यादव के विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना न के बराबर है। इसका मतलब यह हुआ कि अपर्णा यादव को विधानपरिषद के रास्ते उत्तर प्रदेश विधानमंडल में भेजा जाएगा। संभवतः यह सौदा पक्का होने के बाद ही अपर्णा ने भाजपा का पटका ओढा है। सौदा तो खरा है। भाजपा अपर्णा यादव  को एमएलसी बनाकर भविष्य में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी भी दे सकती है। पहले  यूपी में भाजपा की दोबारा सरकार बननी चाहिए। उल्लेखनीय है कि अपर्णा यादव वर्ष 2017 में लखनऊ कैंट विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरी थीं। उन्हें इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। इसलिए  अपर्णा  यादव  भी  चुनाव  लडने से बचना चाहती हैं। चुनाव वे सपा में रहते भी लड़  सकती थीं।

 

बताया जा रहा है कि भाजपा लखनऊ कैंट से उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को उतार सकती है। दरअसल, लखनऊ कैंट विधानसभा सीट ब्राह्मण बाहुल्य है। ऐसे में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस सीट को दिनेश शर्मा के लिए उपयुक्त मान रहा है। बताया जा रहा है कि चुनावी समय में सीटों के समीकरण को देखते हुए लखनऊ कैंट से अपर्णा यादव को चुनाव लड़ाना नुकसान वाला फैसला साबित हो सकता था। 


भाजपा ही नहीं, सपा के नेता भी पार्टी का विरोध शुरू कर चुके हैं। इस कड़ी में शाहजंहापुर से सपा की प्रत्याशी सलोना कुशवाहा ने साइकिल से उतरकर कमल थाम लिया है। सलोना कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुईं। बीजेपी ने तिलहर विधानसभा सीट से सलोना को प्रत्याशी के तौर पर टिकट दिया है। आपको बता दें चर्चित किलर विधानसभा सीट के विधायक रोशन लाल वर्मा ने कुछ दिनों पहले बीजेपी को छोड़ दिया था। अब वे सपा में शामिल हो गए हैं, ऐसे में तिलहर की यह सीट खाली हो गई थी। ऐसे में सलोना को यहां से उम्मीदवार बनाया जा सकता है क्योंकि यह बीजेपी के लिए फायदे का सौदा हो सकता है। सलोना कुशवाहा के बीजेपी में आने पर मंत्री सुरेश कुमार खन्ना का कहना था कि सलोना के बीजेपी में आने पर पिछड़े समाज को मान सम्मान मिलेगा। सलोना कुशवाहा के बीजेपी में आने से बरेली मंडल में बीजेपी को ताकत मिलेगी। 

~ अशोक त्रिपाठी

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