अमित शाह की सख्त हिदायत का असर

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केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह पिछले दिनों कश्मीर गये थे। जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को निष्प्रभावी करने के बाद अमित शाह की यह पहली यात्रा थी। इसी के दौरान वहां आतंकवादियों ने बिहार के चार मजदूरों की हत्या कर दी। अमित शाह ने राज्य की जनता को सुरक्षा का आश्वासन देते हुए वहां सक्रिय आतंकवादियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी थी। जनता से कहा कि हालात ठीक हो गये तो जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा। जम्मू-कश्मीर मौजूदा समय में केन्द्र शासित प्रदेश है।

 

आतंकियों को चेतावनी के साथ ही वहां के अफसरों को भी उतने ही सख्त शब्दों में चेताया था कि यहां की व्यवस्था को ठीक करें अथवा अपना ट्रांसफर करा लें। केन्द्रीय गृहमंत्री की इस सख्ती का प्रभाव दो दिन बाद ही दिखने लगा है। राष्ट्रीय जांच एजेन्सी (एनआईए) ने प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। दरअसल, आतंकियों से ज्यादा खतरनाक यही लोग हैं जो उनको शरण देते हैं। इतना ही नहीं ये लोग आतंक फैलाने वालों को आर्थिक मदद भी करते हैं। टेरर फंडिंग को लेकर एनआईए काफी पहले से कार्रवाई कर रही है। इससे घुसपैठ में कमी आयी है।

 


 राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने टेरर फंडिंग को लेकर जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित संगठन जमात ए इस्लामी के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। एजेंसी की टीमों ने जमात ए इस्लामी से जुड़े लोगों के घरों और ऑफिस में छापे मारे शुरू हुई थी। एनआईए की यह छापेमारी 8 और 9 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में की गई 61 छापेमारियों का ही यह अगला कदम है। अगस्त में एनआईए की टीमों की ओर से श्रीनगर, बडगाम, गांदरबल, बारामूला, कुपवाड़ा, बांदीपोरा, अनंतनाग, शोपियां, पुलवामा, कुलगाम, रामबन, डोडा, किश्तवाड़ और राजौरी जिले के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई थी।

 


एनआईए की ओर से इससे पहले 22 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के 6 जिलों में छापा मारा गया था। इस छापेमारी में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए कई आतंकवादियों के घर भी शामिल थे। एनआईए ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। एनआईए की ओर से कश्मीर घाटी में आम नागरिकों की हत्या के मामले में लगातार कार्रवाई जारी है। जानकारी के अनुसार एनआईए की ओर से जिन लोगों के घरों और ऑफिसों में छापेमारी की गई थी, उन पर आतंकियों की मदद करने के आरोप हैं। एनआईए ने 10 अक्टूबर को भी जम्मू-कश्मीर में 16 जगहों पर छापा मारा था।

 

एनआईए ने इस दौरान कुलगाम, बारामुला, श्रीनगर और अनंतनाग जिलों में ये छापेमारी की थी। 12 अक्टूबर को भी एनआईए ने छापेमारी की थी। एनआईए ने जम्मू-कश्मीर में आतंकी संबंधी गतिविधियों के मद्देनजर 16 जगहों पर छापेमारी की थी। एनआईए ने यह छापा लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्ब-उल- मुजाहिदीन, अल बद्र, द रेसिस्टेंस फ्रंट, पीपल अगेंस्ट फासिस्ट फोर्सेज , मुजाहिदीन गजवातुल हिंद समेत विभिन्न आतंकी संगठनों की साजिशों का पर्दाफाश करने के लिए मारा था।
गृह मंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान जम्मू कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा की और सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में उनके साथ उप राज्यपाल मनोज सिन्हा, जम्मू कश्मीर पुलिस, सेना, अर्ध सैनिक बलों और खूफिया एजेंसी के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए थे। गृह मंत्री की यह यात्रा ऐसे समय पर हुई जब हाल ही घाटी में कई नागिरिकों की हत्या की घटनाएं सामने आईं। सूत्रों के अनुसार इस उच्च स्तरीय बैठक में अमित शाह ने पहले खुफिया विभाग के प्रमुखों को संबोधित किया और उनसे जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पर किस तरह से रोक लगाई जाए उसके लिए कारगर उपायों के बारे में पूछा। अधिकारियों ने गृह मंत्री को उनके कार्य शैली के बारे में बताया और यह भी कहा कि स्थानीय अधिकारी इंटेलीजेंस की तरफ से दी गई इनफॉर्मेशन पर कार्य नहीं करना चाहते। सूत्रों ने कहा कि शाह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिन अधिकारियों को डर लगता है उन्हें कश्मीर में काम नहीं करना चाहिए इसके बजाए वह उन्हें दूसरी जगह पोस्टिंग लेनी चाहिए। सूत्रों के अनुसार इस उच्च स्तरीय बैठक में अमित शाह ने पहले खुफिया विभाग के प्रमुखों को संबोधित किया और उनसे जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पर किस तरह से रोक लगाई जाए उसके लिए कारगर उपायों के बारे में पूछा। 


तीन दिनों के दौरान शाह ने आतंकी घटनाओं में मारे गए सुरक्षाबलों के जवानों के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उनके यहां पहुंचने के बाद उनके एजेंडा में सबसे पहले पुलिस इंस्पेक्टर परवेज अहमद के परिवार से मुलाकात थी। मुलाकात के दौरान उन्होंने अहमद की पत्नी को नौकरी की पेशकश की। मस्जिद से नमाज पढ़कर लौट रहे पुलिस इंस्पेक्टर की आतंकियों ने जून में हत्या कर दी थी। सुरक्षा को लेकर आयोजित बैठक के बाद वो घाटी में जान गंवाने वाले शहीदों और नागरिकों के परिवार से मिले। शाह ने अपनी यात्रा का समापन भी पुलवामा हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि देकर किया। उन्होंने ट्वीट किया था, ‘मैं आतंकियों से लड़ते हुए शहीदों और आतंकी घटनाओं में मारे गए नागरिकों के परिवारों से मिला। मैंने जम्मू-कश्मीर के हर नागरिक को भरोसा दिया है कि मोदी सरकार और पूरा देश उनके साथ मजबूती से खड़ा है। भारत ऐसी किसी कायर हिंसा से नहीं डरेगा।’


उन्होंने संदेश दिया कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंकवाद में गिरावट देखी गई है, पत्थरबाजी कम हुई है, लेकिन बलों को आतंकवादियों के खिलाफ आक्रामक रहना चाहिए और एक साथ करीब से काम करना चाहिए। उन्होंने ट्वीट किया, ‘आज श्रीनगर में सशस्त्र बलों, केंद्रीय पुलिस बलों, जम्मू-कश्मीर पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सुरक्षा समीक्षा बैठक की। पीएम नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम श्र-ज्ञ से घुसपैठ व आतंकवाद को जड़ से समाप्त कर यहां के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध हैं।’


गृहमंत्री ने बॉर्डर आउट पोस्ट का भी दौरा किया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘आज जम्मू के मकवाल में बॉर्डर आउट पोस्ट पर जाकर हमारे बीएसएफ के जवानों से भेंट कर उनके साथ कुछ समय बिताया। दौरे के दूसरे दिन शाह ने जम्मू में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के नए कैंपस का उद्घाटन किया। शाह ने कहा कि अगर 45 हजार युवा जम्मू-कश्मीर के गरीबों की सेवा में लगे, तो आतंकवादी कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे और ये युवा कम समय में जम्मू और कश्मीर बदल देंगे। इसके अलावा सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की तरफ से 25 हजार सरकारी नौकरियां दी गई हैं। इनमें से 7 हजार लोगों को पहले ही अपॉइंटमेंट लैटर दिया जा चुका है। सरकार की भविष्य की योजनाओं को लेकर उन्होंने कहा कि अब तक 12 हजार करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है और 2022 से पहले 51 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हो जाएगा। जम्मू-कश्मीर में विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के बाद उन्होंने ट्वीट किया, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जल्द ही जम्मू व श्रीनगर में मेट्रो की शुरुआत होने वाली है और 700 करोड़ रुपये से जम्मू एयरपोर्ट का भी विकास होने वाला है। नई हेलीकॉप्टर पॉलिसी के तहत हर जिले में हेलीपैड बनाकर हर जिले को आपस में जोड़ने का भी काम हमने शुरू किया है।’ कई खतरे की जानकारियां मिलने के बावजूद शाह ने श्रीनगर में स्थानीय लोगों से मिलकर सभी को चौंका दिया। 

~अशोक त्रिपाठी

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