अखिलेश यादव का अनुभव और यात्रा

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उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए बसपा, कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी और ओवैसी का मोर्चा बढ़चढ़कर भले ही दावेदारी कर रहे हों लेकिन विपक्ष के रूप में समाजवादी पार्टी ही खड़ी दिख रही है। सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव को भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस जैसी पार्टियों के आरोपों का भी जवाब देना पड़ता है।

 

अखिलेश यादव ने अपने पिता और सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव से आशीर्वाद लेकर कानपुर से विजय यात्रा शुरू की। वह कहते हैं कि किसानों युवाओं और उत्तर प्रदेश के लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए वे विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। सपा विधानसभा चुनाव गठबंधन करके लड़ना चाहती है लेकिन अखिलेश यादव कहते हैं कि गठबंधन के मामले में बड़ी पार्टियों के साथ हमारा अनुभव अच्छा नहीं रहा है। उनकी विजय यात्रा में भीड़ तो इकट्ठी हो रही है लेकिन इस भीड़ को क्या वोट में अखिलेश यादव बदल पाएंगे? उनके चाचा शिवपाल यादव भी यात्रा निकाल रहे हैं।

 

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 12 अक्टूबर को प्रदेश का सियासी पारा नापने के लिए विजय रथ यात्रा लेकर निकले। वहीं, प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने भी रथयात्रा शुरू कर दी है। उन्होंने अपने बेटे और पार्टी के महासचिव आदित्य यादव के साथ मथुरा में बांके बिहारी मंदिर में दर्शन पूजन किया। करीब घंटे भर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन चला। इसके बाद सेवा मंदिर परिसर के बाहर खड़े रथ के पास पहुंचे जहां कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। यहीं से यात्रा की शुरुआत हुई। वहीं, अखिलेश यादव की विजय यात्रा कानपुर में जाजमऊ से शुरू हुई।

 

समाजवादी आंदोलन के प्रणेता डॉ. राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर प्रदेश में सियासत की यह नई इबारत लिखी जा रही है। उनके दोनों सियासी अनुयायियों में खुद को असली साबित करने की होड़ है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2017 में भाजपा ने 384 सीटों पर चुनाव लड़कर 312 सीटें जीती थीं और 72 सीटें हारी थीं। उसके बाद हुए उप चुनाव में भाजपा ने चार सीटें हारीं। सुभासपा से गठबंधन टूटने के बाद पार्टी ने 2017 में उन्हें दी गई आठ सीटों को भी हारी हुई सीटों की संख्या में शामिल कर लिया।

 

इस तरह प्रदेश में 84 सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा या सहयोगी अपना दल के विधायक नहीं हैं। भाजपा ने 2022 में इन सीटों पर जीत के लिए एक साल पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। इन सीटों पर पार्टी के दिग्गज नेताओं, राज्यसभा सदस्यों, निगम, बोर्ड के अध्यक्षों और विधान परिषद सदस्यों को प्रभारी बनाया है। इन विधानसभा क्षेत्र के प्रभारियों ने विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के फार्मूले के अनुसार दौरा कर अपना फीडबैक पार्टी को दिया है। इन सीटों पर सपा की निगाह है।

 

 

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में सपा सरकार बनने पर जातीय जनगणना कराई जाएगी। पिछड़ों को उनका हक और सम्मान दिलाया जाएगा। उन्होंने  कहा कि भाजपा सरकार पिछड़ों की गणना नहीं कराना चाहती है क्योंकि वह जानती है कि इससे पिछड़े अपना हक और सम्मान मांगेंगे जबकि सपा समेत तमाम दल चाहते हैं कि पिछड़ों की गिनती हो जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर सप्ताह अपने गृह क्षेत्र गोरखपुर जाते हैं। वहां अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। एक व्यापारी की पुलिस पिटाई से मौत हो गई, इसकी जिम्मेदार यह सरकार है। मुख्यमंत्री अपराध के मामले में झूठ बोलते हैं। उन्हें एनसीआरबी के आंकड़ों की जानकारी नहीं है। वे एनसीआरबी का रिकॉर्ड नहीं देखते हैं। महिलाओं पर सबसे ज्यादा अत्याचार व अन्याय यूपी में हो रहा है। मानवाधिकार की सबसे ज्यादा नोटिस यूपी सरकार को मिलीं। सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां को फर्जी मुकदमे में फंसा करके जेल में रखा गया है।

 

अखिलेश यादव ने कहा कि किसान और गरीब इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा का सफाया कर देंगे। प्रदेश में बीजेपी की सरकार नहीं लौटेगी। सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार आ रही है। इस प्रकार साफ हो गया कि अखिलेश यादव ने कानपुर से विजय यात्रा क्यों शुरू की। मुलायम सिंह चाहते हैं। शिवपाल और अखिलेश के बीच समझौता हो जाए, मुलायम ने कई बार प्रयास किया पर अब तक बात नहीं बन पाई है। अब रथ यात्रा निकालते शिवपाल ने कहा कि सपा के साथ समझौता करने के लिए प्रसपा के द्वार खुले हैं।

 

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की विजय यात्रा को चुनाव अभियान का श्री गणेश माना जा रहा है। शिवपाल यादव की रथयात्रा को भी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत बताया जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में मुलायम परिवार में कलह के कारण समाजवादी पार्टी की जबरदस्त हार हुई थी। शिवपाल यादव ने अलग होकर नई पार्टी बना ली थी। उन्हें कोई खास फायदा तो नहीं हुआ लेकिन शिवपाल और अखिलेश के अलग अलग लड़ने से दोनों को बहुत नुकसान हुआ। शिवपाल की पार्टी के कारण लोकसभा चुनाव में रामगोपाल यादव के बेटे चुनाव हार गए।

 

इटावा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, आगरा, बदायूं और औरैया जैसे जिलों में शिवपाल यादव का अब भी राजनैतिक दबदबा बना हुआ है। अगर समाजवादी पार्टी ने उनसे गठबंधन नहीं किया तो फिर अखिलेश को नुकसान हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक शिवपाल चाहते हैं कि उनके बेटे आदित्य और उनके समर्थकों को टिकट मिल जाए। अखिलेश यादव इतनी सीटें देने को तैयार नहीं है। 

 

अखिलेश यादव ने यूपी विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार की शुरुआत की। कानपुर से विजय रथ यात्रा का आगाज कर अखिलेश यादव ने हुंकार भरी है। अब सवाल ये उठता है कि इस यात्रा के बलबूते पर क्या समाजवादी पार्टी बीजेपी के गढ़ में जगह बना पाएगी। अखिलेश ने पिछले कुछ महीनों में अपने तमाम सहयोगी दलों के नेताओं की बड़ी यात्राएं निकलवाई। जिस तरह समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने इसके लिए अपनी तरफ से भी पूरा पसीना बहाया, वो धीरे-धीरे एक खास रणनीति पर आगे बढ़ने जैसा लगता है।यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने बिगुल बजा दिया है। अखिलेश यादव ने विशाल रथ यात्रा की शुरुआत के बाद कहा कि उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी का सफाया करने के लिये सपा विजय यात्रा निकाल रही है और इसे जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। अखिलेश यादव ने अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले लोगों तक पहुंचने और उनका समर्थन हासिल करने की मंशा बनायी है। यात्रा शुरू होने से पहले अखिलेश ने पत्रकारों से कहा कि इस यात्रा का मकसद राज्य से भारतीय जनता पार्टी की सरकार का सफाया करना है और जिस तरह से लखीमपुर खीरी में कानून को कुचला गया है, किसानों को कुचला गया है, संविधान की धज्जियां उड़ाई गई हैं उससे जनता में बीजेपी के प्रति बहुत आक्रोश है। अखिलेश यादव ने कहा, समाजवादी पार्टी की ओर से लगातार जनता से आशीर्वाद लेने के लिए ये विजय रथ चलेगा। कानपुर के गंगा पुल से शुरू हुई इस यात्रा में लाल टोपी पहने और पार्टी के झंडे लिए समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया। जगह-जगह जनसमूह भी उमड़ा।

~अशोक त्रिपाठी

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