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सियासी रहनुमा की तलाश में दोराहे पर मुसलमान

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शाहवेज खान

एक के बाद एक खत्म हो रही प्रदेश से मुस्लिम लीडरशिप

सपा बसपा कांग्रेस में हाशिए पर पहुंचा मुसलमानों का सियासी वजूद

मेरठ। एक दौर था जब उत्तर प्रदेश (UP) के अंदर सर्वधर्म और हर जाति के लीडरशिप सियासत में बढ़-चढ़कर दिखाई देती थी खास तौर से कांग्रेस और सपा में मुस्लिम लीडरशिप (Muslim leadership) ने कई इतिहास रचे हैं कैराना के लोकसभा (Lok Sabha) सांसद रहे चौधरी मुनव्वर हसन (Chaudhary Munawwar Hasan) ने बेहद कम उम्र में चारों सदन पहुंचकर एक कीर्तिमान बनाया वहीं राज्यसभा सांसद रहे मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) और गड़ी पुख्ता के अमीर आलम खान (Amir Alam Khan) भी सियासत की दुनिया में एक जाना पहचाना नाम रहे हैं इसी के साथ मुजफ्फरनगर और बिजनौर की सियासत में सबसे मजबूत कड़ी राणा परिवार ने विधायक सांसद व जिला पंचायत अध्यक्ष का पद हासिल कर अपना लोहा बनवाया है वही सहारनपुर में मसूद परिवार सियासत का बेहद मजबूत नाम रहा है ।

बागपत में कोकब हमीद (Kokab Hameed) का परिवार सियासत का एक मजबूत स्तंभ रहा है। 2010 के दशक तक मुस्लिम लीडरशिप सपा बसपा कांग्रेस व लोकल में पनपती रही है कभी दलित मुस्लिम समीकरण तो कभी जाट मुस्लिम (Jat Muslim) समीकरण के चलते मुस्लिम समाज की आवाज सियासत में बुलंद रही है. वही उत्तर प्रदेश में कई बार कैबिनेट मंत्री रहे और मुस्लिम लीडरशिप (Muslim leadership) के सबसे बड़े चेहरे आजम खान का जलवा उत्तर प्रदेश में क्या रहा है यह किसी से छुपा नहीं है।। वही मेरठ की बात करें पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी (Haji Yakub Qureshi) व हाजी शाहिद अखलाक (Haji Shahid Akhlaq) का मेरठ (Meerut) सहित पश्चिम में क्या जलवा रहा यह सब जानते है वहि आज भी हाजी याकूब कुरैशी (Haji Yakub Qureshi) को दुनिया आशिक ए रसूल के नाम से भी जानती है।

लेकिन सियासत ने जैसे ही धार्मिक चोला ओडना शुरू किया । वैसे-वैसे ही धीरे-धीरे मुस्लिम लीडरशिप खामोश होती जा रही है । खासतौर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP) में मुस्लिम लीडर शिप बेहद कमजोर पड़ती गई और आज नौबत यह है पश्चिम उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे प्रदेश में मुस्लिम समाज (Muslim community ) अपने सियासी रहनुमाओं की तरफ देख रहा है वह रहनुमा जो उसके मसाले सियासत के बल पर हल किया करते थे आज बड़े-बड़े मुस्लिम समाज के नेता कुछ भी करने और बोलने से घबरा रहे हैं। क्योंकि उन्होंने सियासत का शिकार होने वाले अपनों का दर्द बड़ी नजदीक से देखा है कैबिनेट मंत्री आजम खान (Azam Khan) के साथ किस तरह सियासी खेल खेला गया जो उन्हें 2 साल तक जेल में रहना पड़ा । वही कैराना का हसन परिवार भी सियासी शिकार हुआ जिसके चलते विधायक नाहिद हसन को लम्बे समय तक जेल में रहना पड़ा, सपा विधायक इरफान के साथ क्या हुआ वह भी सब ने देखा।

मेरठ के कद्दावर नेता हाजी याकूब कुरैशी (Haji Yakub Qureshi) को भी परिवार सहित 10 महीने जेल में रहना पड़ा। फिलहाल आजम खान सहित सभी मुस्लिम नेता जमानत पर बाहर है लेकिन इतने बड़े रसूखदार नेताओं के साथ जब बुरा वक्त आया तो उनकी ही पार्टी ने उनका साथ छोड़ा और यह बात मुस्लिम समाज को जरा भी गवारा नहीं गुजरी । आज मुस्लिम समाज अपनी लीडरशिप और रहनुमा की तलाश में दोराहे पर खड़ा है वह एक तरफ सपा को देख रहा है तो दूसरी तरफ बसपा को वही नौजवानों का रुख कांग्रेस में भविष्य तलाश रहा है तो कुछ रालोद के अंदर जाट मुस्लिम समीकरण के साथ सौहार्द को तलाश रहे हैं तो कुछ अपनी सियासत अपनी कयादत का नारा देकर ओवसी को मुस्लिम लीडर बनाने में लगे है। इस तरह मुस्लिम समाज का वोट पूरी तरह बिखराव में नजर आ रहा है । फिलहाल मुस्लिम अपने रहनुमाओं की तलाश में है उन रहनुमाओं की तलाश में जो समय समय पर मुस्लिमो के जख्मों पर मरहम लगाता रहे , क्यों की आज की गन्दी धार्मिक सियासत ने मुस्लिम वोटरों को सियासी अछूत बना दिया है।

अपनो के गम में साथ नही दिखे अखिलेश – माया

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश (Akhilesh) हमेशा से मुस्लिम मुद्दों पर खामोशी अख्तियार करते रहे हैं । चाहे आजम खान का मामला हो या फिर कैराना के हसन परिवार का मामला,या फिर विधायक इरफान का मामला, अखिलेश हमेशा साइलेंट मोड में रहे, वही प्रदेश की चार बार मुखमंत्री रही बहन कुमारी मायावती तो हमेशा से एक तरफा फैसला लेती रही है । जिस समय याकूब परिवार पर आफत आई तो उनकी पार्टी भी खामोश नजर आई, बसपा में भी मुस्लिम लीडरशिप का क्या हाल है था किसी से छिपा नहीं है हाल ही में बसपा ने इमरान को भी बाहर का रास्ता दिखाया यह बात भी वोटर के गले नही उतर रही है।

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कांग्रेस भी नही संभाल पाई मुस्लिम लीडर शिप

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को जिंदा रखने वाले चंद लोग हैं।चाहे वह सहारनपुर का मसूद परिवार हो या फिर मुजफ्फरनगर में सैदुज्जमा का परिवार , दोनो परिवारों ने कांग्रेस को शिखर तक पहुंचाया मगर कांग्रेस ने भी यूपी के नेताओं को हमेशा सियासी सूखे में रखा ।अगर कांग्रेस चाहती तो यूपी में अपनी सियासत को जिंदा रख सकती थी मगर सॉफ्ट हिंदुत्व की राह ने कांग्रेस में भी मुस्लिम लीडरशिप को हाशिए पर पहुंचा दिया है जिसकी वजह से राहुल को भी अपनी सीट अमेठी से हाथ धोना पड़ा।

हिंदुत्व की सियासत में अछूत हुआ मुसलमान

पूरे देश में इस समय चल रही हिंदुत्व की सियासत ने सियासी पैमाने को भी बदल कर रख दिया है आज ना तो विकास पर बात होती है और ना ही देश के सौहार्ट पर अगर बात होती है तो सिर्फ हिंदू मुसलमान पर सियासी घमासान मचा रहता है इस बीच समाजवादी पार्टी हो बसपा हो लोक दल हो या फिर कांग्रेस सब इस समय खुलकर मुस्लिम समाज को गले लगाने से कतरा रहे हैं सभी पार्टी के मुखियाओं को डर है कि अगर वह मुस्लिम समाज को आगे बढ़ने का काम करेंगे या फिर उनके मसलों पर खुलकर बोलेंगे तो उन्हें हिंदू समाज का वोट नहीं मिलेगा देश में राज कर रही मोदी सरकार ने जिस तरीके से हिंदुत्व का मुद्दा पकड़ रखा है उससे विपक्षी पार्टियों भी परेशान है और अपनी परेशानी को दूर करने के लिए आज वह सभी विपक्षी पार्टी जिनका वाटर सिर्फ़ मुसलमान है वह खुद भी हिंदू समाज की वोट लेने के लिए उन्हें अपनी तरफ सॉफ्ट हिंदुत्व मध्य से आकर्षित करने का प्रयास कर रही है । और सपा,बसपा,लोकल, वह कांग्रेस को यह भी डर

सता रहा है की अगर उसने मुस्लिम को गले लगाया तो जाती के नाम पर मिलने वाला वोट भी छिटक सकता है। और इसी के चलते पार्टियां अपने 90% वोट बैंक की अनदेखी कर रही हैं जिसके चलते आज मुस्लिम समाज सियासत की दुनिया में खुद को अछूत समझा रहा है।

एआइएमआइएम का बढ़ रहा वोट प्रतिशत

सियासत की दुनिया में मुस्लिम समाज को अछूत बनाने वाली और मुस्लिम समाज को अपना कहने वाली राजनीतिक परियों की नीति ने मुस्लिम समाज को जगा दिया है जिसके चलते ए आई एम आई एम के सदर वह सांसद असदुद्दीन ओवैसी इस चीज का भरपूर फायदा उठा रहे हैं वह लगातार मुस्लिम समाज में बने हुए हैं और जवान टपके को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं वह लगातार इस तरह की बयान बाजी कर रहे हैं जिससे मुस्लिम नौजवान जोशीला होकर असदुद्दीन ओवैसी के नारे लगा रहा है असदुद्दीन ओवैसी जिस तरीके से बयान बाजी करते हैं उससे मुस्लिम समाज तो खुश होता है लेकिन बयान बाजी के चलते सियासत की दुनिया में सबसे बड़ा नुकसान मुस्लिम समाज का ही हुआ है फिलहाल असदुद्दीन ओवैसी का वोट प्रतिशत मुस्लिम समाज में लगातार बढ़ता जा रहा है जिसके चलते विपक्षी पार्टी भी परेशान है और विपक्षी पार्टियों की नीति और नियत को निशाना बनाते हुए असदुद्दीन ओवैसी लगातार मुस्लिम समाज में अपनी पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ाने में कामयाब हो रहे हैं।

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