National Desk
कर्नाटक विधानसभा इलेक्शन (Karnataka Vidhan Sabha Election ) को लेकर पिछले दो महीने से मचा शोरगुल वोटिंग के साथ बहुत हद तक थम गया है. अब सभी की निगाहें 13 मई को आने वाले 224 विधानसभा सीटों के नतीजों पर है
कर्नाटक विधानसभा इलेक्शन में भाजपा (BJP) के पास सत्ताविरोधी रूझान की टक्कर के लिए कोई लोकल मुद्दा नहीं था. भाजपा का पूरा कैंपेनिंग केवल और केवल ‘ब्रांड मोदी’ को सामने रखकर उनके नाम पर चुनाव जीतने पर टिका हुआ था।
कर्नाटक विधानसभा इलेक्शन (Karnataka Vidhan Sabha Election ) के दौरान कांग्रेस ने स्टार कैंपेनर्स की बजाय लोकल लीडर्स पर ज्यादा ध्यान दिया. हालांकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने 22 रैली-रोड शो किए, जबकि स्थानीय नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 34 रैलियां की।
कर्नाटक विधानसभा इलेक्शन (Karnataka Vidhan Sabha Election ) प्रचार में भी राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अनोखा तरीका अपनाया था. वह आम जनता से मिलने के लिए बस में सफर करने या बस स्टॉप पर महिलाओं के मन की बात टटोलने जैसे काम करते दिखाई दिए।
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पीएम मोदी के पिछले एक साल में कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों में तमाम दौरों और रोडशो से भी लगाया जा सकता है. विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी पीएम मोदी ने 24 रैली और कई रोडशो किए. ऐसे में यदि कांग्रेस जीतती है तो इसे सीधे तौर पर मोदी फैक्टर के लिए झटका माना जाएगा, क्योंकि विपक्षी दल इसे मोदी के कम होते जादू की तरह देखेंगे. पीएम मोदी के अलावा कर्नाटक में भाजपा के सभी दिग्गज नेताओं ने दिन-रात एक किए थे. भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 31 रैली, अमित शाह ने 35 रैली-रोड शो, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 रैली और असम के सीएम हिमांता बिस्वा सरमा ने 16 रैली-रोडशो किए. इसके बावजूद भाजपा हारी तो बहुत सारे सवाल खड़े हो जाएंगे।
कर्नाटक चुनाव के दौरान कांग्रेस ने स्टार कैंपेनर्स की बजाय स्थानीय नेताओं पर ज्यादा ध्यान दिया. हालांकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने 22 रैली-रोड शो किए, जबकि स्थानीय नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 34 रैलियां की. फिर भी कांग्रेस यदि जीत गई तो इससे उसे 2024 लोकसभा चुनाव के लिए ‘बूस्टर डोज’ जैसा आत्मविश्वास मिलेगा. एकतरफ कांग्रेस दक्षिण भारत में भाजपा का रथ आगे बढ़ने से रोकने में सफल होगी, वहीं उसे इस जीत के बाद भाजपा के खिलाफ संगठित हो रहे विपक्षी दलों में भी पुरानी हैसियत वाला रुतबा हासिल हो पाएगा.
कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने कर्नाटक पर खास ध्यान दिया था. इस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुद्दा जमकर उठाया था. इसके अलावा मौजूदा चुनाव प्रचार में भी राहुल ने अनोखा तरीका अपनाया था. वह आम जनता से मिलने के लिए बस में सफर करने या बस स्टॉप पर महिलाओं के मन की बात टटोलने जैसे काम करते दिखाई दिए. ऐसे में कांग्रेस की जीत के बाद राहुल गांधी की ब्रांड इमेज भी मुतासिर होगी ।
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